Apple का प्रोडक्शन अब सिर्फ iPhone तक सीमित नहीं रहा, बल्कि AirPods के एक्सपोर्ट में भी भारत एक बड़ा नाम बन गया है। यह तेज़ी से बढ़ता उत्पादन Apple की ग्लोबल सप्लाई चेन में एक बड़ी स्ट्रैटेजिक बदलाव का संकेत है, जो भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं और 'मेक इन इंडिया' पहलों को एक नई पहचान दे रहा है।
प्रोडक्शन में तेज़ी और स्ट्रैटेजिक बदलाव
Foxconn Interconnect Technology (FIT) ने अगस्त 2024 में अपने हैदराबाद प्लांट से AirPods की कमर्शियल शिपमेंट शुरू की थी। तब से लेकर अब तक, इस प्लांट की प्रोडक्शन कैपेसिटी तेज़ी से बढ़ी है और यह हर महीने करीब 2 लाख यूनिट्स तैयार कर रहा है। इस प्लांट के लिए करीब ₹3,000 करोड़ का निवेश किया गया है, और कुल निवेश ₹4,800 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। यह भारत को चीन और वियतनाम के साथ-साथ एक अहम एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन बनाता है। कंपनी की योजना इस प्लांट में कर्मचारियों की संख्या को 5,000 तक पहुंचाने की है, जो इसके लॉन्ग-टर्म कमिटमेंट को दर्शाता है। यह कदम Apple की सप्लाई चेन को जियो-पॉलिटिकल टेंशन और लॉजिस्टिकल दिक्कतों से बचाने की रणनीति का हिस्सा है।
मार्केट पर पकड़ और बदलती कॉम्पिटिशन
Apple ग्लोबल ट्रू वायरलेस स्टीरियो (TWS) मार्केट में अपनी मज़बूत पकड़ बनाए हुए है। 2025 की पहली तिमाही (Q1 2025) में कंपनी की मार्केट हिस्सेदारी करीब 23.3% थी। 2024 में AirPods फ्रेंचाइजी से कंपनी ने करीब $18 अरब का रेवेन्यू कमाया। हालांकि, Xiaomi जैसी कंपनियां तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं और Q1 2025 में Samsung को पीछे छोड़कर दूसरे नंबर पर आ गई हैं। Apple की ताकत उसके वर्टिकल इंटीग्रेशन, खास चिप्स और iOS इकोसिस्टम में है, लेकिन कॉम्पिटिशन तेज़ हो रहा है। बजट सेगमेंट में नए ब्रांड्स आ रहे हैं और प्रीमियम सेगमेंट में AI-ड्रिवन फीचर्स की मांग बढ़ रही है। भारत का अपना TWS मार्केट भी काफी मज़बूत है, जो डोमेस्टिक डिमांड का संकेत देता है।
मंदी का डर (Bear Case)
इन सबके बीच, Apple के वैल्यूएशन पर भी नज़र रखने की ज़रूरत है। कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो करीब 32.36 है, जो सेक्टर के औसत (लगभग 24x) से ज़्यादा है। कंपोनेंट्स और चिप्स की बढ़ती कीमतें प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल सकती हैं। चीन पर निर्भरता भी भू-राजनीतिक जोखिमों को बढ़ाती है। हालांकि Apple प्रीमियम प्राइसिंग मॉडल पर काम करती है, लेकिन बढ़ती महंगाई के दौर में ग्लोबल मार्केट में डिमांड बनाए रखना एक चुनौती है।
भविष्य का आउटलुक
आगे चलकर, Apple को दिसंबर तिमाही में 10-12% की ईयर-ओवर-ईयर रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद है, जिसमें iPhone का बड़ा योगदान होगा। भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट्स से ग्रोथ की उम्मीदें ज़्यादा हैं। कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में भी भारी निवेश कर रही है, जिसे भविष्य का बड़ा ड्राइवर माना जा रहा है। नए iPhone, Apple Watch और AirPods Pro 3 जैसे प्रोडक्ट्स की लॉन्चिंग सेल्स को और बढ़ा सकती है।