Apple का भारत में जलवा! iPhone प्रोडक्शन का **25%** अब Made in India, China पर निर्भरता घटेगी

INDUSTRIAL-GOODSSERVICES
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
Apple का भारत में जलवा! iPhone प्रोडक्शन का **25%** अब Made in India, China पर निर्भरता घटेगी
Overview

Apple Inc. ने भारत में अपने iPhone की असेंबली (assembly) में ज़बरदस्त इज़ाफ़ा किया है। अब कंपनी अपने कुल डिवाइस का करीब **25%** भारत में ही तैयार कर रही है। इस बड़ी बढ़ोतरी के पीछे कंपनी की चीन पर निर्भरता कम करने और भारत के बढ़ते बाज़ार का फायदा उठाने की स्ट्रैटेजी (strategy) है।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

Apple अपने ग्लोबल सप्लाई चेन (supply chain) को मज़बूत करने की बड़ी स्ट्रैटेजी के तहत भारत में iPhone प्रोडक्शन (production) को ज़बरदस्त तरीके से बढ़ा रहा है। कंपनी का लक्ष्य एक मज़बूत, डुअल-हब मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम (manufacturing system) बनाना है, जो सिर्फ़ टैरिफ (tariff) चिंताओं से आगे बढ़कर हो। 2025 तक, भारत में Apple के मुख्य डिवाइस का लगभग 25% प्रोडक्शन हो रहा था, जो पिछले साल की तुलना में 53% बढ़कर करीब 5.5 करोड़ (55 million) यूनिट तक पहुँच गया। यह विस्तार सप्लाई चेन को ज़्यादा लचीला (resilient) बनाने और भारत के बढ़ते कंज्यूमर मार्केट (consumer market) से जुड़ने की एक प्रोएक्टिव (proactive) पहल है।

चीन और अमेरिका के बीच बढ़ते ट्रेड टेंशन (trade tensions) और टैरिफ़ की वजह से Apple अपनी मैन्युफैक्चरिंग को चीन से बाहर निकालना चाहता है। भारत सरकार ने प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम जैसी पहलों से इस बदलाव को सपोर्ट किया है, जो चीन की तुलना में ज़्यादा विकसित सप्लाई चेन इंफ्रास्ट्रक्चर (infrastructure) की कमी को पूरा करने में मदद करती है। हालांकि, भारत में मैन्युफैक्चरिंग की लागत अभी भी चीन या वियतनाम से ज़्यादा हो सकती है। मार्च 2026 तक, Apple (AAPL) का स्टॉक लगभग $257.00 पर ट्रेड कर रहा था, जिसका P/E रेशियो 32.57 और मार्केट कैप (market cap) $3.82 ट्रिलियन था, जो कंपनी की लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी में निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।

भारत तेज़ी से इलेक्ट्रॉनिक्स का एक बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब (hub) बन रहा है। पिछले दशक में, खासकर मोबाइल डिवाइस प्रोडक्शन के कारण, इस सेक्टर में ज़बरदस्त ग्रोथ देखी गई है। एक्सपर्ट्स (Experts) का अनुमान है कि 2030 तक भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स आउटपुट $610 बिलियन से ज़्यादा हो सकता है। Apple, Foxconn, Tata Electronics और Pegatron जैसे अपने मुख्य पार्टनर्स (partners) के साथ मिलकर लोकल सप्लायर टाइज़ (supplier ties) और असेंबली ऑपरेशंस (operations) को मज़बूत कर रहा है। यह भारतीय विस्तार एक बड़ी स्ट्रैटेजी का हिस्सा है जिसमें वियतनाम भी शामिल है, जहाँ Apple AirPods और MacBooks जैसे प्रोडक्ट्स भी तैयार करता है, जो एफिशिएंट लॉजिस्टिक्स (logistics) और ट्रेड डील्स (trade deals) का फ़ायदा उठाते हैं। Samsung जैसे कंपटीटर्स (competitors) भी भारत में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ा रहे हैं, खासकर डिस्प्ले जैसे कंपोनेंट्स (components) के लिए, जबकि वे वियतनाम में भी बड़े पैमाने पर काम कर रहे हैं। विश्लेषक (Analysts) आम तौर पर Apple की सप्लाई चेन शिफ्ट को पॉजिटिव मानते हैं, जिसमें 'Buy' रेटिंग और लगभग $292.15 का मीडियम 12-महीने का प्राइस टारगेट (price target) शामिल है। हालांकि, चुनौतियाँ बनी हुई हैं। महत्वपूर्ण PLI स्कीम मार्च 2026 में समाप्त होने वाली है, जिससे मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ को बनाए रखने के लिए एक्सटेंशन (extension) या नए फ्रेमवर्क (framework) पर बातचीत चल रही है।

प्रगति के बावजूद, भारत का मैन्युफैक्चरिंग माहौल चीन से पूर्ण बदलाव को सीमित करने वाली महत्वपूर्ण चुनौतियाँ पेश करता है। इंफ्रास्ट्रक्चर गैप (infrastructure gaps) और सप्लाई चेन की दिक्कतें चीन के स्थापित नेटवर्क की तुलना में स्केलिंग (scaling) को धीमा करती हैं। भारत के लेबर लॉज़ (labor laws) को चीन के मॉडल की तुलना में ज़्यादा वर्कफोर्स (workforce) की ज़रूरत होती है, जिस पर Apple एडजस्टमेंट (adjustments) की तलाश कर रहा है। देश का इम्पोर्टेड कंपोनेंट्स (imported components), खासकर चीन से आने वाले सेमीकंडक्टर्स (semiconductors) पर निर्भरता का मतलब है कि सप्लाई चेन पूरी तरह स्वतंत्र नहीं है। भारत और चीन के बीच भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical friction) भी कॉम्प्लेक्सिटी (complexity) बढ़ा सकता है। मैन्युफैक्चरिंग लागतें भले ही कम हुई हों, लेकिन भारत में अभी भी लगभग 11-14% का कॉस्ट डिसएडवांटेज (cost disadvantage) है। लॉन्ग-टर्म ग्रोथ (long-term growth) PLI स्कीम जैसे जारी सरकारी इंसेंटिव पर भी निर्भर करती है, जो अब खत्म होने वाली है और नीतिगत बदलावों का सामना कर सकती है, जिससे वित्तीय स्थिरता (financial sustainability) पर सवाल उठते हैं। मार्च 2025 तक, कुछ विश्लेषकों ने अनुमान लगाया था कि इन इंफ्रास्ट्रक्चर, लेबर और रेगुलेटरी फैक्टर (regulatory factors) के कारण उस साल के अंत तक Apple का भारत प्रोडक्शन सिंगल डिजिट (single digit) में ही रहेगा, जो टारगेट से काफी कम है।

Apple अपने भारतीय ऑपरेशंस को चीन के साथ उत्पादन को संतुलित करने और भू-राजनीतिक जोखिमों (geopolitical risks) को कम करने के लिए अपनी ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग स्ट्रैटेजी (manufacturing strategy) का एक अहम हिस्सा मानता है। हालांकि भारत से चीन के मैन्युफैक्चरिंग स्केल को जल्द ही पूरी तरह बदलने की उम्मीद नहीं है, लेकिन यह एक महत्वपूर्ण कॉम्प्लिमेंटरी हब (complementary hub) के रूप में अपनी जगह पक्की कर रहा है। Apple भारत में स्ट्रॉन्ग डबल-डिजिट रेवेन्यू ग्रोथ (revenue growth) भी देख रहा है, जो देश के प्रोडक्शन साइट और प्रमुख कंज्यूमर मार्केट दोनों के रूप में महत्व को उजागर करता है। कंपनी अपने रिटेल प्रेजेंस (retail presence) का विस्तार करने और भारतीय ग्राहकों के लिए प्रोडक्ट्स को कस्टमाइज़ (customize) करने की योजना बना रही है। विश्लेषक Apple के स्टॉक (AAPL) को लेकर आम तौर पर आशावादी बने हुए हैं, जो भारत जैसे बाजारों में अपनी डाइवर्सिफिकेशन (diversification) और ग्रोथ प्लान्स (growth plans) के सफल एग्जीक्यूशन (execution) के आधार पर संभावित अपसाइड (upside) की उम्मीद कर रहे हैं।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.