निवेशकों का दिखा जबरदस्त जुनून
Adisoft Technologies के इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) में हर वर्ग के निवेशकों ने जमकर पैसा लगाया। नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NIIs) ने अपनी आवंटित हिस्सेदारी से 120.66 गुना ज्यादा बोली लगाई, वहीं क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) ने 98.1 गुना सब्सक्रिप्शन हासिल किया। रिटेल इन्वेस्टर्स ने भी 47.27 गुना बोली लगाकर अपनी भागीदारी दर्ज कराई। कुल मिलाकर, 30.82 लाख शेयरों के मुकाबले 22.22 करोड़ से ज्यादा शेयरों की मांग देखी गई। इससे पहले, एंकर निवेशकों ने पहले ही ₹21.08 करोड़ का निवेश कर कंपनी पर भरोसा जताया था।
विस्तार और कर्ज चुकाने में लगेगा IPO का पैसा
इस IPO के जरिए जुटाए गए ₹74.1 करोड़ का इस्तेमाल कंपनी अपने विस्तार और वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में करेगी। योजना के अनुसार, लगभग ₹37.77 करोड़ पुणे में एक नई फैक्ट्री लगाने के लिए आवंटित किए जाएंगे, जिसके दिसंबर 2026 तक चालू होने की उम्मीद है। इससे ऑटोमेशन सॉल्यूशंस की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी। इसके अलावा, ₹10 करोड़ का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए किया जाएगा, ₹10 करोड़ वर्किंग कैपिटल को मजबूत करने में लगाए जाएंगे, और बाकी राशि का उपयोग सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए होगा।
ऑटोमेशन सेक्टर की बूम और Adisoft का वैल्यूएशन
Adisoft भारत के तेजी से बढ़ते इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन मार्केट में काम करती है, जिसके 2024 में USD 7.57 बिलियन से बढ़कर 2031 तक USD 28 बिलियन से अधिक होने का अनुमान है। यह ग्रोथ इंडस्ट्री 4.0 को अपनाने, मैन्युफैक्चरिंग के लिए सरकारी समर्थन और स्मार्ट फैक्ट्रियों की बढ़ती मांग से प्रेरित है। Adisoft के ऑटोमोटिव निर्माताओं के लिए कस्टमाइज्ड ऑटोमेशन समाधान इसी ट्रेंड के अनुरूप हैं। कंपनी का रेवेन्यू FY25 में बढ़कर ₹133 करोड़ हो गया (जो FY23 में ₹76 करोड़ था), और PAT (Profit After Tax) FY25 में ₹16.1 करोड़ रहा। IPO के ऊपरी मूल्य ₹172 पर, कंपनी का मार्केट कैप लगभग ₹280.67 करोड़ है, जिसका P/E रेश्यो FY25 की कमाई पर लगभग 17.4 गुना है। यह वैल्यूएशन इस हाई-ग्रोथ सेक्टर में काफी प्रतिस्पर्धी है।
ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) Adisoft के शेयरों के लिए ₹11 से ₹16.50 के बीच रहा, जो लिस्टिंग पर 6.4% से 9.6% तक के संभावित गेन का संकेत देता है। हालांकि, हालिया IPOs के मिले-जुले प्रदर्शन और व्यापक बाजार के रुझानों को देखते हुए, छोटे इश्यूज के लिए थोड़ी सावधानी बरतना जरूरी है।
Adisoft के लिए जोखिम और चुनौतियां
मजबूत डिमांड के बावजूद, Adisoft को SME (Small and Medium Enterprise) से जुड़े जोखिमों का सामना करना पड़ता है। ऑटोमोटिव सेक्टर पर इसकी मुख्य निर्भरता, जो साइक्लिकल है, एक कमजोरी साबित हो सकती है। कंपनी को बड़े ग्लोबल और डोमेस्टिक प्लेयर्स से भी कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है, जिनके पास अधिक वित्तीय और R&D संसाधन हैं। हालांकि FY25 में मुनाफा बढ़ा, लेकिन अक्टूबर 2025 तक की अवधि के लिए यह ₹3.74 करोड़ पर सीमित हो गया, जो संभावित अर्निंग्स में उतार-चढ़ाव का संकेत देता है। Adisoft का मार्केट कैप इसे बड़ी इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन फर्मों की तुलना में अधिक अस्थिरता और कम लिक्विडिटी के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है। प्रमोटर्स अजय चंद्रशेखर प्रभु और प्रीति अजय प्रभु 2013 से कंपनी के विकास की देखरेख कर रहे हैं।
आउटलुक: ऑटोमेशन बूम का फायदा उठाने को तैयार
IPO की सफलता और पूंजी निवेश Adisoft Technologies को भारत में इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन की बढ़ती मांग का फायदा उठाने में मदद करेगा। नई फैक्ट्री संचालन को बढ़ाने और ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण है। एंकर निवेशकों के समर्थन और नियोजित पूंजी उपयोग के साथ, कंपनी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन से लाभ उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है। Adisoft के शेयरों की ट्रेडिंग NSE Emerge पर 30 अप्रैल, 2026 से शुरू होने वाली है।
