स्टैंडअलोन परफॉर्मेंस ने दिखाया दम, पर कंसोलिडेटेड में मार्जिन पर दबाव!
Apollo Micro Systems ने 31 दिसंबर 2025 को समाप्त तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के अपने वित्तीय नतीजे पेश किए हैं, जहाँ कंपनी के स्टैंडअलोन (Standalone) परफॉर्मेंस ने निवेशकों को खुश किया है, लेकिन कंसोलिडेटेड (Consolidated) नतीजों में कुछ चिंताएं सामने आई हैं।
नंबरों का खेल: स्टैंडअलोन बनाम कंसोलिडेटेड
स्टैंडअलोन (Standalone) स्तर पर, Apollo Micro Systems ने शानदार प्रदर्शन किया। Q3 FY26 के लिए, ऑपरेशन्स से रेवेन्यू ₹20,078.39 लाख (यानी ₹200.8 करोड़) रहा, जो पिछले साल की समान अवधि से 35.30% ज्यादा है। कंपनी का नेट प्रॉफिट (PAT) 66.24% बढ़कर ₹3,066.03 लाख (₹30.7 करोड़) तक पहुंच गया। वहीं, बेसिक ईपीएस (EPS) में 52.46% की बढ़ोतरी के साथ यह ₹0.93 रहा। सबसे अहम बात यह है कि स्टैंडअलोन PAT मार्जिन 15.27% पर पहुंच गया, जो पिछले साल की 12.43% की तुलना में एक बड़ी उछाल है।
कंसोलिडेटेड (Consolidated) स्तर पर, तस्वीर थोड़ी अलग है। 15 नवंबर 2025 को हुई IDL Explosives Limited की 100% हिस्सेदारी की एक्विजिशन (Acquisition), जिसकी कीमत ₹10,700.00 लाख (₹107 करोड़) थी, के कारण कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में 69.96% की बड़ी छलांग लगी और यह ₹25,222.01 लाख (₹252.2 करोड़) पर पहुंच गया। हालांकि, कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट (PAT) में बढ़ोतरी धीमी रही, केवल 40.91% की वृद्धि के साथ यह ₹2,288.09 लाख (₹22.9 करोड़) रहा। बेसिक ईपीएस (EPS) ₹0.69 पर रहा। सबसे चिंताजनक बात यह है कि कंसोलिडेटेड PAT मार्जिन 1.87 परसेंटेज पॉइंट्स घटकर 9.07% रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 10.94% था।
नौ महीनों (Nine Months) के नतीजों पर नजर डालें तो, स्टैंडअलोन PAT में 93.66% की जोरदार बढ़ोतरी के साथ ₹8,313.15 लाख (₹83.1 करोड़) का मुनाफा हुआ, और बेसिक ईपीएस ₹2.51 रहा। वहीं, कंसोलिडेटेड PAT 66.50% की बढ़ोतरी के साथ ₹7,059.25 लाख (₹70.6 करोड़) पर पहुंचा, और बेसिक ईपीएस ₹2.13 रहा।
'गोइंग कंसर्न' पर सवाल और बढ़ते खर्चे
नतीजों के साथ जारी नोट्स में एक बड़ा रेड फ्लैग (Red Flag) सामने आया है। Apollo Defence Industries Private Limited, Apollo Strategic Technologies Private Limited, और IDL Explosives Limited जैसी प्रमुख सब्सिडियरी कंपनियों की करेंट लायबिलिटीज (Current Liabilities) उनकी करेंट एसेट्स (Current Assets) से ज्यादा हैं। यह स्थिति इन कंपनियों की 'गोइंग कंसर्न' (यानी भविष्य में संचालन जारी रखने की क्षमता) पर गंभीर सवाल खड़े करती है, हालांकि कंपनी का कहना है कि यह समूह के समग्र 'गोइंग कंसर्न' स्टेटस को तुरंत प्रभावित नहीं करता।
कंसोलिडेटेड स्तर पर, मैटेरियल की लागत और कर्मचारी लाभ जैसे खर्चों में भी खासी बढ़ोतरी देखी गई। नए लेबर कोड्स के कारण ₹1.26 करोड़ की नई ग्रेच्युटी लायबिलिटी भी दर्ज की गई है।
भविष्य की राह: अनिश्चितता और चुनौतियां
IDL Explosives के इंटीग्रेशन (Integration) की चुनौतियों और सब्सिडियरी कंपनियों के 'गोइंग कंसर्न' स्टेटस से जुड़ी चिंताओं के कारण कंपनी का भविष्य अनिश्चितताओं से घिरा है। कंपनी ने वारंट कन्वर्जन (Warrant Conversion) के जरिए इक्विटी कैपिटल (Equity Capital) जुटाया है, जिसमें 2,16,52,792 वारंट ₹113 प्रति शेयर के प्रीमियम पर कन्वर्ट हुए।
प्रबंधन की ओर से भविष्य के प्रदर्शन को लेकर कोई स्पष्ट गाइडेंस (Guidance) न मिलने से निवेशकों में और अनिश्चितता बढ़ गई है। इन 'गोइंग कंसर्न' जोखिमों से सफलतापूर्वक निपटना और IDL Explosives का प्रभावी इंटीग्रेशन Apollo Micro Systems के भविष्य के प्रदर्शन के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।