सरकारी कंपनी भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) के शेयर आज रिकॉर्ड ₹445.40 के स्तर पर पहुंच गए। यह उछाल कंपनी के Q1FY27 में **40.3%** के रेवेन्यू जंप और मुनाफे में वापसी के बाद आया है। **₹2.60 लाख करोड़** की विशाल ऑर्डर बुक और फॉरेन इन्वेस्टर्स की बढ़ती खरीदारी ने शेयर को मजबूती दी है।
Q1 में कंपनी का दमदार टर्नअराउंड
सरकारी दिग्गज भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) के शेयरों ने शुक्रवार को नया इतिहास रच दिया। कंपनी के जून तिमाही के शानदार नतीजों के बाद शेयर ₹445.40 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए। निवेशकों में दिख रहा उत्साह कंपनी की वित्तीय सेहत में आए बड़े सुधार को दर्शाता है।
जून 2026 को समाप्त तिमाही के लिए, BHEL ने ₹7,697.7 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 40.3% अधिक है। सबसे अहम बात यह है कि कंपनी पिछले साल के ₹537.1 करोड़ के घाटे से निकलकर ₹381.9 करोड़ के मुनाफे में आ गई है। ऑपरेटिंग प्रॉफिट या EBITDA ₹503.9 करोड़ रहा, जिससे ऑपरेटिंग मार्जिन 6.6% हो गया। यह पिछले साल के -9.8% के मुकाबले एक बड़ी छलांग है, जो बताता है कि कंपनी के कॉस्ट-कटिंग उपायों और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन का असर अब बैलेंस शीट पर दिखने लगा है।
रिकॉर्ड ऑर्डर बुक और भविष्य की राह
कंपनी की भविष्य की कमाई की विजिबिलिटी ₹2.60 लाख करोड़ की रिकॉर्ड ऑर्डर बुक से और मजबूत हो गई है, जो पिछले साल के मुकाबले 27% बढ़ी है। सिर्फ इसी तिमाही में BHEL ने ₹26,745 करोड़ के नए ऑर्डर हासिल किए हैं। इन ऑर्डरों में सबसे बड़ा हिस्सा पावर सेक्टर का रहा, जिससे ₹22,625 करोड़ का नया कारोबार मिला। इंडस्ट्रियल और एक्सपोर्ट सेगमेंट से मिले अतिरिक्त ऑर्डर ने ऑर्डर मिक्स को संतुलित किया। निवेशकों के लिए, यह बड़ी ऑर्डर बुक भविष्य के राजस्व का जरिया है, हालांकि इसका पूरा फायदा इन प्रोजेक्ट्स को समय पर और बजट में पूरा करने की कंपनी की क्षमता पर निर्भर करेगा।
इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स का बढ़ता भरोसा
मार्केट डेटा के अनुसार, फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) लगातार तीन तिमाहियों से BHEL में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। जून तिमाही के अंत तक, FPIs के पास कंपनी में 9.5% हिस्सेदारी थी, जो पिछली तिमाही के 7.2% से अधिक है। इस खरीदारी का सिलसिला अप्रैल 2026 में शेयर के ₹239.25 के निचले स्तर से 86% की तेजी के साथ चला है। संस्थागत निवेशकों का यह समर्थन अक्सर कंपनी की लॉन्ग-टर्म बिजनेस स्ट्रेटेजी में विश्वास को दर्शाता है, खासकर घरेलू ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर और पावर जनरेशन पर इसके फोकस को।
ऑपरेशनल जोखिम और आगे क्या देखना है
हालांकि कंपनी ने मजबूत रिकवरी दिखाई है, निवेशकों को अपनी विशाल ऑर्डर बुक के एग्जीक्यूशन की गति पर नजर रखनी चाहिए। पावर इक्विपमेंट सेक्टर में ऐतिहासिक रूप से साइट वर्क में देरी और सरकारी बिजली बोर्डों से पेमेंट साइकिल की चुनौतियां रही हैं, जो कैश फ्लो को प्रभावित कर सकती हैं। कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच कंपनी की प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखने की क्षमता भी शेयरधारकों के लिए एक महत्वपूर्ण फैक्टर होगी। भविष्य में, मौजूदा प्रोजेक्ट्स के कमीशनिंग की रफ्तार और नए ऑर्डरों से मार्जिन की प्राप्ति यह तय करेगी कि कंपनी अपनी इस कमाई की गति को जारी रख पाती है या नहीं।
