Aksh Optifibre के लिए मुश्किलों का दौर जारी, घाटा बढ़ा, ऑडिटर ने उठाया सवाल
Aksh Optifibre Limited ने 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुई तीसरी तिमाही (Q3 FY26) और नौ महीनों के वित्तीय नतीजे जारी किए हैं, जो कंपनी की कमजोर आर्थिक स्थिति को दर्शाते हैं। कंपनी लगातार गिरते रेवेन्यू और बढ़ते घाटे से जूझ रही है।
नतीजे, जो चिंता बढ़ा रहे हैं:
- स्टैंडअलोन परफॉर्मेंस (Q3 FY26): कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल की समान तिमाही के ₹2,847.09 लाख से गिरकर ₹2,623.47 लाख पर आ गया, जो 7.8% की गिरावट है। नेट लॉस (Net Loss) भी काफी बढ़कर ₹380.66 लाख हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹292.52 लाख था। प्रति शेयर आय (EPS) ₹(0.23) रही।
- कंसॉलिडेटेड परफॉर्मेंस (Q3 FY26): समेकित तौर पर, रेवेन्यू 8.9% गिरकर ₹2,640.41 लाख पर पहुंच गया (पिछले साल ₹2,898.69 लाख था)। नेट लॉस बढ़कर ₹580.54 लाख हो गया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹473.57 लाख था। डाइल्यूटेड ईपीएस (Diluted EPS) ₹(0.36) दर्ज किया गया।
- नौ महीने (9M FY26): स्टैंडअलोन रेवेन्यू 12.0% घटकर ₹8,393.42 लाख रहा। हालांकि, स्टैंडअलोन नेट लॉस पिछले साल के ₹2,650.77 लाख से घटकर ₹882.09 लाख हो गया। कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू 12.9% गिरकर ₹8,453.95 लाख रहा और नेट लॉस ₹1,531.56 लाख (पिछले साल ₹1,931.54 लाख से कमी) दर्ज किया गया।
ऑडिटर की 'क्वालिफाइड' रिपोर्ट और बैंकों के वार:
नतीजों से भी ज्यादा चिंताजनक बात कंपनी के ऑडिटर, पी.सी. बिंदल एंड कंपनी (P.C. Bindal & Co.) का 'क्वालिफाइड कंक्लूजन' है। ऑडिटर ने कहा है कि कंपनी ने ₹2,082.09 लाख का ब्याज और ₹840.19 लाख का ड्यूटी (Advance Authorization और EPCG स्कीम्स से संबंधित) अपने खातों में दर्ज नहीं किया है।
मैनेजमेंट का मानना है कि यह मामला सरकारी एमनेस्टी स्कीम के तहत सुलझ जाएगा, लेकिन ऑडिटर की यह टिप्पणी एक बड़ा रेड फ्लैग है। अगर इन देनदारियों को दर्ज किया जाता, तो नौ महीनों के लिए कुल देनदारियां ₹2,922.28 लाख बढ़ जातीं और नेट लॉस में ₹66.93 लाख (नेट टैक्स इम्पैक्ट के बाद) की और बढ़ोतरी हो जाती।
मामले को और गंभीर बनाते हुए, Aksh Optifibre को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI) और HDFC बैंक से SARFAESI एक्ट के तहत नोटिस मिले हैं। UBI का मामला फिलहाल डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल (DRT) में है, जहां अंतरिम स्टे मिला हुआ है। कंपनी ने HDFC बैंक के नोटिस का जवाब दिया है। बैंकों की यह कार्रवाई कंपनी पर गंभीर लिक्विडिटी दबाव और संपत्ति वसूली की कार्यवाही की ओर इशारा करती है।
जोखिम और आगे का रास्ता:
कंपनी के नतीजे एक चुनौतीपूर्ण कारोबारी माहौल का संकेत देते हैं। लगातार गिरता रेवेन्यू और बढ़ता घाटा चिंता का विषय है। ऑडिटर की रिपोर्ट भविष्य की वित्तीय देनदारियों को लेकर अनिश्चितता पैदा करती है। इसके अलावा, बैंकों से मिले SARFAESI एक्ट के नोटिस तत्काल और गंभीर वित्तीय संकट की ओर इशारा करते हैं, जो कंपनी के संचालन पर असर डाल सकते हैं।
कंपनी के मैनेजमेंट ने भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट आउटलुक नहीं दिया है। निवेशकों को ऑडिटर की चिंताओं के समाधान, बैंकों के साथ चल रही कानूनी प्रक्रियाओं और किसी भी नए डेवलपमेंट पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।