भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) ने पहली तिमाही (Q1FY27) में **₹400 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी को **₹460 करोड़** का घाटा हुआ था। कंपनी का रेवेन्यू **40%** बढ़कर **₹7,700 करोड़** हो गया, जिसका मुख्य कारण **₹2.6 लाख करोड़** का विशाल ऑर्डर बुक है।
घाटे से मुनाफे में वापसी
सरकारी कंपनी भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) ने नए फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत शानदार की है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में ₹400 करोड़ का शानदार नेट प्रॉफिट कमाया है। यह पिछले साल की इसी तिमाही में हुए ₹460 करोड़ के घाटे से एक बड़ी वापसी है। इस तिमाही में कंपनी के रेवेन्यू में भी 40% की जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई, जो ₹7,700 करोड़ तक पहुँच गया।
ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार
कंपनी के ऑपरेशन्स में बड़ा सुधार देखने को मिला है। BHEL का ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन, जो ब्याज और टैक्स से पहले मुख्य ऑपरेशन्स से होने वाली कमाई को दर्शाता है, पिछले साल के घाटे की स्थिति से सुधरकर लगभग 6.5% हो गया है। कंपनी ने कलेक्शन साइकिल में सुधार किया, जिससे कुल कलेक्शन 34% बढ़कर ₹11,000 करोड़ हो गया। इससे फाइनेंसिंग कॉस्ट में कमी आई, जो पिछले साल ₹180 करोड़ से घटकर ₹140 करोड़ रह गई।
मजबूत ऑर्डर बुक और बिज़नेस सेगमेंट
BHEL की भविष्य की कमाई की विजिबिलिटी काफी मजबूत बनी हुई है, क्योंकि कंपनी का कुल ऑर्डर बुक ₹2.6 लाख करोड़ तक पहुँच गया है। कंपनी ने इस तिमाही में ₹26,700 करोड़ के नए ऑर्डर हासिल किए हैं। पावर सेगमेंट, जो बिजनेस का सबसे बड़ा हिस्सा है, के रेवेन्यू में 52% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹5,900 करोड़ पर पहुँच गया। इस सेगमेंट का प्रॉफिट मार्जिन भी पिछले साल के निगेटिव 13% से सुधरकर पॉजिटिव 10% हो गया है। वहीं, इंडस्ट्री सेगमेंट (जिसमें डिफेंस, न्यूक्लियर और रेल जैसे सेक्टर शामिल हैं) ने ₹1,800 करोड़ का स्थिर रेवेन्यू दिया, हालांकि इसका प्रॉफिट मार्जिन थोड़ा घटकर 14% पर आ गया।
भविष्य की योजनाएं और जोखिम
BHEL फिलहाल NTPC के लिए ₹21,000 करोड़ के मेजा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट और नाइजीरिया में डैंगोट पेट्रोलियम रिफाइनरी के साथ एक बड़े एक्सपोर्ट डील जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। ये प्रोजेक्ट्स कंपनी के लिए ग्रोथ का स्पष्ट रास्ता दिखाते हैं। हालांकि, निवेशकों को यह भी ध्यान रखना होगा कि कंपनी इन बड़े प्रोजेक्ट्स को बिना किसी बड़ी देरी या लागत बढ़ोतरी के समय पर पूरा कर पाएगी या नहीं, क्योंकि इस तरह के बड़े इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स में ये आम जोखिम होते हैं।
इसके अलावा, स्टॉक फिलहाल FY27 के अनुमानित आय के 44 गुना P/E (प्राइस-टू-अर्निंग) मल्टीपल पर ट्रेड कर रहा है। यह वैल्यूएशन ऐतिहासिक औसत की तुलना में काफी ज्यादा है, जिसका मतलब है कि कंपनी के टर्नअराउंड और भविष्य के ऑर्डर एक्जीक्यूशन को लेकर चल रही उम्मीदें स्टॉक की कीमत में पहले से ही शामिल हो चुकी हैं। आने वाली तिमाहियों में शेयरधारकों के लिए मुख्य फोकस यह देखना होगा कि क्या कंपनी अपने वर्किंग कैपिटल साइकिल को अपने लक्ष्य 105 दिनों तक कम कर पाती है और अपने ऑपरेशन्स को बढ़ाते हुए इन ऊंचे प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रख पाती है।
