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Agilent Technologies: ग्लोबल सप्लाई चेन की टेंशन ख़त्म! भारत में कंपनी ने कैसे भरी रफ़्तार?

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AuthorAditya Rao|Published at:
Agilent Technologies: ग्लोबल सप्लाई चेन की टेंशन ख़त्म! भारत में कंपनी ने कैसे भरी रफ़्तार?
Overview

Agilent Technologies (एजिलेंट टेक्नोलॉजीज) ग्लोबल सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों का डटकर सामना कर रही है। कंपनी की "इन-कंट्री, फॉर कंट्री" (in-country, for country) मैन्युफैक्चरिंग स्ट्रैटेजी के चलते भू-राजनीतिक तनाव और ट्रेड टैरिफ का ज्यादा असर नहीं हुआ है। साइंटिफिक टूल्स बनाने वाली यह कंपनी भारत में नए सेंटर्स खोलकर तेजी से विस्तार कर रही है, खासकर बायोटेक और कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट जैसे सेक्टर्स पर ध्यान केंद्रित किया है।

सप्लाई चेन की मुश्किलों से कैसे निपटा Agilent?

Agilent Technologies (NYSE:A) ने अपनी सप्लाई चेन को मजबूत बनाने के लिए 'इग्नाइट' (Ignite) ट्रांसफॉर्मेशन इनिशिएटिव पर काम किया है। इसके तहत "इन-कंट्री, फॉर कंट्री" (in-country, for country) मैन्युफैक्चरिंग मॉडल और सप्लाई के कई सोर्स को मैनेज करने की स्ट्रैटेजी अपनाई गई है। कंपनी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और चीफ कमर्शियल ऑफिसर, जोना कर्क्वुड (Jonah Kirkwood) के अनुसार, इस स्ट्रैटेजी की वजह से कंपनी को ग्लोबल सप्लाई चेन के इश्यूज, जैसे भू-राजनीतिक तनाव और युद्धों के कारण होने वाली रुकावटों का कोई खास असर नहीं पड़ा है। यह तरीका कई दूसरे कॉम्पिटिटर्स से अलग है जो इंटरनेशनल ट्रेड की मुश्किलों से जूझ रहे हैं।

भारत बना ग्रोथ का बड़ा हब

Agilent भारत में काफी निवेश कर रही है। हाल ही में कंपनी ने मुंबई में एक कस्टमर एक्सपीरियंस सेंटर और हरियाणा के मानेसर में एक रीफर्बिशमेंट सेंटर खोला है। इन सेंटर्स का मुख्य लक्ष्य फार्मा, बायोटेक, डायग्नोस्टिक्स और एनवायरनमेंटल टेस्टिंग जैसे अहम सेक्टर्स के लिए लोकल सपोर्ट को बेहतर बनाना है। मानेसर का रीफर्बिशमेंट सेंटर 1 साल की वारंटी के साथ सर्टिफाइड प्री-ओन्ड (certified pre-owned) इंस्ट्रूमेंट्स ऑफर करता है, जो स्टार्टअप्स और छोटी लैब्स के लिए किफायती और टिकाऊ विकल्प साबित हो रहे हैं। कंपनी फ्लेक्सिबल फाइनेंसिंग ऑप्शंस, जैसे सब्सक्रिप्शन और रेंटल प्लान्स भी उपलब्ध करा रही है। Agilent के मुताबिक, इंडियन फर्म्स कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग (CDMO) सेगमेंट में तेजी से आगे बढ़ रही हैं और GLP-1 ड्रग्स डेवलप कर रही हैं। एशिया-पैसिफिक (Asia-Pacific) Agilent का सबसे तेजी से ग्रो करने वाला रीजन है, जो 2025 में कंपनी के $6.95 बिलियन के रेवेन्यू में 15-18% का योगदान दे सकता है। इस ग्रोथ में भारत को "क्राउन ज्वेल" (crown jewel) बताया गया है।

ट्रेड टैरिफ का असर और मैनेजमेंट

Agilent के पास ट्रेड वॉर्स के दौरान भी एडजस्ट करने का अच्छा अनुभव है, जैसे 2018-2019 के यूएस-चाइना ट्रेड वॉर के समय। 2019 में कंपनी ने नए टैरिफ के कारण मैन्युफैक्चरिंग लोकेशन्स बदली थीं, जिससे अपने प्रॉफिट मार्जिन को बचाया था। हालांकि, अप्रैल 2025 में लागू हुए नए टैरिफ, जिसमें चाइना से आने वाले सामानों पर 10% का बेसिक रेट और ज़्यादा सरचार्ज शामिल है, से कॉस्ट प्रेशर बढ़ा है। लेकिन, चाइना में Agilent की लोकल मैन्युफैक्चरिंग और ग्लोबल सप्लाई डाइवर्सिफिकेशन इसके प्रभाव को कम करने में मदद कर रहे हैं। फिर भी, अगर टैरिफ जारी रहे या बढ़े तो ऊंची लागत और कॉम्पिटिटिव प्रेशर चिंता का कारण बन सकते हैं।

मार्केट पोजीशन और फाइनेंशियल हेल्थ

Agilent एनालिटिकल इंस्ट्रूमेंटेशन मार्केट में एक मजबूत प्लेयर है, जिसका अनुमानित साइज 2026 तक $59.04 बिलियन है। गैस क्रोमैटोग्राफी (GC) में कंपनी की मार्केट शेयर 40% से ज़्यादा है और ICP-MS में यह टॉप-2 प्लेयर्स में शुमार है। थर्मो फिशर साइंटिफिक (Thermo Fisher Scientific), डनाहेर (Danaher) और वाटर्स (Waters) जैसी कंपनियां इस कॉम्पिटिटिव मार्केट की प्रमुख खिलाड़ी हैं। 2025 के लिए Agilent ने $6.95 बिलियन का रेवेन्यू और लगभग $32.22 बिलियन का मार्केट कैप रिपोर्ट किया है। इसका प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो लगभग 25.13 है, जो इंडस्ट्री के औसत P/E 27.3 और अपने 5-साल के औसत 33.13 से कम है। यह संकेत देता है कि स्टॉक शायद थोड़ा अंडरवैल्यूड हो सकता है। हालांकि, इसका प्राइस-टू-सेल्स (P/S) रेशियो ऊंचा है और कुछ पीयर्स की तुलना में EBITDA कम है। Agilent का ग्रॉस मार्जिन 53.6% और रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 24.49% इसके सेक्टर में बेहतरीन परफॉरमेंस दिखाते हैं। पिछले 12 महीनों में स्टॉक में -6.59% की गिरावट के बावजूद, एनालिस्ट्स इसे "बाय" (Buy) रेटिंग दे रहे हैं और टारगेट प्राइस $151.63 से $171.65 के बीच बता रहे हैं, जो मौजूदा स्तरों से अच्छी ग्रोथ का संकेत देता है।

मुख्य चुनौतियाँ और रिस्क

इन सब के बावजूद, Agilent के सामने कुछ बड़ी चुनौतियाँ मौजूद हैं। कंपनी ने चाइना मार्केट में 21% रेवेन्यू की गिरावट दर्ज की है, जिसके कारण फिस्कल 2024 के फुल-ईयर आउटलुक को रिवाइज करना पड़ा है, जिसमें डबल-डिजिट डिक्लाइन का अनुमान है। दूसरी तिमाही में ऑर्गेनिक रेवेन्यू में 7.5% की गिरावट भी मार्केट की उम्मीदों से कम रही। लगातार ट्रेड टेंशन, खासकर टैरिफ, ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ा सकते हैं और प्रॉफिट मार्जिन को कम कर सकते हैं, यदि बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर पूरी तरह पास ऑन न किया जा सके। कुछ एनालिस्ट्स का यह भी मानना है कि Agilent की ग्रोथ की राह वैसी ही होने के बावजूद, इसमें पीयर्स की तुलना में वैल्यूएशन अपसाइड कम हो सकता है। Agilent के स्टॉक में 1.31 का बीटा (Beta) होने से यह S&P 500 की तुलना में ज़्यादा वोलेटाइल रहा है। मार्केट रिकवरी की गति में अप्रत्याशित बदलावों के कारण 2024 के मई में कंपनी के स्टॉक में एक बड़ी गिरावट देखी गई थी।

एनालिस्ट्स का भरोसा और भविष्य की संभावनाएं

ज्यादातर एनालिस्ट्स की राय Agilent को लेकर पॉजिटिव बनी हुई है, जिसमें "बाय" (Buy) रेटिंग का बोलबाला है। मॉर्गन स्टैनली (Morgan Stanley) और गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) जैसी फर्म्स ने "ओवरवेट" (Overweight) या "बाय" (Buy) रेटिंग दी है, जिनके टारगेट प्राइस मौजूदा स्तरों से अच्छी ग्रोथ की ओर इशारा करते हैं। कंपनी का क्लीनिकल बिजनेस भी करीब 50% ऑर्डर ग्रोथ दिखा रहा है, जो लॉन्ग-टर्म आउटलुक के लिए एक बड़ा पॉजिटिव फैक्टर है। Agilent के विस्तार के प्रयास, खासकर नए फैसिलिटीज के साथ, इसे बायोटेक और डायग्नोस्टिक्स जैसे स्टेबल एंड-मार्केट्स में ग्रोथ के लिए रणनीतिक रूप से तैयार करते हैं। साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स मार्केट में रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) निवेश और एडवांस डायग्नोस्टिक टूल्स की बढ़ती डिमांड के कारण लगातार ग्रोथ का अनुमान है, जिसमें एशिया-पैसिफिक रीजन सबसे तेजी से ग्रो करने वाला इलाका बने रहने की उम्मीद है।

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