Impex Ferro Tech पर ऑडिटर की रेड फ्लैग! दिवालियापन और गहराया
मुंबई: Impex Ferro Tech Limited (NSE: IMPEXFERRO, BSE: 530284) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कंपनी को उसके ऑडिटर से 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त तिमाही के लिए एक 'क्वालिफाइड ओपिनियन' मिला है, जिसका मतलब है कि ऑडिटर को कंपनी के वित्तीय नतीजों पर गंभीर आपत्ति है। यह स्थिति कंपनी के पहले से ही खतरनाक हालत को और बिगाड़ रही है। आपको बता दें कि Impex Ferro Tech पहले से ही नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के तहत कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेसोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) यानी दिवालियापन समाधान प्रक्रिया से गुजर रही है, जिसकी शुरुआत 2 मई, 2024 को हुई थी।
रेवेन्यू में उछाल, लेकिन घाटे में डूबी कंपनी
दिसंबर 2025 की तिमाही के नतीजों के मुताबिक, Impex Ferro Tech का रेवेन्यू ₹30.79 लाख तक पहुंच गया, जो पिछले साल की इसी तिमाही के ₹1.25 लाख की तुलना में एक भारी 2363.2% की बढ़त है। हालांकि, यह उछाल बेहद निचले स्तर से आया है और कंपनी की लगातार जारी वित्तीय परेशानी को छुपा नहीं पा रहा है। इस दौरान कंपनी का कुल एक्सपेंसेस ₹181.14 लाख रहा, जिसके चलते कंपनी को ₹181.14 लाख का नेट लॉस हुआ। प्रति शेयर आय (EPS) पिछले साल की तरह ही नेगेटिव (₹0.21) रही।
ऑडिटर की गंभीर चिंताएं: वित्तीय सेहत पर बड़े सवाल
ऑडिटर की 'क्वालिफाइड ओपिनियन' के पीछे कई बड़ी और गंभीर वजहें हैं:
- अनप्रोवाइडेड इंटरेस्ट एक्सपेंस: कंपनी पर ₹63,020.22 लाख (लगभग ₹630 करोड़) का कुल ब्याज बकाया है, जिसे वित्तीय नतीजों में दर्ज ही नहीं किया गया है। यह अकाउंटिंग मानकों (IND AS 109) के खिलाफ है और कंपनी की देनदारियों को कहीं ज्यादा कम दिखाता है।
- अनिश्चित देनदारियां और एडवांसेस: कंपनी ने ट्रेड रिसीवेबल्स (₹313.60 लाख) और एडवांसेस (₹393.53 लाख) पर एक्सपेक्टेड क्रेडिट लॉस (ECL) का प्रोविजन बनाया है। लेकिन, ऑडिटर को FY 23-24 के लिए पर्याप्त सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट्स न मिलने के कारण इन रकमों की सही वैल्यू का पता नहीं चल सका। इसका मतलब है कि इन पैसों की वापसी कितनी होगी, यह कहना मुश्किल है।
- बैलेंस में गड़बड़ी: ट्रेड रिसीवेबल्स, पेएबल्स और कस्टमर एडवांसेस में काफी बड़ी रकमों का मिलान (reconciliation) नहीं हो पाया है। ऑडिटर इनकी रिकवरी की गारंटी नहीं दे सकते, जिससे यह आशंका है कि इन्हें राइट-ऑफ करना पड़ सकता है।
- क्रेडिटर के दावे: फाइनेंसियल और ऑपरेशनल क्रेडिटर्स (कर्जदारों) की तरफ से आए दावे कंपनी की किताबों में दर्ज रकम से कहीं ज्यादा हैं। इन विसंगतियों के लिए कंपनी ने कोई एडजस्टमेंट नहीं किया है, जिससे देनदारियों का सही स्तर अनिश्चित बना हुआ है।
- वैधानिक बकाया: 31 दिसंबर, 2025 तक ₹292.54 लाख का वैधानिक बकाया (statutory dues) नौ महीने से भी अधिक समय से लंबित था। इससे जुड़ा ब्याज और पेनल्टी भी नतीजों में दर्ज नहीं की गई है।
गोइंग कंसर्न पर बड़ा सवालिया निशान
ऑडिटर ने कंपनी की 'गोइंग कंसर्न' स्थिति (यह मानना कि कंपनी आगे भी चलती रहेगी) पर मटेरियल अनिश्चितता जताई है। Impex Ferro Tech ने लगातार कैश लॉस उठाया है, इसकी कुल लायबिलिटीज इसके कुल एसेट्स से ज्यादा हो गई हैं, और 31 दिसंबर, 2025 तक इसकी नेट वर्थ पूरी तरह खत्म हो चुकी है। कंपनी का भविष्य पूरी तरह से NCLT द्वारा किसी रेसोल्यूशन प्लान की मंजूरी और उसके सफल क्रियान्वयन पर निर्भर करता है।
सालों से बंद हैं प्लांट
Impex Ferro Tech को संचालन संबंधी समस्याओं का सामना लंबे समय से करना पड़ रहा है। पश्चिम बंगाल के कल्यानेश्वरी स्थित इसका मैन्युफैक्चरिंग प्लांट अक्टूबर 2022 से बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण अस्थायी रूप से बंद है। यह लंबा शटडाउन CIRP शुरू होने से पहले से चल रहा है, जो कंपनी की गहरी व्यावसायिक चुनौतियों को दर्शाता है।
निवेशकों के लिए बड़ा जोखिम
ऑडिटर की 'क्वालिफाइड ओपिनियन' निवेशकों के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत है। एसेट्स की वैल्यू कन्फर्म न कर पाना और बड़ी मात्रा में अनप्रोवाइडेड देनदारियां कंपनी के खराब गवर्नेंस और अकाउंटिंग कंट्रोल को दर्शाती हैं। कंपनी का अस्तित्व पूरी तरह NCLT के निर्णय पर टिका है, जो किसी भी निवेश को बेहद जोखिम भरा बनाता है।