नतीजे: एक तरफ खुशी, दूसरी तरफ चिंता
9 महीने (31 दिसंबर 2025 तक) के नतीजों पर गौर करें तो Adani Enterprises (AEL) का कंसॉलिडेटेड EBITDA 3% घटकर ₹11,985 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹12,377 करोड़ था। इस दौरान, कंपनी की कुल आय (Total Income) भी 4% गिरकर ₹69,756 करोड़ दर्ज की गई। हालांकि, 9M FY26 में प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) 145% की जोरदार छलांग लगाकर ₹12,796 करोड़ पर पहुंच गया। इसकी मुख्य वजह Adani Wilmar में हिस्सेदारी की बिक्री और सीमेंट यूनिट्स के ट्रांसफर से हुआ ₹9,215 करोड़ का एकमुश्त फायदा (Exceptional Gain) रहा। नतीजतन, शेयरधारकों को मिलने वाला प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 193% बढ़कर ₹9,560 करोड़ हो गया।
वहीं, तीसरी तिमाही FY26 (Q3 FY26) में कंसॉलिडेटेड EBITDA 15% बढ़कर ₹4,297 करोड़ रहा, जो पिछले साल इसी तिमाही में ₹3,723 करोड़ था। इस तिमाही में कुल आय 8% बढ़कर ₹25,475 करोड़ दर्ज हुई। Q3 में PBT 11 गुना बढ़कर ₹6,932 करोड़ पर आ गया, जिसमें ₹5,632 करोड़ का एकमुश्त फायदा शामिल था। इस कारण Q3 में PAT 90 गुना बढ़कर ₹5,627 करोड़ पर पहुंच गया।
कर्ज का बढ़ता बोझ और ऑपरेशनल दबाव
लेकिन, नतीजों की असली तस्वीर थोड़ी अलग है। PAT के आंकड़े वन-ऑफ़ (one-off) यानी एकमुश्त आय से काफी बढ़े हुए दिख रहे हैं। मुख्य ऑपरेशनल परफॉरमेंस, जैसा कि 9 महीने के EBITDA में 3% की गिरावट से पता चलता है, दबाव में है।
कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट एक्सटर्नल डेट (Net External Debt) 31 दिसंबर 2025 तक बढ़कर ₹74,297 करोड़ हो गया है, जो 31 मार्च 2024 को ₹62,083 करोड़ था। यह बढ़ोतरी इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स में निवेश के कारण हुई है। 9 महीने के लिए नेट डेट टू EBITDA रेशियो 2.3x रहा, और इंटरेस्ट कवरेज रेशियो (Interest Coverage Ratio) भी 2.3x दर्ज किया गया।
मैनेजमेंट का भरोसा और आगे की राह
कंपनी के चेयरमैन, गौतम अडानी ने 'मजबूत एग्जीक्यूशन और शानदार ऑपरेशनल परफॉरमेंस' की बात कही। उन्होंने नवी मुंबई एयरपोर्ट के चालू होने को एक बड़ी उपलब्धि बताया और भविष्य में ग्रोथ को लेकर विश्वास जताया। मैनेजमेंट का फोकस मुख्य रूप से रणनीतिक योजनाओं को लागू करने और इंफ्रास्ट्रक्चर में भविष्य के ग्रोथ इंजन पर रहा।
आगे क्या? (Outlook & Risks)
कंपनी नए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स जैसे नवी मुंबई एयरपोर्ट, HAM रोड्स और गुवाहाटी एयरपोर्ट को चालू करने पर जोर दे रही है। राइट्स इश्यू और NCD जारी करने से कैपिटल मार्केट तक पहुंच साबित होती है। कंपनी की भविष्य की ग्रोथ इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अपने नए बिजनेस में ग्रोथ कैसे लाती है, मुख्य ऑपरेशंस की प्रॉफिटेबिलिटी कैसे बढ़ाती है और बढ़ते कर्ज को कैसे मैनेज करती है। निवेशकों की निगाहें मुख्य बिजनेस में EBITDA मार्जिन में सुधार और नए एसेट्स की बिक्री की प्रगति पर रहेगी।
जोखिमों (Risks) की बात करें तो, माइनिंग सर्विसेज और IRM जैसे सेगमेंट्स में कम वॉल्यूम और कीमतों के कारण कोर EBITDA पर दबाव बना रह सकता है। केवल एकमुश्त फायदों पर निर्भरता लंबे समय तक टिकाऊ नहीं हो सकती, और बढ़ते कर्ज का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है।