मुनाफे की बंपर दौड़, लेकिन कर्ज़ की भी बढ़ी रफ्तार!
Adani Enterprises ने अपने हालिया नतीजों से सबको चौंका दिया है। फाइनेंशियल ईयर 2025 (FY25) में कंपनी का नेट प्रॉफिट बढ़कर ₹7,510.22 करोड़ पर पहुंच गया, जबकि FY24 में यह ₹3,293.40 करोड़ था। कंपनी का रेवेन्यू भी बढ़कर ₹97,894.75 करोड़ हो गया। इस शानदार ग्रोथ के पीछे कंपनी के अधिग्रहण (Acquisitions) और एक बड़ा राइट्स इश्यू (Rights Issue) बताया जा रहा है। कंपनी ने 10 फरवरी 2026 को D P Jain TOT Toll Roads Private Limited में 51% हिस्सेदारी खरीदी, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो मजबूत हुआ। साथ ही, नवंबर-दिसंबर 2025 में ₹24,930 करोड़ का राइट्स इश्यू भी सफल रहा, जिसे ₹1,800 प्रति शेयर पर जारी किया गया था। इस पैसे का इस्तेमाल एयरपोर्ट, डेटा सेंटर, ग्रीन एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स में कंपनी के विस्तार के लिए किया जाएगा।
कर्ज़ का बढ़ता पहाड़ और अमेरिकी जांच की तलवार
इन सकारात्मक वित्तीय आंकड़ों और रणनीतिक चालों के बावजूद, कंपनी की वित्तीय सेहत पर चिंता के बादल मंडरा रहे हैं। कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेशियो (Debt-to-Equity Ratio) मार्च 2025 तक बढ़कर 1.60 हो गया था, और कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल के दिनों में यह 200% से भी ऊपर चला गया है। हालिया P/E रेशियो लगभग 20.9x के आसपास दिख रहा है, जो बढ़ते कर्ज को देखते हुए चिंताजनक है। ऐसे में, कंपनी के ऑपरेटिंग कैश फ्लो (Operating Cash Flow) का नेगेटिव होना और बढ़ता हुआ कर्ज, उसकी ग्रोथ की रफ्तार और लोन चुकाने की क्षमता पर सवाल खड़े करता है।
इसके अलावा, अमेरिकी ट्रेजरी के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने फरवरी 2026 में कंपनी के खिलाफ ईरान से जुड़े संभावित लेन-देन को लेकर एक नागरिक जांच (Civil Investigation) शुरू की है। यह जांच उन आरोपों के बीच आई है जो शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च ने 2023 की शुरुआत में लगाए थे। Adani Enterprises का कहना है कि वह जांच में सहयोग कर रही है और उसे किसी गलत काम के होने की उम्मीद नहीं है, लेकिन इन सबके चलते कंपनी पर भू-राजनीतिक और रेगुलेटरी जोखिम (Geopolitical and Regulatory Risks) काफी बढ़ गए हैं। फरवरी 2026 तक कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹2.77 ट्रिलियन था।
दांव पर एडवांस्ड ग्रोथ: कर्ज़, जांच और ऑपरेशनल रिस्क
Adani Group की हमेशा से हाई-लीवरेज (High Leverage) रणनीति रही है, जिसने तेजी से विस्तार को बढ़ावा दिया है, लेकिन यह उसे बड़े वित्तीय जोखिम में भी डालती है। हालिया आंकड़े बताते हैं कि डेट-टू-इक्विटी रेशियो लगातार बढ़ रहा है, जो मार्च 2025 तक 1.60 से ऊपर और हाल की तिमाहियों में 200% से अधिक हो गया है। यह उच्च लीवरेज, कुछ एनालिस्ट्स द्वारा बताए गए नेगेटिव ऑपरेटिंग कैश फ्लो के साथ मिलकर, कंपनी की वित्तीय फ्लेक्सिबिलिटी को कम करता है और ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव व आर्थिक मंदी के प्रति उसकी संवेदनशीलता को बढ़ाता है। OFAC की जांच, कंपनी की प्रतिष्ठा और वित्तीय स्थिति के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम पेश करती है, भले ही कंपनी पर इसका कोई बड़ा असर न पड़ने की उम्मीद हो। यह सब एक जटिल रेगुलेटरी माहौल को और बढ़ाता है। इसके अलावा, कंपनी के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए लगातार फंडिंग की आवश्यकता होती है, जिससे वह मार्केट सेंटीमेंट और कैपिटल अवेलेबिलिटी के प्रति संवेदनशील हो जाती है। कुछ एनालिस्ट्स ने वैल्यूएशन, कर्ज और रिटर्न को लेकर चिंता जताते हुए 'सेल' रेटिंग भी दी है।