Ashoka Buildcon Share: एसेट बेचकर कंपनी मालामाल! प्रॉफिट में **68%** की बंपर उछाल, कर्ज़ आधा हुआ

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AuthorNeha Patil|Published at:
Ashoka Buildcon Share: एसेट बेचकर कंपनी मालामाल! प्रॉफिट में **68%** की बंपर उछाल, कर्ज़ आधा हुआ
Overview

Ashoka Buildcon के लिए बीता तिमाही (Q3 FY26) काफी अहम रहा। कंपनी ने एसेट मोनेटाइजेशन (asset monetization) से मिले फायदों और कुछ खास आइटम्स की मदद से अपने स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट (PAT) में **68%** का शानदार उछाल दर्ज किया है, जो कि **₹102 करोड़** रहा। इस कदम से कंपनी का कन्सॉलिडेटेड डेट (consolidated debt) भी **₹2,188 करोड़** घटकर **₹2,722 करोड़** पर आ गया। हालांकि, कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी में नरमी के चलते कंपनी का स्टैंडअलोन रेवेन्यू **18%** और कन्सॉलिडेटेड रेवेन्यू **23%** गिर गया।

📉 नतीजों का पूरा लेखा-जोखा

Ashoka Buildcon Limited के तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के नतीजों में एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। एक ओर जहाँ एसेट मोनेटाइजेशन (asset monetization) से कंपनी के प्रॉफिट (Profit) में जोरदार उछाल देखा गया, वहीं दूसरी ओर रेवेन्यू (Revenue) में नरमी दर्ज की गई।

आंकड़े क्या कहते हैं?
स्टैंडअलोन (Standalone) आधार पर, Q3 FY26 में कंपनी की कुल आय ₹1,492 करोड़ रही, जो पिछले साल की समान तिमाही के ₹1,816 करोड़ की तुलना में 18% कम है। EBITDA में 16% की गिरावट आई और यह ₹157 करोड़ रहा, हालांकि EBITDA मार्जिन 30 bps सुधरकर 10.6% हो गया। खास मदों (exceptional items) को छोड़कर, प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) ₹50 करोड़ रहा। सबसे अहम बात यह है कि प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 68% की जोरदार साल-दर-साल (YoY) बढ़त देखी गई और यह ₹102 करोड़ पर पहुंच गया, जो पिछले साल की इसी तिमाही में ₹61 करोड़ था।

कन्सॉलिडेटेड (Consolidated) आधार पर, Q3 FY26 में रेवेन्यू 23% घटकर ₹1,866 करोड़ रहा। वहीं, कन्सॉलिडेटेड EBITDA में 30% की गिरावट आई और यह ₹474 करोड़ रहा, जिसका EBITDA मार्जिन 25.4% दर्ज किया गया। कन्सॉलिडेटेड PAT में बड़ा उछाल देखा गया और यह ₹2,111 करोड़ रहा, जिसका मुख्य कारण एसेट मोनेटाइजेशन से मिले बड़े फायदे और कुछ असाधारण मदें थीं।

कर्ज में भारी कमी!
कंपनी की सबसे बड़ी सफलता कन्सॉलिडेटेड डेट (consolidated debt) में आई भारी कमी है। दिसंबर 2025 तक कंपनी का कर्ज ₹4,910 करोड़ (सितंबर 2025) से घटकर ₹2,722 करोड़ रह गया। यह कमी पांच BOT SPVs की ₹1,814 करोड़ में हुई बिक्री के कारण संभव हुआ। यह डेट घटाने की रणनीति कंपनी के लिए एक बड़ा पॉजिटिव संकेत है। स्टैंडअलोन डेट ₹1,046 करोड़ पर था। इस तिमाही में कैपिटल एक्सपेंडिचर (CapEx) भी कम रहा, लगभग ₹15 करोड़। पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए CapEx का लक्ष्य ₹75-80 करोड़ रखा गया है।

मैनेजमेंट की राय और आगे की राह
कंपनी के मैनेजमेंट ने स्वीकार किया है कि निकट भविष्य में हाईवे कंस्ट्रक्शन की गतिविधियों में 10-15% की नरमी देखने को मिल सकती है। हालांकि, सरकारी लक्ष्यों और कॉरिडोर-आधारित विकास के कारण वे मीडियम से लॉन्ग-टर्म आउटलुक को लेकर आश्वस्त हैं। कंपनी का लक्ष्य FY26 के अंत तक एसेट मोनेटाइजेशन के जरिए कर्ज को ₹200-300 करोड़ तक लाना है। FY27 के लिए, रेवेन्यू में 15% ग्रोथ का अनुमान है, जबकि ऑर्डर मिलने की उम्मीद ₹11,000-12,000 करोड़ है। EBITDA मार्जिन 9.5% से 10.5% के बीच रहने का अनुमान है।

मुख्य घटनाएं
Ashoka Buildcon ने पांच BOT SPVs में अपनी हिस्सेदारी बेच दी और Ashoka Concessions Limited में बाकी इक्विटी खरीदकर इसे पूरी तरह अपनी सहायक कंपनी बना लिया। कंपनी को हाल ही में कई बड़े लेटर्स ऑफ एक्सेप्टेंस (LOAs) मिले हैं, जिनमें मिठी रिवर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (₹1,816 करोड़), एक फ्लाईओवर कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट (₹1,041 करोड़), और एक सिग्नेचर ब्रिज प्रोजेक्ट (₹307.7 करोड़) शामिल हैं। वर्तमान ऑर्डर बुक ₹15,927 करोड़ की है।

🚩 जोखिम और संभावनाएँ
इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की चक्रीय प्रकृति और प्रोजेक्ट्स में संभावित देरी मुख्य जोखिम बने हुए हैं। हालांकि कर्ज घटाने की प्रक्रिया सुचारू है, लेकिन निकट अवधि में रेवेन्यू पर दबाव कंपनी की लाभप्रदता को प्रभावित कर सकता है। निवेशक कंपनी की अपनी बड़ी ऑर्डर बुक को रेवेन्यू में बदलने की क्षमता और कर्ज घटाने की गति पर बारीकी से नजर रखेंगे। FY27 के लिए आउटलुक सतर्क रूप से आशावादी है, जो सेक्टर में रिकवरी और निरंतर निष्पादन पर निर्भर करेगा।

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