वैल्यूएशन पर है सबकी नजर
ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म HDFC Securities ने APL Apollo Tubes Ltd. पर कवरेज शुरू करते हुए 'Add' रेटिंग दी है और शेयर के लिए ₹2,070 का टारगेट प्राइस तय किया है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी के मजबूत ऑपरेशनल परफॉरमेंस और बैलेंस शीट में हुए सुधारों को देखते हुए स्टॉक में और तेजी आ सकती है। ऐतिहासिक रूप से, APL Apollo के शेयर का 10-साल का एवरेज फॉरवर्ड पी/ई (P/E) रेश्यो लगभग 27x रहा है। लेकिन, पिछले कुछ सालों में यह काफी बढ़ा है। फाइनेंशियल ईयर 2021-2025 के बीच यह एवरेज 38x रहा, जबकि फाइनेंशियल ईयर 2016-2020 के बीच यह सिर्फ 16x था। फिलहाल, शेयर का पी/ई रेश्यो लगभग 46.10x से 48.01x के आसपास चल रहा है। यह 10-साल के एवरेज 35.24x से काफी ऊपर है, जिसका मतलब है कि बाजार पहले से ही भविष्य की जबरदस्त ग्रोथ को स्टॉक में शामिल कर चुका है। ऐसे में, कंपनी पर अपने बड़े अनुमानों को पूरा करने का भारी दबाव होगा।
ग्रोथ की क्या है उम्मीदें?
APL Apollo Tubes ने पिछले एक दशक में 17% एडजस्टेड ईपीएस (AEPS) का शानदार सीएजीआर (CAGR) हासिल किया है। हालांकि, फाइनेंशियल ईयर 2020-2025 के बीच यह ग्रोथ घटकर लगभग 6% सीएजीआर रह गई थी। इस मंदी का एक कारण पिछला बड़ा कैपिटल स्पेंडिंग (Capex) और फरवरी 2022 में Shri Lakshmi Metal Udyog और Apollo Tricoat Tubes के मर्जर के बाद इक्विटी बेस का दोगुना होना था। HDFC Securities को उम्मीद है कि फाइनेंशियल ईयर 2025-2028E के बीच AEPS ग्रोथ में तेजी आकर 29% सीएजीआर तक पहुंच सकती है, जो उनके उम्मीदों को मजबूती देता है। वहीं, कंपनी के फाइनेंशियल ईयर 2025 के सालाना नतीजों में नेट प्रॉफिट में 26% की गिरावट देखी गई थी, जबकि फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही में नेट प्रॉफिट 42.9% बढ़ा था। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2025 में ₹20,800 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की तुलना में 14% सीएजीआर को दर्शाता है। यह मिली-जुली परफॉरमेंस बताती है कि उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए कंपनी को एग्जीक्यूशन पर कड़ी नजर रखनी होगी।
इंडस्ट्री की तस्वीर
भारत में स्टील ट्यूब्स और पाइप्स का बाजार 2030 तक बढ़कर 17.6 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो 5.2-5.8% सीएजीआर से बढ़ेगा। देश में तेजी से हो रहे इंफ्रा डेवलपमेंट, खासकर 2025 तक 1.4 ट्रिलियन डॉलर के निवेश की योजना, इस सेक्टर को बढ़ावा दे रही है। नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन और पीएम गति शक्ति जैसी सरकारी योजनाएं निर्माण और मैन्युफैक्चरिंग में स्टील की मांग बढ़ा रही हैं। हालांकि, इस सेक्टर में JSW, Vizag Steel, Mesco Steel के साथ-साथ Tata Steel और JSW Steel जैसे बड़े प्लेयर्स से कड़ा कंपटीशन है। हाल ही में स्टील की कीमतों में हुई बढ़ोतरी, जो अप्रैल 2028 तक 12% के इंटरिम सेफगार्ड ड्यूटी का नतीजा है, डोमेस्टिक प्रोड्यूसर्स के मार्जिन को सहारा दे रही है, लेकिन लागत के मामले में कॉम्पिटिटिवनेस को प्रभावित कर सकती है। कुल मिलाकर, भारतीय स्टील मार्केट के 2024 से 2030 के बीच 3.8% सीएजीआर से बढ़ने की उम्मीद है।
ध्यान देने योग्य मुख्य रिस्क (Key Risks)
हालांकि HDFC Securities और अन्य एनालिस्ट्स का कंसेंसस 'स्ट्रॉन्ग बाय' (Strong Buy) रेटिंग दे रहे हैं, कुछ फैक्टर्स पर ध्यान देना जरूरी है। मौजूदा हाई पी/ई (P/E) मल्टीपल एक बड़ा रिस्क है, अगर अनुमानित AEPS ग्रोथ हासिल नहीं हुई तो निवेशक स्टॉक को कम वैल्यू दे सकते हैं। AEPS ग्रोथ में आई पिछली मंदी, जो इक्विटी डाइल्यूशन से बढ़ी थी, हाई ग्रोथ रेट्स को फिर से हासिल करने पर सवाल खड़े करती है। स्टील ट्यूब्स सेक्टर कच्चे माल, खासकर आयरन ओर और कोकिंग कोल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील है, जो मार्जिन को प्रभावित कर सकता है। सेफगार्ड ड्यूटी कुछ हद तक सुरक्षा दे रही है, लेकिन चीन जैसे देशों से इम्पोर्ट कंपटीशन एक निरंतर खतरा बना हुआ है। कंपनी की बड़ी एक्सपेंशन योजनाएं, जो फाइनेंशियल ईयर 2028 तक कैपेसिटी को 5 मिलियन टन से बढ़ाकर 8 मिलियन टन करने का लक्ष्य रखती हैं, एग्जीक्यूशन रिस्क और भारी कैपिटल की मांग करती हैं। अप्रैल 2026 की शुरुआत में APL Apollo का मार्केट कैप लगभग ₹52,600-54,700 करोड़ था।
एनालिस्ट्स के टारगेट
कई ब्रोकरेज फर्मों ने APL Apollo Tubes के लिए पॉजिटिव रेटिंग जारी की हैं। HDFC Securities का ₹2,070 का टारगेट प्राइस अन्य एनालिस्ट्स के कंसेंसस 'स्ट्रॉन्ग बाय' के अनुरूप है। औसत 12-महीने के प्राइस टारगेट ₹2,295.57 से ₹2,301.67 तक हैं। UBS ने ₹2,000 के टारगेट के साथ 'Buy' रेटिंग दोहराई है, जबकि Axis Direct और IDBI Capital ने ₹2,170 के आसपास टारगेट दिए हैं। ये टारगेट मौजूदा ट्रेडिंग लेवल ₹1,895-1,900 से 10-18.5% तक का अपसाइड दिखा रहे हैं। हालांकि, ये उम्मीदें AEPS ग्रोथ में अनुमानित तेजी और इंडस्ट्री कंपटीशन व साइक्लिकल ट्रेंड्स के बीच कंपनी की प्रीमियम वैल्यूएशन बनाए रखने की क्षमता पर काफी हद तक निर्भर करती हैं।