NCLT से मिली Adani Infra को हरी झंडी
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की प्रिंसिपल बेंच, नई दिल्ली ने Adani Infra (India) Limited (AIIL) द्वारा Punj Lloyd Limited (PLL) के अधिग्रहण को हरी झंडी दे दी है। 12 फरवरी 2026 को जारी किए गए आदेश के अनुसार, यह अधिग्रहण 'गोइंग कंसर्न' (going concern) आधार पर होगा, जिसका मतलब है कि Punj Lloyd का संचालन जारी रखा जाएगा। Adani Infra, जो इस डील में सबसे सफल बोलीदाता (bidder) बनकर उभरी है, Punj Lloyd को ₹281.10 करोड़ में खरीदेगी। कंपनी को 'कैटेगरी A - एसेट सेट 1' के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
'क्लीन स्लेट' का बड़ा फायदा
इस सौदे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत 'क्लीन स्लेट' (Clean Slate) सिद्धांत का लागू होना है। यह कानूनी प्रावधान खरीदार को कॉर्पोरेट देनदार (corporate debtor) की पिछली देनदारियों, डिफ़ॉल्ट्स और दायित्वों से सुरक्षा देता है। Adani Infra के लिए, यह एक नई शुरुआत है, जिससे वह Punj Lloyd की पिछली वित्तीय और परिचालन चुनौतियों से मुक्त रहेगी। यह बिक्री 'जैसा है, जहाँ है' ('as is where is') और 'बिना किसी रिकॉर्स' ('without recourse') के आधार पर की जा रही है, जो Adani ग्रुप को यह सुरक्षा और भी मजबूत करती है।
Adani के इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो में नया अध्याय
यह अधिग्रहण Adani ग्रुप के इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग सेक्टर में अपनी मजबूत स्थिति को और बढ़ाने की एक और अहम रणनीतिक चाल है। Punj Lloyd, जो कभी EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, और कंस्ट्रक्शन) में एक प्रमुख कंपनी थी, अब Adani के बढ़ते पोर्टफोलियो का हिस्सा बनेगी।
लिक्विडेशन का संदर्भ
Punj Lloyd Limited का NCLT के माध्यम से लिक्विडेशन (liquidation) तक का सफर भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की कठिनाइयों को दर्शाता है। हालांकि, IBC फ्रेमवर्क समाधान के लिए एक स्पष्ट रास्ता प्रदान करता है। Adani Infra की सफल बोली दिखाती है कि व्यवहार्य पुनरुद्धार योजना (revival plan) और 'क्लीन स्लेट' मिलने पर लिक्विडेशन वाली कंपनियां भी महत्वपूर्ण निवेश आकर्षित कर सकती हैं।
आगे की राह
'क्लीन स्लेट' सिद्धांत ने Adani Infra के लिए अधिग्रहण के जोखिम को काफी हद तक कम कर दिया है। अब सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि Adani Punj Lloyd के संचालन को कितनी प्रभावी ढंग से पुनर्जीवित कर पाता है।