Andhra Pradesh सरकार ने अपने तटों पर ग्लोबल शिपबिल्डिंग हब बनाने की पहल शुरू की है। इस प्रोजेक्ट में Mazagon Dock Shipbuilders और Goa Shipyard जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हो रही हैं, जो अंतरराष्ट्रीय मांग को पूरा करने में मदद करेंगी।
Andhra Pradesh सरकार राज्य को ग्लोबल मैरीटाइम इंडस्ट्री का बड़ा सेंटर बनाने की तैयारी में है। राज्य अपनी 1,053 किमी लंबी तटरेखा और डीप-सी पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का फायदा उठाकर उन ग्लोबल शिपबिल्डर्स को आकर्षित करना चाहता है, जिनके पास दक्षिण कोरिया और यूरोप जैसे बाजारों में जगह की कमी है। चूंकि दुनिया भर के यार्ड 2037 तक पूरी तरह बुक हैं, इसलिए भारत इस 'चाइना-प्लस-वन' रणनीति के जरिए सप्लाई चेन में अपनी जगह बनाना चाहता है।
प्रमुख कंपनियों की भूमिका
इस औद्योगिक ब्लूप्रिंट में घरेलू डिफेंस और शिपबिल्डिंग कंपनियां मुख्य भूमिका में हैं। Mazagon Dock Shipbuilders दुगराजपट्टनम क्लस्टर की योजनाओं पर काम कर रहा है, जबकि Goa Shipyard ने मछलीपट्टनम में लगभग ₹8,000 करोड़ की परियोजना के लिए जमीन आवंटित की है। इन प्रोजेक्ट्स का मकसद एक ऐसा मरीन मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार करना है, जिसमें कुशल वर्कफोर्स के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम्स भी शामिल होंगे।
निवेशकों के लिए चुनौतियां
शिपबिल्डिंग सेक्टर में प्रोजेक्ट के ऐलान से रेवेन्यू आने में काफी लंबा समय लगता है। यह सेक्टर भारी पूंजी (Capital-intensive) की मांग करता है। इसमें ड्राई डॉक, लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी के लिए बड़े निवेश की जरूरत होती है। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण संबंधी मंजूरी और तकनीकी जटिलताओं के कारण अक्सर देरी की संभावना बनी रहती है।
Cochin Shipyard जैसी कंपनियों का इतिहास बताता है कि इस बिजनेस में सिर्फ जमीन ही काफी नहीं है, बल्कि लगातार ऑर्डर बुक और ऑपरेशनल एफिशिएंसी सबसे जरूरी है। फिलहाल, मार्केट इस बात पर नजर रखेगा कि जमीन का हस्तांतरण और ड्राई डॉक का काम तय समय सीमा में कितना आगे बढ़ता है।
