Ambuja Cements ने साल **2030** तक अपनी सीमेंट उत्पादन क्षमता को **155 MTPA** तक ले जाने के लिए **₹14,500 करोड़** के बड़े निवेश का ऐलान किया है। कंपनी यह कदम ऐसे समय पर उठा रही है जब ऊंचे एनर्जी और लॉजिस्टिक्स खर्चों के कारण उसका तिमाही मुनाफा **90%** तक गिर गया है।
बड़े विस्तार की तैयारी
Ambuja Cements ने सीमेंट प्रोडक्शन को बड़े पैमाने पर बढ़ाने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इसके तहत 14 अलग-अलग प्रोजेक्ट्स पर काम किया जाएगा, जिसमें गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और पूर्वी राज्यों जैसे असम, बिहार और झारखंड में नए प्लांट और मौजूदा सुविधाओं का विस्तार शामिल है। कंपनी का लक्ष्य 2030 फाइनेंशियल ईयर तक अपनी कुल क्षमता को 155 MTPA तक पहुंचाना है।
मुनाफे पर दबाव और सुधार की उम्मीद
यह आक्रामक विस्तार ऐसे दौर में आया है जब कंपनी के नतीजे थोड़े नरम रहे हैं। फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही में, कंपनी का नेट प्रॉफिट 90% गिरकर ₹236 करोड़ रह गया है, जबकि रेवेन्यू ₹9,197 करोड़ दर्ज किया गया। इसकी मुख्य वजह बढ़ती फ्यूल और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट है। मैनेजमेंट का मानना है कि पैमाने (Scale) बढ़ने से लॉजिस्टिक्स एफिशिएंसी सुधरेगी और 2028 तक लागत को घटाकर ₹4,000 प्रति टन पर लाया जा सकेगा।
डेट-फ्री बैलेंस शीट का सहारा
मुनाफे में गिरावट के बावजूद Ambuja Cements के लिए राहत की बात यह है कि कंपनी 'डेट-फ्री' (Debt-free) है। इस मजबूत वित्तीय स्थिति के कारण कंपनी बिना ब्याज के बोझ के इतना बड़ा निवेश करने में सक्षम है। कंपनी अब प्रीमियम प्रोडक्ट्स और ट्रेड सेल्स पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे मार्जिन में सुधार की उम्मीद है।
चुनौतियां और जोखिम
सीमेंट सेक्टर अभी पेटकोक और डीजल जैसी बढ़ती इनपुट लागतों से जूझ रहा है। निवेशकों के लिए असली चुनौती यह देखना होगा कि कंपनी 14 जटिल प्रोजेक्ट्स को समय पर और बजट के भीतर कैसे पूरा करती है। हालांकि कंपनी कर्ज-मुक्त है, लेकिन बड़े विस्तार में लागत बढ़ने (Cost Overruns) या बाजार में मांग सुस्त होने का जोखिम बना रहता है।
