Anjani Portland Cement Limited के हालिया नतीजों ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया है। कंपनी की स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड दोनों तरह की परफॉरमेंस में भारी गिरावट आई है, जो लाभ से सीधे भारी नुकसान की ओर इशारा कर रही है।
स्टैंडअलोन नतीजे (Q3 FY2026)
- ऑपरेशन्स से रेवेन्यू ₹268.02 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी तिमाही के ₹267.46 करोड़ से बस 0.2% ज्यादा है।
- कुल आय में 0.4% की मामूली बढ़ोतरी हुई और यह ₹271.50 करोड़ पर पहुंची।
- मगर, कुल खर्चे 2.6% बढ़कर ₹262.50 करोड़ हो गए।
- इस बढ़त का सीधा असर प्रॉफिट पर पड़ा। टैक्स से पहले का प्रॉफिट (PBT) ₹24.00 करोड़ के मुनाफे से बदलकर ₹53.59 करोड़ के नुकसान में तब्दील हो गया।
- नतीजतन, कंपनी को तिमाही में ₹38.00 करोड़ का नेट लॉस हुआ, जबकि पिछले साल इसी अवधि में ₹34.00 करोड़ का नेट प्रॉफिट था।
- Earning Per Share (EPS) भी गिरकर (₹1.83) हो गया, जो पिछले साल ₹1.80 था।
9 महीनों के स्टैंडअलोन आंकड़े (Nine Months Ended Dec 31, 2025)
- ऑपरेशन्स से रेवेन्यू में बड़ी गिरावट आई, जो 33.7% घटकर ₹2474.60 करोड़ रह गया, जबकि पिछले साल यह ₹3734.00 करोड़ था।
- कुल आय भी 33.3% गिरकर ₹2505.25 करोड़ पर आ गई।
- कंपनी ने ₹1044.50 करोड़ का भारी PBT लॉस दर्ज किया, जो पिछले साल इसी अवधि के ₹554.00 करोड़ के प्रॉफिट से बिलकुल उलट है।
- 9 महीनों में नेट लॉस बढ़कर ₹1044.50 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल ₹3202.00 करोड़ का नेट प्रॉफिट था।
- इस अवधि के नतीजों में एक बड़ा एक्सेप्शनल आइटम भी शामिल है: एक सब्सिडियरी में निवेश बेचने से ₹75.50 करोड़ का नुकसान।
- 9 महीनों के लिए EPS (₹118.50) रहा, जो पिछले साल ₹34.02 था।
कंसोलिडेटेड नतीजे (Q3 FY2026)
- कंसोलिडेटेड ऑपरेशन्स से रेवेन्यू 23.3% घटकर ₹807.70 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹1053.10 करोड़ था।
- कुल आय 23.1% गिरकर ₹815.61 करोड़ पर आ गई।
- हालांकि, कुल खर्चे 4.9% बढ़कर ₹1009.88 करोड़ हो गए।
- कंसोलिडेटेड PBT का लॉस ₹30.59 करोड़ से बढ़कर ₹194.27 करोड़ के नुकसान में चला गया।
- तिमाही में कंसोलिडेटेड नेट लॉस ₹194.27 करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹206.80 करोड़ के लॉस से थोड़ा कम है, लेकिन फिर भी बड़ा है।
- कंसोलिडेटेड EPS (₹7.51) रहा, जो पिछले साल (₹8.75) था।
9 महीनों के कंसोलिडेटेड आंकड़े (Nine Months Ended Dec 31, 2025)
- कंसोलिडेटेड ऑपरेशन्स से रेवेन्यू 23.2% गिरकर ₹2727.50 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल यह ₹3537.00 करोड़ था।
- कुल आय 23.2% घटकर ₹2735.38 करोड़ पर आ गई।
- कुल खर्चों में 18.7% की गिरावट आई और यह ₹2952.00 करोड़ पर आ गया।
- कंसोलिडेटेड PBT लॉस ₹216.62 करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹76.20 करोड़ के लॉस से कहीं ज्यादा है।
- 9 महीनों में कंसोलिडेटेड नेट लॉस बढ़कर ₹217.69 करोड़ हो गया, जो पिछले साल के ₹80.83 करोड़ के लॉस से काफी ज्यादा है।
- कंसोलिडेटेड EPS (₹8.45) रहा, जो पिछले साल (₹31.39) था।
मार्जिन्स पर भारी दबाव
सबसे चिंताजनक बात मार्जिन में भारी कमी है, खासकर स्टैंडअलोन लेवल पर। खर्चे रेवेन्यू से ज्यादा तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे कंपनी भारी नुकसान में जा रही है। स्टैंडअलोन आधार पर, Q3 के लिए PBT मार्जिन लगभग 9% से गिरकर -20% हो गया, और 9 महीनों के लिए 14.8% से गिरकर -42.2% पर आ गया। कंसोलिडेटेड मार्जिन पर भी गंभीर दबाव है, Q3 के लिए PBT मार्जिन मामूली निगेटिव से -24% से अधिक हो गया, और 9 महीनों के लिए -2.15% से -7.94% हो गया। 9 महीनों में स्टैंडअलोन नेट लॉस, जिसमें एक्सेप्शनल आइटम भी शामिल है, कंपनी की ऑपरेशनल चुनौतियों को साफ दिखाता है।
कंपनी की परफॉरमेंस पर सवाल
वित्तीय नतीजों से कंपनी के प्रदर्शन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्टैंडअलोन आधार पर 9 महीने की अवधि में रेवेन्यू में आई तेज गिरावट, साथ ही भारी नुकसान की ओर झुकाव, ऑपरेशनल एफिशिएंसी, डिमांड और कॉस्ट मैनेजमेंट पर बड़ी चिंताएं पैदा करता है। ऑडिटर द्वारा पोर्टल अनुपलब्धता के कारण UDIN की अनुपस्थिति का उल्लेख एक मामूली ऑपरेशनल डिटेल है, लेकिन मुख्य चिंता वित्तीय प्रदर्शन ही है।
आगे का रास्ता और चुनौतियाँ
Anjani Portland Cement के सामने सबसे बड़ा जोखिम रेवेन्यू में गिरावट को रोकने और बढ़ते नुकसान को कम करने में विफलता है। खर्चों में बढ़ोतरी, भले ही रेवेन्यू घट रहा हो, यह संकेत देता है कि या तो ऑपरेशनल इनएफिशिएंसी है या इनपुट कॉस्ट बढ़ रही है जिसे कंपनी ग्राहकों पर प्रभावी ढंग से नहीं डाल पा रही है। कंपनी ने यह भी बताया है कि वह 21 नवंबर, 2025 से प्रभावी चार लेबर कोड (Four Labour Codes) के निहितार्थों का मूल्यांकन कर रही है, जो आगे चलकर अनुपालन लागत या ऑपरेशनल बदलाव ला सकते हैं। लाभप्रदता और रेवेन्यू में तेज गिरावट को देखते हुए, कंपनी का भविष्य काफी अनिश्चित बना हुआ है। निवेशक मैनेजमेंट की किसी भी कमेंट्री या कॉस्ट कटिंग, ऑपरेशनल टर्नअराउंड या रेवेन्यू बढ़ाने की रणनीतियों पर बारीकी से नज़र रखेंगे। वर्तमान प्रदर्शन यह दर्शाता है कि आगे अभी काफी मुश्किलें बाकी हैं।