Adani Enterprises Share Price: रॉकेट हुआ शेयर! 52-Week High पर पहुंचा Adani Enterprises, जानें वजह

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Adani Enterprises Share Price: रॉकेट हुआ शेयर! 52-Week High पर पहुंचा Adani Enterprises, जानें वजह
Overview

Adani Enterprises के निवेशकों के लिए आज का दिन शानदार रहा। कंपनी के स्टॉक ने **₹2,665** के स्तर पर अपना 52-Week High बनाया है, जिसमें वॉल्यूम (Volume) भी काफी मजबूत रहा। यह तेजी इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) पर कंपनी के बढ़ते फोकस और बिज़नेस को डीमर्ज (Demerge) करने की योजनाओं के कारण आई है। अब कंपनी के **80%** EBITDA कॉन्ट्रैक्टेड एसेट्स (Contracted Assets) से आ रहा है।

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बदली स्ट्रेटेजी का असर, शेयर रिकॉर्ड पर

Adani Enterprises की इस शानदार परफॉरमेंस (Performance) के पीछे कंपनी की बदली हुई बिज़नेस स्ट्रेटेजी (Business Strategy) है। कंपनी अब कैपिटल-इंटेंसिव वेंचर्स (Capital-intensive ventures) से हटकर इंफ्रास्ट्रक्चर-आधारित मॉडल पर जोर दे रही है, ताकि शेयरधारकों के लिए वैल्यू अनलॉक (Value unlock) की जा सके। नतीजतन, कंपनी के EBITDA का 80% हिस्सा अब मैच्योर, लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्टेड ऑपरेशंस (Long-term contracted operations) से आ रहा है, जिससे कमाई में स्थिरता और अनुमान लगाया जा सकता है।

₹2,665 का नया कीर्तिमान

मार्केट में हल्के उतार-चढ़ाव के बावजूद, Adani Enterprises का शेयर 7% उछलकर ₹2,665 के स्तर पर पहुंच गया, जो इसका 52-Week High है। इससे पहले यह ₹2,611.46 पर 23 सितंबर 2025 को बंद हुआ था। पिछले एक महीने में जहां BSE Sensex 4% गिरा है, वहीं Adani Enterprises का शेयर 25% चढ़ चुका है। यह स्टॉक अपने 30 मार्च 2026 के लो ₹1,753.45 से 52% रिकवर कर चुका है और ₹1,800 के राइट्स इश्यू प्राइस (Rights Issue Price) से 48% ऊपर ट्रेड कर रहा है। ट्रेडिंग वॉल्यूम (Trading Volumes) में चार गुना बढ़ोतरी इस तेजी में निवेशकों के मजबूत विश्वास को दर्शाती है।

भविष्य की योजनाओं पर दांव

कंपनी नए बिज़नेस जैसे एयरपोर्ट्स (Airports), रोड्स (Roads), Adani New Industries (ANIL) इकोसिस्टम और माइन डेवलपमेंट ऑपरेटर (MDO) सेवाओं को विकसित कर रही है, जिनसे भविष्य में ग्रोथ की उम्मीद है। Adani Enterprises का इतिहास सफल डीमर्जर का रहा है, जिसमें पोर्ट्स, पावर, रिन्यूएबल्स और गैस डिस्ट्रीब्यूशन जैसी कंपनियों को अलग किया जा चुका है। भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर भी तेजी से बढ़ रहा है, जिसके 2026 तक $205.96 बिलियन तक पहुंचने और 2031 तक 8% CAGR से बढ़ने का अनुमान है। कंपनी भारत की सबसे बड़ी MDO है, जिसके ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन्स (Operating Profit Margins) 35% से अधिक हैं और सर्विस एग्रीमेंट्स (Service Agreements) से स्थिर कमाई होती है। कोल ट्रेडिंग (Coal Trading) में भी कंपनी की मजबूत मौजूदगी है, जो भारत की थर्मल कोल (Thermal Coal) की 4-8% जरूरतों को पूरा करती है।

वैल्यूएशन पर चिंता और जोखिम

हालांकि, बाजार की नजर कंपनी के प्रीमियम वैल्युएशन (Premium Valuation) पर भी है। कंपनी का P/E रेश्यो (P/E Ratio) 30-35x के आसपास है, जबकि कुछ एनालिस्ट्स (Analysts) इसे 107 या 156.24 तक, यानी इंडस्ट्री एवरेज से दोगुना बता रहे हैं। कुछ रिपोर्टों ने इसे 'ओवरवैल्यूड' (Overvalued) भी कहा है, जिसका मतलब है कि मौजूदा कीमत पर थोड़ी सी भी चूक बड़े नुकसान का सबब बन सकती है। Adani Group के पिछले डीमर्जर्स (Demergers) कुशल ट्रेडर्स के लिए मौके तो लाए, लेकिन गलत जानकारी या बाजार के उतार-चढ़ाव के कारण कई निवेशकों को भारी नुकसान भी झेलना पड़ा है।

कमोडिटी का खेल और ESG का दबाव

शेयर में बढ़त के बावजूद, Adani Enterprises के सामने बड़े जोखिम भी हैं। कंपनी का कोल ट्रेडिंग और MDO बिज़नेस वोलेटाइल कमोडिटी प्राइसेज (Volatile commodity prices) और फॉसिल फ्यूल (Fossil fuels) से दूर जाने के ग्लोबल दबाव के अधीन है। MDO बिज़नेस में अभी 145 MMTPA की क्षमता का केवल 34% इस्तेमाल हो रहा है, जो स्केलिंग-अप (Scaling up) में चुनौतियों का संकेत देता है। Adani Group के रेवेन्यू का 60% से अधिक कोल से आता है, जिसे ESG (Environmental, Social, and Governance) फंडिग की कमी का सामना करना पड़ सकता है। Hindenburg Research के आरोपों और SEBI की जांचों का असर भी बना हुआ है। CreditSights ने ग्रुप को 'ओवरलीवरेज्ड' (Overleveraged) बताया है। कंपनी का लो इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो (Low interest coverage ratio) और इंटरेस्ट कॉस्ट को कैपिटलाइज (Capitalize) करने की प्रैक्टिस लंबी अवधि में स्ट्रक्चरल इश्यूज (Structural issues) पैदा कर सकती है।

आगे की राह: डीमर्जर और ग्रीन एनर्जी

भविष्य की बात करें तो, Adani Enterprises अपने विभिन्न बिज़नेसेज को अलग करके वैल्यू अनलॉक करने की योजना बना रही है। एयरपोर्ट्स डिवीज़न (Airports division) से अच्छी परफॉरमेंस की उम्मीद है। ANIL इकोसिस्टम में सोलर और विंड मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी (Solar and wind manufacturing capacity) को बढ़ाना नज़दीकी फोकस है, जबकि ग्रीन हाइड्रोजन (Green hydrogen) एक लॉन्ग-टर्म लक्ष्य है। सरकार की ₹37,500 करोड़ की कोल गैसिफिकेशन प्रोजेक्ट्स (Coal gasification projects) भी कंपनी के कोल बिज़नेसेज के लिए नए अवसर खोल सकती हैं। एनालिस्ट्स का भरोसा कायम है और वे लगातार ग्रोथ का अनुमान लगा रहे हैं, लेकिन निवेशकों को हाई वैल्युएशन और डीमर्जर एग्जीक्यूशन (Demerger execution) की सफलता पर पैनी नजर रखनी चाहिए।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.