सीमेंट बनाने वाली कंपनी ACC (ACC) के लिए यह तिमाही उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। कंपनी का नेट प्रॉफिट (Net Profit) पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले **55%** घटकर **₹1.72 अरब** रह गया है। इसका मुख्य कारण सीमेंट की कीमतों में आई भारी गिरावट है।
Detailed Coverage
गिरी सीमेंट की कीमतें, घटा मुनाफा
ACC ने 2027 फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए हैं, जिसमें कंपनी की कमाई पर सीमेंट की कीमतों में आई नरमी का बड़ा असर दिखा है। कंपनी का एडजस्टेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (Adjusted Profit After Tax) 55% गिरकर ₹1.72 अरब हो गया। यह दिखाता है कि बिक्री की कीमतों पर दबाव होने के कारण सीमेंट कंपनियों के लिए मुनाफा बनाए रखना कितना मुश्किल हो गया है।
कीमतों में 12% की कमी
इस तिमाही में कंपनी के लिए सबसे बड़ी चिंता का सबब बनी सीमेंट की 'रियलाइजेशन' (Realisation) यानी प्रति टन सीमेंट से होने वाली कमाई। यह पिछले तिमाही के मुकाबले 10% गिरी और ब्रोकरेज के अनुमान से 12% कम, यानी ₹5,766 प्रति टन रही। हालांकि, कंपनी ने 10 मिलियन टन सीमेंट की बिक्री कर वॉल्यूम के मामले में उम्मीदों को पूरा किया, लेकिन कम कीमतों के चलते कंपनी का EBITDA (Earnings Before Interest, Taxes, Depreciation, and Amortisation) 434 करोड़ रुपये पर आ गया, जो इंडस्ट्री के अनुमानों से काफी कम है।
लागत नियंत्रण में कंपनी की सफलता
मुनाफे पर दबाव के बावजूद, ACC ने अपने ऑपरेटिंग खर्चों को कंट्रोल करने में कुछ सफलता हासिल की है। कच्चे माल, बिजली और ईंधन की लागत प्रति टन विश्लेषकों के अनुमान से 10% कम रही। पिछले साल के मुकाबले इन खर्चों में सिर्फ 4% की मामूली बढ़ोतरी हुई। इसके अलावा, प्रति टन ऑपरेटिंग लागत में भी साल-दर-साल केवल 2% की बढ़ोतरी देखी गई, जिससे पता चलता है कि कंपनी की आंतरिक कुशलता (Internal Efficiency) अभी भी काम कर रही है, भले ही यह फिलहाल बाजार की कमजोर कीमतों के आगे फीकी पड़ रही है।
आगे क्या?
Nomura जैसे ब्रोकरेज हाउस ने ACC पर 'Reduce' रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस ₹1,250 रखा है। उनका मानना है कि शेयर फिलहाल 8.0x EV/EBITDA पर ट्रेड कर रहा है, जो कंपनी की मौजूदा कमाई के हिसाब से महंगा है।
आज 28 जुलाई को शाम 4:30 बजे होने वाली मैनेजमेंट की कमेंट्री पर निवेशकों की पैनी नजर रहेगी। यह देखना अहम होगा कि आने वाली तिमाहियों में सीमेंट की कीमतें सुधरती हैं या दबाव जारी रहता है। साथ ही, यह भी देखना होगा कि कंपनी लागत में कटौती करके इन दबावों को कितना झेल पाती है।
