तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) आधार पर भी कंपनी की हालत खराब दिखी, जहां रेवेन्यू में 50.1% की बड़ी गिरावट आई। प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) में साल-दर-साल 5.7% की कमी आई और यह ₹0.68 करोड़ रहा। हालांकि, PBT मार्जिन सुधरकर 10.13% हो गया, जो पिछले साल इसी तिमाही में 5.26% था। लेकिन, टैक्स खर्च में भारी बढ़ोतरी देखी गई, जो साल-दर-साल 97.0% बढ़कर ₹0.22 करोड़ हो गया।
कंपनी की बैलेंस शीट पर नजर डालें तो चिंताएं बढ़ जाती हैं। कुल एसेट्स (Total Assets) ₹17.44 करोड़ से बढ़कर ₹28.94 करोड़ हो गए। इसका बड़ा कारण करंट एसेट्स (Current Assets) में हुआ जबरदस्त इजाफा है, खासकर इन्वेंटरी (Inventory) जो ₹2.44 करोड़ से बढ़कर ₹17.63 करोड़ पर पहुंच गई। दूसरी तरफ, कंपनी की कुल लायबिलिटीज़ (Total Liabilities) ₹10.18 करोड़ से दोगुनी से भी ज़्यादा होकर ₹20.53 करोड़ हो गईं। इसमें फाइनेंशियल लायबिलिटीज़ (Financial Liabilities) का बड़ा हिस्सा है, जो कंपनी पर कर्ज का बोझ बढ़ा रही हैं।
जोखिम और आगे की राह:
कंपनी के सामने सबसे बड़ा जोखिम रेवेन्यू में लगातार गिरावट और इन्वेंटरी का तेजी से बढ़ना है। यह बाजार में मांग कमजोर होने या माल पुराना पड़ जाने का संकेत हो सकता है। बढ़ी हुई लायबिलिटीज़ कंपनी के वित्तीय जोखिम को और बढ़ाती हैं। निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में इन्वेंटरी टर्नओवर और सेल्स पर कड़ी नजर रखनी होगी।