आंध्र प्रदेश सरकार काकीनाडा में **$4 बिलियन** के HD Hyundai शिपयार्ड प्रोजेक्ट को आकर्षित करने की कोशिश में है। यह कदम तमिलनाडु के साथ पहले से हुए समझौते के बीच स्थिति को अनिश्चित बना रहा है।
दो राज्यों के बीच रस्साकशी
आंध्र प्रदेश सरकार अब सक्रिय रूप से HD Hyundai Heavy Industries को काकीनाडा पोर्ट पर एक बड़ा शिपबिल्डिंग क्लस्टर बनाने के लिए लुभा रही है। यह सीधा मुकाबला तमिलनाडु के साथ है, जहां कंपनी ने पहले ही $4 बिलियन का निवेश करने का मन बनाया था।
तमिलनाडु समझौते की वर्तमान स्थिति
HD Hyundai ने दिसंबर 2025 में तमिलनाडु सरकार के साथ थूथुकुडी में सुविधा केंद्र स्थापित करने के लिए एमओयू (MoU) साइन किया था। अप्रैल 2026 में मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड के साथ त्रिपक्षीय समझौता भी हुआ, जिसके बाद तकनीकी टीमें साइट पर तैनात कर दी गईं। हालांकि, आंध्र प्रदेश का दावा है कि काकीनाडा का इंफ्रास्ट्रक्चर इस प्रोजेक्ट के लिए बेहतर विकल्प है, जिससे अब पुराने फैसलों पर फिर से विचार की नौबत आ गई है।
कंपनी की बदली रणनीति और सरकारी प्रोत्साहन
भारत सरकार के 'शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम' के तहत ₹69,725 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है, जो विदेशी निवेश के लिए बड़ा आकर्षण है। इसी बीच, HD Hyundai ने अपनी रणनीति बदलते हुए कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (Cochin Shipyard Limited) के साथ अपनी जॉइंट वेंचर को बंद कर दिया है। अब कंपनी अकेले ही इस बड़े स्तर के शिपयार्ड को पूरा करने का जोखिम उठाएगी, जिससे उनके ऊपर कैपिटल स्पेंडिंग का बोझ बढ़ गया है।
निवेशकों के लिए जोखिम
राज्यों के बीच की यह खींचतान प्रोजेक्ट की टाइमलाइन के लिए अनिश्चितता ला रही है। लैंड एक्विजिशन और लॉजिस्टिक्स जैसे पेचीदा मामलों के बीच, क्या यह प्रोजेक्ट तमिलनाडु में ही रहेगा या आंध्र प्रदेश बाजी मार ले जाएगा? मार्केट एक्सपर्ट्स अब कंपनी की ओर से किसी आधिकारिक घोषणा का इंतजार कर रहे हैं।
