मुनाफे में आई भारी गिरावट, रिवेन्यू पर भारी पड़े खर्चे
BEML के तीसरे फाइनेंशियल ईयर (FY26) की तीसरी तिमाही के नतीजे बाजार को चौंकाने वाले रहे। जहां एक ओर कंपनी का रिवेन्यू 23.7% बढ़कर ₹1,083 करोड़ हो गया, वहीं दूसरी ओर 'अन्य एक्सपेंसेस' में लगभग दोगुना इजाफा ( ₹143 करोड़ से बढ़कर ₹255 करोड़), मैटेरियल्स की लागत में 41.5% की बढ़ोतरी ( ₹395 करोड़ से ₹559 करोड़), और एम्प्लॉई बेनिफिट एक्सपेंसेस में वृद्धि ( ₹206 करोड़ से ₹222 करोड़) के चलते कंपनी को ₹22.4 करोड़ का नेट लॉस झेलना पड़ा। यह पिछले साल की इसी तिमाही में दर्ज ₹24 करोड़ के प्रॉफिट के बिल्कुल विपरीत है।
ऑपरेटिंग प्रॉफिट में 94% की भारी सेंध
कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट (EBITDA) 94% लुढ़ककर सिर्फ ₹4 करोड़ पर आ गया, जबकि बाजार विश्लेषकों को इससे ₹89 करोड़ के प्रॉफिट की उम्मीद थी। इस वजह से, EBITDA मार्जिन 6.9% से गिरकर बेहद मामूली 0.3% पर पहुंच गया। लागतों पर नियंत्रण न रख पाने के चलते कंपनी की मुनाफा कमाने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई है।
शेयर में 8% की गिरावट, वैल्यूएशन पर सवाल
इन खराब नतीजों का असर तुरंत शेयर बाजार में दिखा। 6 फरवरी 2026 को BEML का शेयर 8% गिरकर ₹1,607.4 पर आ गया। पिछले 12 महीनों में कंपनी के शेयर का प्रदर्शन लगातार नकारात्मक रहा है। 6 फरवरी 2026 तक, BEML का पिछले 12 महीनों का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो करीब 49.07x था, जबकि मार्केट कैप लगभग ₹13,182 करोड़ था। वहीं, बड़े प्लेयर जैसे L&T का PE रेश्यो 33.5x के आसपास है, जिससे BEML का वैल्यूएशन थोड़ा महंगा नजर आता है।
सेक्टर में सुस्ती और आगे की राह
रक्षा क्षेत्र में बजट 2026 के बाद से 'एक्सपेक्टेशन-ड्रिवन' से 'एग्जीक्यूशन-ड्रिवन' फेज में बदलाव आया है। इसी बीच, ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टैनले द्वारा HAL को डाउनग्रेड किए जाने जैसी घटनाओं ने भी सेक्टर को लेकर सतर्कता बढ़ाई है। ऐसे में, BEML की लागत प्रबंधन की विफलता और मुनाफे में गिरावट इसे इस बदलते माहौल में और मुश्किल में डाल सकती है। पहले एनालिस्ट्स का टारगेट प्राइस ₹2,436.25 के आसपास था, लेकिन इन नतीजों के बाद इसमें कटौती की उम्मीद है। शेयर का हालिया प्रदर्शन, प्रमुख मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड करना, एक मंदी का संकेत दे रहा है।