नतीजों का लेखा-जोखा
Advait Energy Transitions Limited ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के लिए दमदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 114% बढ़कर ₹211.03 करोड़ हो गया। वहीं, प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 78% की जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई, जो ₹17.39 करोड़ पर जा पहुंचा। कंसोलिडेटेड EBITDA में भी 58% का उछाल आया और यह ₹24.16 करोड़ रहा, हालांकि EBITDA मार्जिन 11.45% पर था।
स्टैंडअलोन (Standalone) नतीजों की बात करें तो रेवेन्यू 32% बढ़कर ₹124.71 करोड़ रहा, जबकि EBITDA 40% बढ़कर ₹21.10 करोड़ तक पहुंच गया। इस दौरान EBITDA मार्जिन 16.92% दर्ज किया गया।
फाइनेंशियल ईयर 2026 के पहले नौ महीनों (9M FY26) में, कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल के मुकाबले दोगुना से भी ज्यादा, 138% बढ़कर ₹486 करोड़ रहा, और PAT 80% बढ़कर ₹35 करोड़ पर पहुंच गया।
भविष्य की रणनीति और विस्तार
कंपनी का 'Advait 2030' विजन भविष्य की राह दिखा रहा है, जिसमें मैनेजमेंट का पूरा जोर प्रॉफिटेबल ग्रोथ, डिसिप्लिन्ड एक्जीक्यूशन और बेहतर प्रोडक्ट मिक्स पर है। FY26 के लिए कंपनी करीब 40% से 45% के रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान लगा रही है। DISCOM (डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों) सेगमेंट और EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन) बिज़नेस कंपनी के मुख्य ग्रोथ ड्राइवर बने हुए हैं। ERS (इमरजेंसी रेस्टोरेशन सिस्टम्स) और स्ट्रिंगिंग टूल्स में अच्छी पकड़ के साथ-साथ सोलर EPC और NRE (न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी) डिवीजनों से भी लगातार ग्रोथ मिल रही है।
ऑर्डर बुक और कैपेक्स का प्लान
Advait Energy का ऑर्डर बुक ₹1,000 करोड़ के पार बना हुआ है, जो पिछले साल के मुकाबले 132% की शानदार ग्रोथ दिखाता है। इसमें पावर ट्रांसमिशन सॉल्यूशंस (PTS) डिवीज़न का 84% और न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी (NRE) डिवीज़न का 16% हिस्सा है।
भविष्य की तैयारी के लिए, कंपनी भारी निवेश कर रही है। अहमदाबाद-धोलेरा एक्सप्रेसवे पर NRE डिवीज़न और PTS डिवीज़न की क्षमता बढ़ाने के लिए एक मल्टी-इंटीग्रेटेड गीगा-फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स बनाया जा रहा है, जो 2028 के मध्य तक तैयार हो जाएगा।
सबसे अहम बात, कंपनी ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसके लिए ₹200 करोड़ के कैपेक्स (Capex) के साथ एक इलेक्ट्रोलाइजर फैक्ट्री लगाई जाएगी, जो अगले दो से तीन फाइनेंशियल ईयर में पूरी होगी। इस सुविधा का पहला फेज मार्च 2027 तक तैयार होने की उम्मीद है और 2028 तक इससे ₹200 करोड़ से ₹300 करोड़ तक का रेवेन्यू और 8% से 10% का नेट मार्जिन मिलने का अनुमान है।
इसके अलावा, 2.5 GW की BESS (बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स) असेंबली प्लांट Q3 FY27 तक चालू हो जाने का लक्ष्य है।
इन बड़े विस्तार योजनाओं को फंड करने के लिए, कंपनी ₹90-100 करोड़ का फंड जुटाने की योजना बना रही है, जिसमें डेट (Debt) और इक्विटी (Equity) दोनों का मिश्रण होगा।
अहम घडामोडी आणि रणनीतिक कदम
कंपनी 20 जनवरी 2026 को NSE मेन बोर्ड पर लिस्ट होने वाली है। हाल ही में, Advait Energy ने PGVCL (पश्चिम गुजरात विज कंपनी लिमिटेड) से ₹216 करोड़ का अपना अब तक का सबसे बड़ा EPC ऑर्डर हासिल किया है, जिसकी रेवेन्यू रिकग्निशन Q4 FY26 से शुरू होगी।
जोखिम आणि उम्मीदें
हालांकि, निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि ग्रीन हाइड्रोजन और BESS जैसी नई पहलों में बड़ा कैपेक्स (Capex) शामिल है, जिसमें एग्जीक्यूशन रिस्क (Execution Risk) और भविष्य के मार्केट एडॉप्शन पर निर्भरता है। कंपनी का फोकस मार्जिन सुधारने और ऑर्डर चुनने पर भी है। अगले 2-3 सालों में ग्रीन हाइड्रोजन मार्केट में कंसॉलिडेशन (Consolidation) की उम्मीद है, जो चुनौतियां और अवसर दोनों पेश कर सकता है।
इन सबके बावजूद, कंपनी का आउटलुक (Outlook) काफी पॉजिटिव है। Advait Energy आने वाले सालों में अपने रेवेन्यू में 40%-50% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) हासिल करने का लक्ष्य रखती है। नई ऊर्जा तकनीकों में विस्तार इसकी लॉन्ग-टर्म स्ट्रेटेजी का अहम हिस्सा है।
प्रतिस्पर्धियों से तुलना
भारत का रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर काफी प्रतिस्पर्धी है, जहां Adani Green Energy और Tata Power जैसी बड़ी कंपनियां लीड कर रही हैं। Waaree Renewable Technologies Limited (WRTL) और Larsen & Toubro (L&T) जैसे प्लेयर्स भी मौजूद हैं। Advait Energy ग्रीन हाइड्रोजन और BESS जैसे हाई-पोटेंशियल एरिया में फोकस करके अपनी खास जगह बना रही है, जो उसके कोर पावर ट्रांसमिशन बिज़नेस को कॉम्प्लीमेंट करेगा। यह सेक्टर सरकारी लक्ष्यों और बढ़ते FDI से प्रेरित है।