Andhra Pradesh Industrial Projects: ₹2.08 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी, डेटा सेंटर पर बड़ा दांव

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Andhra Pradesh Industrial Projects: ₹2.08 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी, डेटा सेंटर पर बड़ा दांव

आंध्र प्रदेश सरकार ने राज्य में 25 बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दे दी है, जिनकी कुल लागत **₹2.08 लाख करोड़** है। इनमें से **84%** निवेश अकेले डेटा सेंटर में होने वाला है। इन प्रोजेक्ट्स से **21,000** से ज़्यादा नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।

डेटा सेंटर में रिकॉर्ड निवेश

आंध्र प्रदेश स्टेट इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (SIPB) ने हाल ही में 25 नए औद्योगिक प्रस्तावों को मंजूरी दी है। कुल ₹2.08 लाख करोड़ के इस निवेश से राज्य के औद्योगिक क्षेत्र में ज़बरदस्त तेज़ी आने की उम्मीद है। इनमें सबसे खास है डेटा सेंटर का क्षेत्र, जिसमें ₹1.75 लाख करोड़ का भारी-भरकम निवेश होगा।

  • ReNew AP Green Data Center: ₹85,200 करोड़ का निवेश (Anakapalli)
  • Data Center Holdings India: ₹58,743 करोड़ का निवेश (Visakhapatnam)
  • AM Intelligence Labs: ₹31,387 करोड़ का निवेश (Visakhapatnam)

इन बड़े प्रोजेक्ट्स से आंध्र प्रदेश एक प्रमुख डिजिटल हब बनने की राह पर है, लेकिन इसके लिए भारी मात्रा में ऊर्जा और पानी की ज़रूरत होगी।

अन्य क्षेत्रों में भी निवेश

डेटा सेंटर के अलावा, सरकार ने रिन्यूएबल एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग में भी कई प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी है:

  • Waaree Clean Energy Solutions: ₹15,000 करोड़ (Kakinada)
  • Agastya Green Energy: ₹7,799.96 करोड़ (Kurnool)
  • Coromandel International: ₹2,125 करोड़ (Srikakulam)
  • Munoth Lithium Battery: बैटरी मैन्युफैक्चरिंग (Tirupati)
  • AIL Dixon India: मैन्युफैक्चरिंग यूनिट (Kadapa)

इन प्रोजेक्ट्स से करीब 21,627 लोगों को सीधी नौकरियां मिलने का अनुमान है।

सरकारी प्रोत्साहन और जोखिम

सरकार इन प्रोजेक्ट्स के लिए एक नई 'एस्क्रो-आधारित' प्रोत्साहन प्रणाली शुरू कर रही है, जो दिसंबर 2026 से लागू होगी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सब्सिडी और प्रोत्साहन केवल तभी दिए जाएं जब प्रोजेक्ट्स तय लक्ष्यों को पूरा करें।

हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर प्रोजेक्ट्स के क्रियान्वयन में कुछ चुनौतियां भी हैं। डेटा सेंटर जैसे प्रोजेक्ट्स के लिए बहुत ज़्यादा ऊर्जा और पानी की खपत होगी, जिससे स्थानीय संसाधनों पर दबाव पड़ सकता है। विशाखापत्तनम जैसे इलाकों में भूजल की कमी और बिजली ग्रिड पर भार बढ़ने की चिंताएं जताई जा रही हैं। निवेशकों को इन प्रोजेक्ट्स के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन, स्थानीय संसाधनों पर प्रभाव और सरकारी नीतियों की प्रगति पर नज़र रखनी होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.