📉 तिमाही के नतीजे: आय बढ़ी, मार्जिन चमका
Automotive Axles ने Q3 FY26 में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने वित्तीय नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का रेवेन्यू ₹562 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही से 6% ज्यादा है। पिछली तिमाही की तुलना में तो इसमें 21% का जोरदार उछाल आया। वहीं, EBITDA ₹72.5 करोड़ पर पहुंचा, जो 14% YoY बढ़ा है। सबसे खास बात यह रही कि कंपनी ने अपने EBITDA मार्जिन को 93 बेसिस पॉइंट (bps) तक बढ़ाया, जो अब 12.9% पर है। यह पिछली तिमाही से भी 52 bps ऊपर है।
प्री-टैक्स प्रॉफिट (PBT) ₹51 करोड़ रहा, जिसमें 9.1% का मार्जिन है। हालांकि, इस पर नए वेज कोड लागू होने के कारण ₹11.9 करोड़ का एक बड़ा वन-टाइम खर्च (exceptional item) पड़ा, जिसने PBT को प्रभावित किया। नतीजतन, आफ्टर-टैक्स प्रॉफिट (PAT) ₹38.8 करोड़ रहा, जिसमें 7% का मार्जिन है। PAT में पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में 5.94% और पिछली तिमाही की तुलना में 7.97% की बढ़ोतरी हुई।
💪 ऑपरेशनल एफिशिएंसी और सेगमेंट परफॉरमेंस
कंपनी के मैनेजमेंट का कहना है कि रेवेन्यू ग्रोथ और बेहतर ऑपरेशनल एफिशिएंसी के दम पर मार्जिन में यह सुधार संभव हो पाया है। नए वेज कोड के एकमुश्त खर्च के बावजूद, EBITDA मार्जिन का 12.9% तक पहुंचना कंपनी की मजबूत परफॉरमेंस को दर्शाता है। कंपनी मुख्य रूप से हेवी कमर्शियल व्हीकल (MHCV) सेगमेंट पर फोकस कर रही है, जिसका प्रदर्शन इंडस्ट्री के साथ तालमेल बिठा रहा है। वहीं, एक्सपोर्ट, डिफेंस और ऑफ-हाईवे जैसे नॉन-MHCV सेगमेंट में 5% से 15% तक की गिरावट देखी गई है।
🚩 विश्लेषकों की चिंताएं और मैनेजमेंट का जवाब
हालांकि, नतीजों के बाद हुई एनालिस्ट कॉल में कुछ विश्लेषकों ने चिंता जताई कि Automotive Axles का रेवेन्यू ग्रोथ रेट इंडस्ट्री के ओवरऑल ग्रोथ से थोड़ा पीछे रह गया है। कंपनी के मैनेजमेंट ने इसका जवाब देते हुए कहा कि MHCV सेगमेंट तो इंडस्ट्री के साथ चल रहा है, लेकिन नॉन-MHCV सेगमेंट में आई गिरावट के कारण कुल रेवेन्यू ग्रोथ पर असर पड़ा है। मैनेजमेंट ने अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले लो-फ्लोर सिटी बसों के नए रेगुलेटरी मैंडेट के संभावित प्रभावों पर भी बात की।
🚀 भविष्य की तैयारी और आउटलुक
FY27 का आउटलुक फिलहाल अनिश्चित बना हुआ है। यह काफी हद तक ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों (OEMs) के स्टॉक लेवल और बाजार की चाल पर निर्भर करेगा। नॉन-MHCV सेगमेंट में लगातार आ रही गिरावट कंपनी के लिए एक चुनौती है। इसके अलावा, अक्टूबर 2026 में आने वाले लो-फ्लोर सिटी बसों के नए नियम के लिए प्रोडक्ट डेवलपमेंट में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं। Meritor के साथ हुए टेक्निकल फी अरेंजमेंट की वजह से 'अदर एक्सपेंसेस' में बढ़ोतरी पर भी नजर रखने की जरूरत है।
भविष्य की डिमांड को देखते हुए कंपनी अपनी क्षमता का विस्तार कर रही है। Q1 FY27 से शुरू होकर Q3 FY27 तक चलने वाले इस प्रोजेक्ट से M&HCV सेगमेंट के लिए 5 लाख यूनिट की क्षमता जुड़ जाएगी। कंपनी नए प्रोडक्ट डेवलपमेंट पर भी काम कर रही है, जिसमें MS185 का बढ़ता इस्तेमाल, नया टिपर एक्सल और एक ब्रेक प्रोडक्ट शामिल हैं। वर्तमान में कैपेसिटी यूटिलाइजेशन करीब 80% है, और फिलहाल कोई कमी नहीं है। कंपनी का लक्ष्य MHCV सेगमेंट में इंडस्ट्री की ग्रोथ के बराबर प्रदर्शन करना है। सबसे अच्छी बात यह है कि कंपनी लगभग डेट-फ्री है। ROE लगभग 16.6%-17.0% और ROCE करीब 22.3% पर है, जो कंपनी के कैपिटल पर मजबूत रिटर्न को दिखाता है। कंपनी अशोक लेलैंड जैसे प्रमुख OEM पार्टनर्स के साथ अपने मजबूत संबंधों को बनाए हुए है (जो ऐतिहासिक रूप से 50-60% रेवेन्यू का योगदान देता है)। कंपनी इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) एप्लीकेशन्स और सिटी बसों के लिए फ्यूचर ग्रोथ की तैयारी में जुटी है।