नतीजों का लेखा-जोखा
Adani Enterprises Limited (AEL) ने Q3 FY26 के लिए शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट (PAT) पिछले साल की समान अवधि के ₹228.64 करोड़ से बढ़कर 2405% की छलांग लगाकर ₹5,726.57 करोड़ हो गया। इस बंपर मुनाफे का मुख्य कारण AWL Agri Business Limited में अपनी हिस्सेदारी की बिक्री से मिला ₹5,632.09 करोड़ का एक्सेप्शनल गेन (Exceptional Gain) रहा। कंपनी के कंसोलिडेटेड रेवेन्यू (Revenue) में 8.63% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹24,819.59 करोड़ दर्ज किया गया, जो पिछले साल ₹22,848.42 करोड़ था।
वहीं, स्टैंडअलोन (Standalone) नतीजों पर नजर डालें तो PAT में 1073% की भारी उछाल के साथ यह ₹6,295.99 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल यह ₹538.25 करोड़ था। स्टैंडअलोन रेवेन्यू में 13.83% की गिरावट आई और यह ₹5,304.07 करोड़ रहा।
दिसंबर 2025 को समाप्त नौ महीनों के लिए, कंसोलिडेटेड PAT 153.5% बढ़कर ₹10,117.48 करोड़ हो गया, जबकि स्टैंडअलोन PAT 520% की तेजी के साथ ₹11,034.49 करोड़ दर्ज किया गया।
31 दिसंबर 2025 तक के कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल्स के अनुसार, डेट इक्विटी रेशियो (Debt Equity Ratio) 1.19, ऑपरेटिंग मार्जिन (Operating Margin) 14.60%, और नेट प्रॉफिट मार्जिन (Net Profit Margin) 22.46% रहा। वहीं, स्टैंडअलोन एंटिटी का डेट इक्विटी रेशियो 0.36, ऑपरेटिंग मार्जिन 8.94%, और असाधारण लाभ के कारण नेट प्रॉफिट मार्जिन 105.80% रहा।
चिंता का विषय: ऑडिटर की रिपोर्ट
मुनाफे के ये आंकड़े भले ही शानदार दिख रहे हों, लेकिन कंपनी के इंडिपेंडेंट ऑडिटर (Independent Auditor) की रिपोर्ट कुछ गंभीर चिंताओं की ओर इशारा करती है। ऑडिटर ने अपनी रिपोर्ट में निष्कर्ष को संशोधित (Modified Conclusion) करते हुए कहा है कि सब्सिडियरी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (MIAL) में ₹845.76 करोड़ के फंड के कथित दुरुपयोग को लेकर जांच चल रही है। इसके अलावा, नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (NMIAL) भी कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs) की जांच के दायरे में है। कस्टम ड्यूटी से जुड़ा ₹863.62 करोड़ का एक विवाद भी चल रहा है, जिसमें से ₹460.61 करोड़ का भुगतान विरोध स्वरूप किया गया है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कई अन्य सब्सिडियरी, ज्वाइंटली कंट्रोल्ड एंटिटी और एसोसिएट्स लगातार घाटे में चल रहे हैं या उनके पास निगेटिव नेट करंट एसेट्स (Negative Net Current Assets) हैं। इन सभी मुद्दों को देखते हुए, कंपनी को भविष्य में नियामक (Regulatory) और वित्तीय (Financial) मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।