Apollo Pipes ने पाइप कारोबार से आगे बढ़ते हुए अब टाइल्स और सिरेमिक मार्केट में उतरने की घोषणा की है। इस बिजनेस प्लान के लिए कंपनी **₹189.1 करोड़** जुटाएगी, वहीं हालिया तिमाही में कंपनी को **₹8.57 करोड़** का घाटा हुआ है।
बिजनेस विविधीकरण की तैयारी
Apollo Pipes Limited अपने पारंपरिक पाइपिंग कारोबार से बाहर निकलकर अब टाइल्स और सिरेमिक सेक्टर में कदम रख रही है। कंपनी इसके लिए ₹300 करोड़ का निवेश करने की योजना बना रही है। इस नए वेंचर के लिए कंपनी एक सब्सिडियरी बनाएगी, जो या तो नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगाएगी या फिर इस सेक्टर की मौजूदा कंपनियों को एक्वायर (Acquire) करेगी। कंपनी का मकसद कंस्ट्रक्शन मटेरियल सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत करना है।
फंड जुटाने का तरीका
इस विस्तार को रफ्तार देने के लिए बोर्ड ने नॉन-प्रमोटर निवेशकों को 31 लाख वारंट जारी करने की मंजूरी दी है। यह वारंट ₹610 प्रति शेयर की दर से जारी किए जाएंगे, जिससे कंपनी के खजाने में ₹189.1 करोड़ की लिक्विडिटी आएगी। साथ ही, कंपनी ने अपनी अधिकृत शेयर कैपिटल को ₹50 करोड़ से बढ़ाकर ₹60 करोड़ कर दिया है। ये वारंट 18 महीने के भीतर इक्विटी शेयरों में बदले जा सकेंगे।
चुनौतीपूर्ण समय और भविष्य की राह
यह फैसला ऐसे वक्त में लिया गया है जब कंपनी को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की पहली तिमाही में Apollo Pipes को ₹8.57 करोड़ का नेट लॉस हुआ है। PVC रेजिन की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने कंपनी के ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बनाया है। टाइल्स मार्केट में प्रवेश को कंपनी एक रणनीतिक कदम मान रही है ताकि पाइपिंग सेक्टर की साइक्लिकल प्रकृति पर निर्भरता कम हो सके। अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी इस नए बिजनेस को कैसे एग्जीक्यूट करती है और क्या वे घाटे से बाहर निकलकर मुनाफा दर्ज कर पाते हैं।
