Abhishek Infraventures Share: क्या डूब गई कंपनी? कमाई ज़ीरो, घाटा रॉकेट की रफ़्तार से बढ़ा!

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AuthorAditya Rao|Published at:
Abhishek Infraventures Share: क्या डूब गई कंपनी? कमाई ज़ीरो, घाटा रॉकेट की रफ़्तार से बढ़ा!
Overview

Abhishek Infraventures Limited के निवेशकों के लिए बुरी खबर है। कंपनी ने Q3 FY26 के लिए **ज़ीरो रेवेन्यू (₹0.00 Lakhs)** दर्ज किया है, जो पिछले साल के समान ही है। इससे कंपनी का नेट लॉस (Net Loss) पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले काफी बढ़ गया है।

📉 ज़ीरो कमाई, बढ़ता घाटा: Abhishek Infraventures के नतीजों ने उड़ाए होश!

Abhishek Infraventures Limited ने 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त तिमाही और नौ महीनों के लिए अपने अन-ऑडिटेड फाइनेंशियल नतीजे जारी किए हैं। कंपनी के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस तिमाही में उसका रेवेन्यू ₹0.00 Lakhs रहा। यह पिछले साल की इसी तिमाही (Q3 FY25) और पिछली तिमाही (Q2 FY26) दोनों के मुकाबले बिल्कुल भी नहीं बदला है।

खर्चों पर लगाम नहीं, घाटा बढ़ा:

कमाई भले ही ज़ीरो रही हो, लेकिन कंपनी का कुल कंसोलिडेटेड खर्च (Consolidated Expenses) इस तिमाही में ₹4.32 Lakhs पहुँच गया। यह पिछले साल की इसी तिमाही के ₹3.40 Lakhs से ज़्यादा है, हालांकि पिछली तिमाही यानी Q2 FY26 के ₹5.30 Lakhs से थोड़ा कम है। इस बढ़ते खर्च के कारण, कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट लॉस (Consolidated Net Loss) Q3 FY26 में बढ़कर ₹4.32 Lakhs हो गया। वहीं, पिछली साल की इसी अवधि में यह घाटा ₹3.40 Lakhs था।

नौ महीने के नतीजे भी चिंताजनक:

अगर नौ महीनों के नतीजों पर नज़र डालें, तो 31 दिसंबर, 2025 तक कंसोलिडेटेड नेट लॉस बढ़कर ₹19.01 Lakhs हो गया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹15.57 Lakhs था। कंपनी का बेसिक और डाइल्यूटेड ईपीएस (Basic and Diluted EPS) Q3 FY26 में ₹(0.09) रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि में ₹(0.07) था।

स्टैंडअलोन प्रदर्शन भी खराब:

कंपनी के स्टैंडअलोन (Standalone) नतीजे भी कंसोलिडेटेड प्रदर्शन की तरह ही चिंताजनक हैं। यहाँ भी रेवेन्यू शून्य रहा और नेट लॉस बढ़कर ₹4.26 Lakhs हो गया, जो पिछले साल ₹3.34 Lakhs था। ईपीएस ₹(0.08) रहा।

ऑडिटर्स की चिंता और गवर्नेंस का सवाल:

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि कंपनी के ऑडिटर ने कहा है कि उन्होंने एक सब्सिडियरी (Subsidiary) के फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स की समीक्षा (Review) नहीं की है। दिलचस्प बात यह है कि उस सब्सिडियरी का रेवेन्यू भी ज़ीरो ही बताया गया है। यह स्थिति कंपनी के गवर्नेंस और ऑपरेशंस पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जब सब्सिडियरी खुद कोई कमाई नहीं कर रही है, तो कंसोलिडेटेड नतीजों में उसके डेटा पर भरोसा कितना किया जाए, यह एक बड़ा सवाल है।

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