BHEL शेयर में Mutual Funds का दांव, पर क्यों बढ़ रही निवेशकों की चिंता?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
BHEL शेयर में Mutual Funds का दांव, पर क्यों बढ़ रही निवेशकों की चिंता?
Overview

Bharat Heavy Electricals Limited (BHEL) के शेयर में Mutual Funds लगातार बड़ी मात्रा में निवेश कर रहे हैं। यह निवेश मुख्य रूप से भारत की बढ़ती ऊर्जा मांग और कंपनी की मजबूत ऑर्डर बुक से प्रेरित है। हालांकि, शेयर की ऊंची वैल्यूएशन और कम रिटर्न की चिंताएं भी निवेशकों के सामने हैं।

Mutual Funds ने फरवरी महीने में Bharat Heavy Electricals Limited (BHEL) में अपनी हिस्सेदारी 3.14% तक बढ़ा दी है। यह तब हो रहा है जब भारत की ऊर्जा मांग पिछले 15 सालों में 100% से ज्यादा बढ़कर FY25 में 1,694 अरब यूनिट तक पहुंच गई है। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के अंत में BHEL का ऑर्डर बुक ₹2,22,800 करोड़ का था, जिसमें से 80% पावर सेक्टर के लिए था। कंपनी ने Q3FY26 में 16.4% बिक्री बढ़ने के साथ ही नेट प्रॉफिट में 190% की जोरदार उछाल दर्ज कर ₹390 करोड़ का मुनाफा कमाया। फरवरी में Mutual Funds का निवेश करीब ₹2,833.8 करोड़ रहा। हालांकि, इस मजबूत फंड फ्लो के बावजूद, BHEL का शेयर 113.8x के P/E रेशियो पर ट्रेड कर रहा है, जो इंडस्ट्री के औसत 31x और भारतीय इलेक्ट्रिकल इंडस्ट्री के 23x से काफी ज्यादा है।

BHEL का मार्केट कैपिटलाइजेशन फिलहाल करीब ₹91,500 करोड़ है। देश के एनर्जी ट्रांजिशन के लिए यह एक अहम कंपनी है, लेकिन इसके वैल्यूएशन मैट्रिक्स और ऑपरेशनल एफिशिएंसी में बड़ा अंतर नजर आता है। कंपनी का Return on Capital Employed (ROCE) करीब 4.87% है, जो इंडस्ट्री के 28% के मीडियन से काफी कम है। इसका मतलब है कि BHEL अपने निवेश पर प्रतिस्पर्धियों की तुलना में कम मुनाफा कमा पा रहा है। इसके अलावा, 112x के P/E रेशियो की तुलना Larsen & Toubro (27.6x), Siemens (67.7x) और ABB India (81.2x) जैसे प्लेयर्स से करें तो यह काफी ऊपर है। सरकार द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और रिन्यूएबल एनर्जी पर जोर देना एक पॉजिटिव फैक्टर है, क्योंकि भारत 2030 तक 500 GW रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता का लक्ष्य रखता है।

मजबूत ऑर्डर इनफ्लो और सेक्टर के पॉजिटिव ट्रेंड के बावजूद, BHEL का वैल्यूएशन उसके फंडामेंटल परफॉरमेंस से जुदा लग रहा है। एक पब्लिक सेक्टर कंपनी के लिए 110x से ऊपर का P/E रेशियो बहुत ज्यादा माना जाता है, खासकर एक साइक्लिकल इंडस्ट्री में। यह प्रीमियम वैल्यूएशन उसके कम ROCE से मेल नहीं खाता, जो लगातार इंडस्ट्री एवरेज से कम रहा है। यह कैपिटल डिप्लॉयमेंट और ऑपरेशंस में संभावित इनएफिशिएंसी का संकेत देता है। सरकार द्वारा लाए गए बड़े ऑर्डर्स से कंपनी को विजिबिलिटी मिलती है, लेकिन प्रोजेक्ट एक्जीक्यूशन रिस्क भी बढ़ाते हैं। हाल के फाइनेंशियल नतीजों में सुधार दिखा है, लेकिन ROCE, जो प्रॉफिटेबिलिटी का एक अहम पैमाना है, अभी भी चिंता का विषय बना हुआ है।

विश्लेषकों (Analysts) के बीच BHEL के भविष्य को लेकर राय बंटी हुई है। कुछ रिपोर्ट्स 'Moderate Buy' की सलाह दे रही हैं, जिनका अनुमानित 12 महीने का प्राइस टारगेट करीब ₹343 है। वहीं, अन्य विश्लेषक इसे न्यूट्रल या थोड़ा नेगेटिव देख रहे हैं, जिनके प्राइस टारगेट में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। मार्केट कंपनी के स्ट्रैटेजिक महत्व और ऑर्डर बुक को उसके स्ट्रेच्ड वैल्यूएशन और परफॉरमेंस से तोल रहा है, जो एक जटिल निवेश की स्थिति पैदा करता है।

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