ACC Cement: रिकॉर्ड बिक्री के बावजूद मुनाफे पर भारी मार, नेट प्रॉफिट **68%** गिरा!

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AuthorNeha Patil|Published at:
ACC Cement: रिकॉर्ड बिक्री के बावजूद मुनाफे पर भारी मार, नेट प्रॉफिट **68%** गिरा!
Overview

ACC Cement के निवेशकों के लिए Q4 FY26 के नतीजे मिले-जुले रहे। एक तरफ कंपनी ने रिकॉर्ड बिक्री (Revenue) और सेल्स वॉल्यूम हासिल किया, वहीं दूसरी तरफ बढ़ती लागतों के चलते नेट प्रॉफिट (Net Profit) में भारी **68%** की गिरावट आई।

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Q4 FY26 नतीजों का लेखा-जोखा: रिकॉर्ड रेवेन्यू पर मुनाफे में 68% की भारी गिरावट

ACC Limited ने 30 अप्रैल 2026 को अपने वित्तीय वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजे जारी किए। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 68.28% घटकर ₹238.25 करोड़ रह गया, जबकि पिछले साल यह ₹751.04 करोड़ था। यह गिरावट तब आई जब कंपनी का रेवेन्यू 16.87% बढ़कर ₹7,146.18 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। सेल्स वॉल्यूम भी 11.9 मिलियन टन के नए रिकॉर्ड पर रहा। प्रॉफिट में इस बड़ी गिरावट का मुख्य कारण ऑपरेटिंग मार्जिन (Operating Margins) का 13.6% से घटकर 8.8% रह जाना है। EBITDA में 24.45% की गिरावट आई और यह ₹627 करोड़ पर आ गया।

वैल्यूएशन गैप: सेक्टर की बहार में ACC की सुस्ती

शेयर बाजार में ACC का वैल्यूएशन (Valuation) इंडस्ट्री के अन्य बड़े खिलाड़ियों की तुलना में काफी पीछे है। जहां ACC का TTM P/E रेशियो लगभग 12.53x है, वहीं UltraTech Cement जैसे प्रतिस्पर्धी 40.8x से 46.08x पर ट्रेड कर रहे हैं, और Shree Cement 41.32x से 51.93x पर। Dalmia Bharat का P/E रेशियो भी लगभग 30.91x से 31.68x के आसपास है। Motilal Oswal ने भी 6.0x FY28E EV/EBITDA का वैल्यूएशन दिया है, जो काफी कंज़र्वेटिव (conservative) लगता है। यह डिस्काउंट ACC की मुनाफा कमाने की चुनौतियों को दर्शाता है, जबकि भारतीय सीमेंट सेक्टर इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) और हाउसिंग (Housing) की बढ़ती मांग के कारण 7-8% की रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के चलते पेटकोक (Petcoke) और कोयले जैसे इनपुट कॉस्ट (Input Costs) में बढ़ोतरी हो रही है, जिसका असर पूरे इंडस्ट्री पर पड़ रहा है। पिछले साल ACC के शेयर में लगभग 24% की गिरावट आई है।

क्यों दबाव में है ACC? लगातार मार्जिन की चिंता

ACC के सामने सबसे बड़ी चुनौती लगातार घटते प्रॉफिट मार्जिन की है, भले ही कंपनी रिकॉर्ड रेवेन्यू बना रही हो और सेक्टर की मांग का फायदा उठा रही हो। मैनेजमेंट के प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर फोकस के बावजूद, ऑपरेटिंग मार्जिन का 8.8% तक गिरना और पिछले आठ तिमाहियों में सबसे कम EBITDA, गहरे स्ट्रक्चरल कॉस्ट इश्यूज (structural cost issues) की ओर इशारा करता है। वित्तीय वर्ष 2027 (FY27) में मांग ग्रोथ के 5% रहने का अनुमान, जो कमजोर मानसून से प्रभावित हो सकता है, जोखिम बढ़ाता है। FY27 की पहली छमाही तक ईंधन (fuel), पैकेजिंग (packaging) और करेंसी (currency) में उतार-चढ़ाव की लागत बढ़ने की उम्मीद है, जिससे अर्निंग्स (earnings) की रिकवरी मुश्किल हो सकती है।

आगे क्या? डिमांड का अनुमान और एनालिस्ट्स की राय

वित्तीय वर्ष 2027 (FY27) के लिए, मैनेजमेंट का अनुमान है कि डिमांड ग्रोथ लगभग 5% रहेगी। Motilal Oswal का अनुमान है कि ACC का EBITDA प्रति टन FY27 में ₹617 और FY28 में ₹695 तक पहुंच सकता है, जो FY26 के ₹614 से मामूली बढ़ोतरी है। ब्रोकरेज ने 'Neutral' रेटिंग बनाए रखी है और FY28E EV/EBITDA के 6.0x मल्टीपल के आधार पर ₹1,310 का टारगेट प्राइस दिया है। यह टारगेट प्राइस अन्य एनालिस्ट्स (Analysts) के 12-महीने के औसत टारगेट प्राइस (₹1,865 से ₹2,004) से काफी कम है, जो 30% से अधिक की संभावित अपसाइड (upside) दर्शाते हैं। अंततः, ACC के अल्पकालिक भविष्य (short-term prospects) इस बात पर निर्भर करेंगे कि वह बढ़ती इनपुट कॉस्ट को कैसे मैनेज करता है, प्रॉफिट मार्जिन को कैसे स्थिर करता है, और इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार (infrastructure expansion) के अवसरों का लाभ उठाकर रेवेन्यू ग्रोथ को प्रॉफिट रिकवरी में कैसे बदलता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.