शेयर बाजार के दिग्गज निवेशक आशीष कचोलिया ने अपनी एसोसिएट फर्म के साथ मिलकर लेड रिसाइक्लिंग कंपनी Ardee Industries में **2.7%** हिस्सेदारी खरीदी है। कंपनी का रेवेन्यू तो तेजी से बढ़ा है, लेकिन हालिया नतीजों में गिरते हुए मार्जिन ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
दिग्गज इन्वेस्टर आशीष कचोलिया और उनकी एसोसिएट फर्म 'Bengal Finance and Investment' ने Ardee Industries में कुल 2.7% हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया है। यह निवेश ऐसे समय पर आया है जब कंपनी अपनी लेड रिसाइक्लिंग क्षमता को 50% से ज्यादा बढ़ाकर मध्य-2026 तक 1,56,950 टन सालाना करने की कोशिश कर रही है। हालांकि, बड़े निवेशकों की एंट्री से छोटी कंपनियों पर ध्यान जरूर जाता है, लेकिन कंपनी के लिए फिलहाल प्रॉफिटेबिलिटी बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
फाइनेंशियल प्रदर्शन और मार्जिन का दबाव
कंपनी का टॉप-लाइन ग्रोथ काफी दमदार रहा है, जहाँ रेवेन्यू FY24 के ₹463 करोड़ से उछलकर FY26 में ₹1,168 करोड़ पर पहुंच गया है। इसके बावजूद, डेटा बताता है कि कंपनी सेल्स को मुनाफे में बदलने में संघर्ष कर रही है। जून तिमाही में EBITDA मार्जिन पिछले साल के 13.44% से गिरकर 9.90% पर आ गया है। इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण कच्चे माल की बढ़ती लागत और ग्लोबल शिपिंग में आ रही बाधाएं हैं।
बिजनेस के सामने बड़े रिस्क
Ardee Industries का बिजनेस मॉडल काफी हद तक इम्पोर्टेड स्क्रैप पर निर्भर है, जो कुल रॉ मटेरियल खरीद का करीब 87% है। यह निर्भरता लेड की कीमतों में उतार-चढ़ाव और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट के प्रति कंपनी को बहुत संवेदनशील बनाती है। इसके अलावा, कंपनी का 'कस्टमर कंसंट्रेशन रिस्क' भी काफी ज्यादा है, क्योंकि वित्त वर्ष 2026 का 40% से अधिक रेवेन्यू केवल एक क्लाइंट, 'Amara Raja Energy & Mobility' से आया है।
बाजार का मूड और भविष्य की राह
लिस्टिंग के बाद से ही शेयर पर दबाव है। अक्टूबर 2026 तक स्टॉक ₹48 के आसपास कारोबार कर रहा था, जो इसके IPO प्राइस से नीचे है। कंपनी का वर्किंग कैपिटल साइकिल भी लंबा है, जिसे कैश में बदलने में 90 से 100 दिन का समय लगता है। अब निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कंपनी आने वाली तिमाहियों में अपने मार्जिन में सुधार कर पाती है या नहीं।
