Ambit Capital ने Schneider Electric Infrastructure (SEIL) पर अपनी कवरेज शुरू कर दी है और शेयर के लिए **₹1,400** का टारगेट प्राइस सेट किया है। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि भारत में डेटा सेंटर के बढ़ते निवेश और ग्लोबल एक्सपोर्ट्स में कंपनी की बढ़ती भूमिका SEIL के लिए जबरदस्त ग्रोथ के मौके लाएगी।
SEIL के लिए दो बड़े ग्रोथ इंजन
Ambit Capital की रिपोर्ट के अनुसार, Schneider Electric Infrastructure दो प्रमुख वजहों से भविष्य में शानदार प्रदर्शन कर सकती है। पहला, भारत में तेजी से विकसित हो रहे डेटा सेंटर। दूसरा, पैरेंट कंपनी Schneider Electric के ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क में भारत की अहमियत बढ़ना। ब्रोकरेज का अनुमान है कि आने वाले सालों में कंपनी के रेवेन्यू और मुनाफे में बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
डेटा सेंटर: रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा
भारत में डेटा सेंटर की क्षमता तेजी से बढ़ रही है, जिसका सीधा फायदा SEIL को मिल रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2020 में जहां डेटा सेंटर SEIL के रेवेन्यू का सिर्फ 3-4% हिस्सा थे, वहीं अब यह बढ़कर 10-12% हो गया है। Ambit Capital का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2029 तक यह हिस्सा 18-20% तक पहुँच सकता है। टेक दिग्गज और भारतीय कंपनियां डेटा सेंटर में भारी निवेश कर रही हैं, जिससे आने वाले समय में क्षमता 7 GW से 18 GW तक पहुँच सकती है। ब्रोकरेज का मानना है कि FY26 से FY29 के बीच डेटा सेंटर सेगमेंट 50% की CAGR (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) से बढ़ेगा।
ग्लोबल एक्सपोर्ट्स में भारत की बढ़ती भूमिका
दूसरा बड़ा फैक्टर है ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत का बढ़ता योगदान। Schneider Electric ने भारत को अपने चार प्रमुख ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब में से एक बनाया है, जिसमें अमेरिका, चीन और फ्रांस भी शामिल हैं। अभी SEIL के रेवेन्यू का करीब 12% एक्सपोर्ट से आता है, जिसके FY29 तक 14-15% तक पहुँचने की उम्मीद है। कंपनी ग्लोबल मार्केट के लिए भारतीय मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को बढ़ाने की योजना बना रही है।
कंपनी का इन्वेस्टमेंट प्लान
इस ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए, SEIL ₹200 करोड़ से अधिक का कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) कर रही है। कंपनी अपने वडोदरा और कोलकाता प्लांट में बड़ा अपग्रेड कर रही है। वडोदरा में स्विचगियर और ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाई जा रही है, जबकि कोलकाता में ब्रेकर मैन्युफैक्चरिंग और रिंग मेन यूनिट (RMU) की क्षमता में विस्तार किया जा रहा है। ये निवेश घरेलू और ग्लोबल दोनों बाजारों की डिमांड को पूरा करेंगे।
निवेशकों के लिए अहम बातें
हालांकि, निवेशकों को कुछ बातों पर ध्यान देना चाहिए। रॉ मटेरियल यानी कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव कंपनी के मुनाफे पर असर डाल सकता है। कंपनी आमतौर पर लागत वृद्धि को ग्राहकों पर डालने में सक्षम रही है, लेकिन इसमें कुछ समय लग सकता है। इसके अलावा, कैपेक्स प्रोजेक्ट्स में किसी भी तरह की देरी से अनुमानित रेवेन्यू और प्रॉफिट टारगेट प्रभावित हो सकते हैं।
