₹5,739 करोड़ का रिकॉर्ड रेवेन्यू और 45% बढ़ा मुनाफा: Aegis Logistics के शानदार नतीजे
Aegis Logistics ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) और पहले नौ महीनों (9M FY26) के नतीजे पेश किए हैं, जो कंपनी के मजबूत प्रदर्शन को दर्शाते हैं।
9 महीनों का लेखा-जोखा:
31 दिसंबर, 2025 को समाप्त नौ महीनों में, कंपनी का रेवेन्यू 13% बढ़कर ₹5,739 करोड़ रहा। वहीं, EBITDA में 26% का इजाफा हुआ और यह ₹929 करोड़ पर पहुंच गया। कंपनी का नेट प्रॉफिट (PAT) 39% बढ़कर ₹652 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की समान अवधि में ₹470 करोड़ था।
तिमाही के नतीजे:
सिर्फ Q3 FY26 में, कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹1,725 करोड़ रहा। EBITDA में 29% की जोरदार बढ़ोतरी के साथ यह ₹326 करोड़ पर पहुंच गया। नेट प्रॉफिट (PAT) में तो 45% का जबरदस्त उछाल देखा गया, जो ₹233 करोड़ रहा (Q3 FY25 में ₹160 करोड़)। कंपनी का कहना है कि यह ग्रोथ ऑपरेटिंग लीवरेज और बेहतर प्रोडक्ट मिक्स के चलते आई है।
ऑपरेशनल एफिशिएंसी में भी जोरदार सुधार
कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी भी साफ दिख रही है। Q3 FY26 में, लिक्विड सेगमेंट के EBITDA मार्जिन में 674 बेसिस पॉइंट्स की प्रभावशाली बढ़ोतरी हुई और यह 77% पर पहुंच गया। यह तेजी प्रोडक्ट मिक्स और लोकेशन के फायदों के चलते आई है। मैनेजमेंट ने लागत कम करने और थ्रूपुट बढ़ाने पर लगातार फोकस बनाए रखने की बात कही है।
भविष्य के लिए बड़ा दांव: 1.2 अरब डॉलर का Capex
Aegis Logistics भविष्य की ग्रोथ के लिए तैयार दिख रही है। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2027 तक 1.2 अरब डॉलर (लगभग ₹10,000 करोड़) के कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) का बड़ा प्लान बनाया है। वहीं, 2030 तक कंपनी का लक्ष्य 5 अरब डॉलर तक पहुंचने का है। इस फंड का इस्तेमाल मुंबई पोर्ट पर लिक्विड स्टोरेज क्षमता बढ़ाने, JNPT में लिक्विड क्षमता का विस्तार करने और LPG बॉटलिंग प्लांट बनाने, कांडला में VLGC बर्थ को चालू करने और नए लिक्विड व अमोनिया टर्मिनल विकसित करने में किया जाएगा। मैनेजमेंट का मानना है कि डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस में वॉल्यूम ग्रोथ तो अभी "सिर्फ शुरुआत" है।
क्या हैं खतरे और उम्मीदें?
इन बड़े प्रोजेक्ट्स के एग्जीक्यूशन (Execution) और समय पर पूरा होने पर ही असली कामयाबी टिकी है। Aegis Logistics इन निवेशों के लिए इंटरनल एक्रुअल्स (internal accruals) और समझदारी भरे कर्ज (prudent debt) का इस्तेमाल करेगी, और 0.6x के डेट गियरिंग रेशियो (debt gearing ratio) को बनाए रखने का लक्ष्य रखेगी। IPO से मिले पैसों का इस्तेमाल कर्ज चुकाने में करना एक पॉजिटिव कदम है। पिपावाव पोर्ट पर पेट्रोलियम प्रोडक्ट हैंडलिंग के लिए 15 साल का 'टेक-ऑर-पे' कॉन्ट्रैक्ट (take-or-pay contract) भविष्य के रेवेन्यू के लिए एक बड़ा डी-रिस्किंग (de-risking) इवेंट है। कुल मिलाकर, क्षमता विस्तार और स्ट्रैटेजिक कॉन्ट्रैक्ट्स के दम पर कंपनी का भविष्य outlook काफी पॉजिटिव लग रहा है।
