APTEL का सख्त रुख, DERC को फौरन करना होगा भुगतान
Appellate Tribunal for Electricity (APTEL) ने साफ कर दिया है कि दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (DERC) अब और देरी नहीं कर सकता। ट्रिब्यूनल ने DERC को तत्काल ₹38,552 करोड़ के रेगुलेटरी एसेट्स का भुगतान दिल्ली डिस्कॉम्स (Discoms) को शुरू करने का आदेश दिया है। APTEL ने DERC की तरफ से मांगी गई तीन महीने की मोहलत को भी ठुकरा दिया है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश और DERC की टालमटोल
समझते हैं कि रेगुलेटरी एसेट्स क्या होते हैं। यह वह पैसा है जिसे पावर कंपनियां अपनी आमदनी में हुई कमी को पूरा करने के लिए उपभोक्ताओं से वसूल करती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 6 अगस्त 2025 को अपने एक फैसले में कहा था कि यह एसेट्स, ब्याज सहित, दिल्ली के प्राइवेट बिजली वितरण कंपनियों (Discoms) को तीन साल के अंदर चुकाए जाने चाहिए। APTEL ने चेतावनी दी है कि DERC की लगातार हो रही देरी से इन एसेट्स की रकम और बढ़ रही है, जिससे दिल्ली के निवासियों के लिए बिजली महंगी हो रही है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि DERC का यह रवैया "Malafide" था और देरी का कोई वैलिड कारण नहीं था।
ऑडिट की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव
APTEL ने DERC के इस प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया कि दिल्ली की पावर कंपनियों का ऑडिट कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) करे। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने एक Thorough Audit की बात कही थी, APTEL ने यह स्पष्ट किया कि CAG ही एकमात्र विकल्प नहीं है। इसके बजाय, APTEL ने DERC को एक हफ्ते के अंदर एक चार्टर्ड अकाउंटेंट नियुक्त करने का निर्देश दिया है। यह चार्टर्ड अकाउंटेंट सुप्रीम कोर्ट के ओरिजिनल निर्देशों के अनुसार, रेगुलेटरी एसेट्स की रिकवरी के लिए एक Strict Audit करेगा।
