Almondz Global Securities Limited ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में अपने कंसोलिडेटेड नतीजों से निवेशकों को खुश कर दिया है। कंपनी ने ₹52.29 करोड़ का कुल रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 55.9% ज्यादा है। वहीं, नेट प्रॉफिट (PAT) में तो 405.9% का बंपर उछाल देखा गया, जो ₹12.90 करोड़ तक पहुंच गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह आंकड़ा ₹2.55 करोड़ था। अगर पिछली तिमाही (QoQ) की बात करें, तो रेवेन्यू में करीब 53.8% का इजाफा हुआ और प्रॉफिट 234.2% बढ़कर ₹12.90 करोड़ हो गया।
इस शानदार परफॉर्मेंस का मुख्य श्रेय कंपनी के ग्रीन फ्यूल बिजनेस को जाता है, जो जॉइंट वेंचर Premier Green Innovations Private Limited (PGIPL) के जरिए संचालित होता है। PGIPL ने 3Q FY26 में ₹206.12 करोड़ का रेवेन्यू जेनरेट किया, जो पिछले साल के मुकाबले 13.4% अधिक है। सबसे खास बात यह है कि इस सेगमेंट का प्रॉफिट 1082.2% की हैरान कर देने वाली तेजी के साथ ₹13.95 करोड़ पर पहुंच गया। ऐसा कच्चे माल की कीमतों में आई नरमी और बेहतर DDGS रिकवरी के कारण संभव हुआ।
इंफ्रास्ट्रक्चर एडवाइजरी बिजनेस ने भी अच्छी ग्रोथ दिखाई है। इस सेगमेंट का रेवेन्यू पिछली तिमाही (QoQ) के मुकाबले 25.3% बढ़कर ₹31.51 करोड़ हो गया, और प्रॉफिट 18.2% बढ़कर ₹2.66 करोड़ रहा। कंपनी को इस सेगमेंट में 31 दिसंबर 2025 तक नौ महीनों में ₹187 करोड़ के ऑर्डर मिले हैं और आगे भी इसमें करीब 20% की ग्रोथ का अनुमान है।
हालांकि, फाइनेंशियल सर्विसेज सेगमेंट (वेल्थ एडवाइजरी, ब्रोकिंग, डेट और इक्विटी ऑपरेशन्स) की तस्वीर थोड़ी मिली-जुली रही। इस सेगमेंट ने ₹1.61 करोड़ के रेवेन्यू पर ₹2.69 करोड़ का घाटा दर्ज किया। इसका मुख्य कारण इक्विटी होल्डिंग्स पर ₹82.71 करोड़ का भारी मार्क-टू-मार्केट (MTM) लॉस रहा। पिछले साल की इसी तिमाही में इस सेगमेंट ने ₹6.41 करोड़ के रेवेन्यू पर ₹0.96 करोड़ का मुनाफा कमाया था।
कंपनी का मैनेजमेंट Q4 FY26 को लेकर काफी आशावादी है। उन्हें उम्मीद है कि मार्केट सेंटीमेंट में सुधार और MTM लॉस में संभावित रिवर्सल से फाइनेंशियल सर्विसेज सेगमेंट के प्रदर्शन में सुधार होगा। ग्रीन फ्यूल बिजनेस के लिए, PGIPL का अनुमान है कि Q4 FY26 में करीब 211 लाख लीटर प्रोडक्शन और ₹158 करोड़ का रेवेन्यू होगा।
इसके अलावा, कंपनी का ओडिशा प्लांट भी कमर्शियल ऑपरेशंस के लिए तैयार है और मार्च 2026 के अंत तक प्रोडक्शन शुरू होने की उम्मीद है, बशर्ते ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के साथ अंतिम समझौते हो जाएं। इंफ्रास्ट्रक्चर एडवाइजरी बिजनेस से 20% ग्रोथ का अनुमान जारी है। एक संशोधित कम्पोजिट स्कीम ऑफ अरेंजमेंट (Composite Scheme of Arrangement) जो सितंबर 2025 में फाइल की गई थी, वह फिलहाल स्टॉक एक्सचेंजों के लीगल डिपार्टमेंट की समीक्षा में है।
निवेशकों को फाइनेंशियल सर्विसेज सेगमेंट की अस्थिरता, खासकर इक्विटी होल्डिंग्स पर MTM लॉस के प्रभाव पर ध्यान देना होगा। मार्केट सेंटीमेंट में रिकवरी इस सेगमेंट के लिए महत्वपूर्ण है। PGIPL के ओडिशा प्लांट का मार्च 2026 तक शुरू होना एक बड़ा ग्रोथ फैक्टर साबित हो सकता है, जो OMCs के साथ समझौतों पर निर्भर करेगा। कम्पोजिट स्कीम ऑफ अरेंजमेंट में देरी से लंबी अवधि के रणनीतिक उद्देश्यों पर असर पड़ सकता है।