Apar Industries ने जून तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं, जिसमें कंपनी के रेवेन्यू में **29%** का शानदार इजाफा हुआ है। ट्रांसफॉर्मर ऑयल और कंडक्टर सेगमेंट में अच्छी कीमतों का फायदा मिला है। कंपनी की ऑर्डर बुक **₹102 अरब** पर बरकरार है, जो डोमेस्टिक और एक्सपोर्ट दोनों बाजारों में मजबूत मांग का संकेत है। हालांकि, निवेशकों को कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और **₹0.9 अरब** के इन्वेंट्री प्रोविजन पर नजर रखनी होगी।
Detailed Coverage
ट्रांसफॉर्मर ऑयल और कंडक्टर सेगमेंट का जलवा
Apar Industries ने 2026-27 फाइनेंशियल ईयर की जून तिमाही में दमदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी के रेवेन्यू और प्रॉफिट मार्जिन में जबरदस्त ग्रोथ देखने को मिली है। ट्रांसफॉर्मर ऑयल, केबल्स और कंडक्टर बिजनेस में मजबूत मांग के चलते कंपनी के रेवेन्यू में 29% का सालाना इजाफा हुआ है।
ट्रांसफॉर्मर ऑयल सेगमेंट इस तिमाही का मुख्य आकर्षण रहा। वॉल्यूम में 14% की गिरावट के बावजूद, इस सेगमेंट ने पिछले साल की तुलना में 35% ज्यादा रेवेन्यू दर्ज किया, जिसका मुख्य कारण कीमतों में बढ़ोतरी है। इस सेगमेंट से ₹3.3 अरब का EBITDA मिला। हालांकि, मैनेजमेंट ने भविष्य में कीमतों में गिरावट की आशंका को देखते हुए ₹0.9 अरब का प्रोविजन रखा है, जो कि निवेशकों के लिए एक अहम पॉइंट है।
कंडक्टर बिजनेस भी मजबूत रहा, जिसमें रेवेन्यू 20% बढ़ा। एल्युमीनियम की ऊंची कीमतों के कारण कुछ ग्राहकों ने डिलीवरी में देरी की, लेकिन कंपनी ने प्रीमियम और हाई-वैल्यू वाले प्रोडक्ट्स पर फोकस करके इसकी भरपाई की। अब कंडक्टर सेगमेंट की आधी से ज्यादा बिक्री प्रीमियम प्रोडक्ट्स से आ रही है।
केबल्स में ग्रोथ और बढ़ी ऑर्डर बुक
केबल्स डिवीजन में 29% की सालाना ग्रोथ देखी गई, जिसमें डोमेस्टिक मार्केट में 60% की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। इस ग्रोथ का एक बड़ा कारण डेटा सेंटर मार्केट में कंपनी का प्रवेश है। Apar Industries को बड़े ग्लोबल टेक फर्म्स से अपने कॉपर केबल्स एक्सपोर्ट करने की मंजूरी मिल गई है, जो भविष्य के लिए एक बड़ा बूस्टर साबित हो सकता है। इस सेगमेंट का प्रॉफिट मार्जिन 10.6% रहा।
कुल मिलाकर, कंपनी की कंसोलिडेटेड ऑर्डर बुक ₹102 अरब तक पहुंच गई है, जो पिछले साल के मुकाबले 31% ज्यादा है। एक्सपोर्ट ऑर्डर्स में 57% का हिस्सा है। हाल ही में ₹28 अरब के दो बड़े ओवरसीज यूटिलिटी प्रोजेक्ट्स से ऑर्डर मिले हैं, जिन्हें अगले 18 से 48 महीनों में पूरा किया जाएगा।
निवेशकों को इन बड़े प्रोजेक्ट्स के एग्जीक्यूशन पर नजर रखनी चाहिए, खासकर वैश्विक कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए। बढ़ती ऑर्डर बुक और कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता के बीच मार्जिन को बनाए रखना कंपनी के लिए अहम होगा।
