आगरा फुटवियर सेक्टर पर मंडराया गहरा संकट
आगरा का महत्वपूर्ण फुटवियर एक्सपोर्ट (Footwear Export) सेक्टर इस वक्त भारी मुश्किलों का सामना कर रहा है। इंडस्ट्री वैश्विक स्तर पर चल रहे संघर्षों और व्यापार नीतियों से जुड़ी चुनौतियों से जूझ रही है, जो इसके कामकाज को बुरी तरह प्रभावित कर रही हैं।
पश्चिम एशिया युद्ध और अमेरिकी टैरिफ का असर
पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता ने सप्लाई चेन (Supply Chain) को बिगाड़ दिया है और व्यापक अनिश्चितता पैदा कर दी है। इसका सीधा असर सीधे तौर पर एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड आगरा फुटवियर इंडस्ट्री पर पड़ रहा है। इस अस्थिरता में, पहले से लागू अमेरिकी टैरिफ (Tariff) ने, जो कि अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों पर बहुत अधिक निर्भर एक्सपोर्टर्स के प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) को पहले ही कम कर चुका था, स्थिति को और भी विकट बना दिया है। इन सब का मिला-जुला असर यह हुआ है कि मार्केट तक पहुंच में भारी कमी आई है।
बढ़ती लागतों से एक्सपोर्ट वैल्यू पर खतरा
कच्चे माल (Raw Materials) और मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing) की लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे आगरा के जूता निर्माताओं का मुनाफा (Profit) और कम हो गया है। एक्सपोर्ट के रास्ते सिकुड़ जाने और परिचालन खर्च (Operational Expenses) बढ़ जाने के कारण, इंडस्ट्री के सालाना एक्सपोर्ट रेवेन्यू (Export Revenue) पर अस्तित्व का खतरा मंडरा रहा है। यह रेवेन्यू पहले ₹3,000 करोड़ से ₹4,000 करोड़ के बीच था। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह सेक्टर मुश्किल से खुद को संभाले हुए है।
