एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (AWEIL), जो कि एक सरकारी रक्षा निर्माता कंपनी है, गंभीर परिचालन और वित्तीय संकट से जूझ रही है। संसदीय समिति की एक रिपोर्ट में कंपनी के भारी संचयी नुकसान (cumulative losses), हथियारों में बार-बार होने वाली गुणवत्ता संबंधी समस्याओं और सेना से मांग घटने के कारण बेकार पड़ी उत्पादन क्षमता (idle capacity) का खुलासा हुआ है।
AWEIL के वित्तीय हालात पर बड़ी चिंता
ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड (Ordnance Factory Board) के पुनर्गठन के बाद बनी सरकारी रक्षा कंपनी AWEIL की कार्यप्रणाली और वित्तीय स्थिति पर संसद की लोक लेखा समिति (PAC) ने एक तीखी रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में भारत के छोटे हथियारों (small-arms) के उत्पादन में गहरी समस्याओं का जिक्र किया गया है, जिससे सेना को सप्लाई किए जाने वाले हथियारों की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
लगातार हो रहा है करोड़ों का नुकसान
कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन चिंताजनक बना हुआ है। फाइनेंशियल ईयर 2023-24 से 2025-26 के बीच, AWEIL को कुल ₹234 करोड़ का नुकसान हुआ है। इससे पहले, 2015-16 से 2019-20 के बीच, 12 चुनिंदा छोटे हथियारों के उत्पादन में फैक्ट्रियों को ₹366 करोड़ का घाटा झेलना पड़ा था। समिति ने यह भी पाया कि ओवरहेड लागत (overhead costs) इतनी ज्यादा है कि प्रति यूनिट उत्पादन की लागत, अंतिम बिक्री मूल्य से काफी अधिक हो जाती है, जिससे कंपनी का वित्तीय भविष्य खतरे में पड़ गया है।
गुणवत्ता में गंभीर खामियां और उत्पादन की अड़चनें
रिपोर्ट में गुणवत्ता नियंत्रण (quality control) के मानकों पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। पिछले पांच सालों में, भारतीय सेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले छोटे हथियारों से जुड़े 269 हादसों के लिए निर्माण दोषों (manufacturing defects) को जिम्मेदार ठहराया गया है। इनमें बैरल बोर चिप-ऑफ (barrel bore chip-offs) और ब्रीच ब्लॉक फेलियर (breech block failures) जैसी समस्याएं शामिल हैं। समिति ने सुझाव दिया है कि कंपनी को अंतिम निरीक्षण (final inspections) के बजाय उत्पादन के दौरान ही गुणवत्ता जांच (in-process quality checks) पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
इसके अलावा, इन्वेंट्री प्रबंधन (Inventory management) भी एक बड़ी चुनौती है। 31 मार्च 2020 तक, AWEIL की तीन फैक्ट्रियों में ₹641 करोड़ का स्टॉक पड़ा था, जो कुल उत्पादन लागत का 72% था। भारी इन्वेंट्री और बड़ी मात्रा में बेकार पड़ी उत्पादन क्षमता (idle capacity) बेहतर संसाधन प्रबंधन (resource management) और सटीक मांग पूर्वानुमान (demand forecasting) की जरूरत को दर्शाती है।
सेना की घटती मांग और आगे की राह
उत्पादन संकट का एक मुख्य कारण सेना से लगातार मांग का अभाव है। 2015 से 2020 के बीच, सेना द्वारा की गई खरीद (procurement) इन फैक्ट्रियों से कुल उत्पादन का केवल 10% थी। यह फैसिलिटीज काफी हद तक गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) के ऑर्डर्स पर निर्भर रही हैं, जो पूरी उत्पादन क्षमता का उपयोग करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
समिति ने रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) से आग्रह किया है कि वह सेना, पुलिस बलों और AWEIL की जरूरतों को समन्वित करने के लिए एक मल्टी-ईयर, रोल-ऑन डिमांड प्लान (multi-year, roll-on demand plan) लागू करे। राजस्व बढ़ाने और क्षमता उपयोग (capacity utilization) को बेहतर बनाने के लिए, रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि AWEIL को नागरिक बाजार (civilian market) के लिए स्पोर्टिंग या हंटिंग राइफलों के निर्माण जैसे नए अवसर तलाशने चाहिए और निजी रक्षा निर्माताओं (private defense manufacturers) को कंपोनेंट्स की आपूर्ति करनी चाहिए। समिति ने यह भी सिफारिश की है कि AWEIL को अपनी उत्पादन लागत की तुलना निजी क्षेत्र के प्रतिस्पर्धियों (private sector peers) से करनी चाहिए ताकि दक्षता में सुधार और लागत अंतर को कम करने के तरीके खोजे जा सकें। अब अगला महत्वपूर्ण कदम सरकार की प्रतिक्रिया और इन फैक्ट्रियों को आधुनिक रक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम बनाने के लिए संरचनात्मक सुधारों (structural reforms) का कार्यान्वयन होगा।
