ऑपरेशनल मुनाफे पर दबाव
ABB India ने Q1 FY26 में ₹3,184 करोड़ का रेवेन्यू पेश किया, जो पिछले साल की तुलना में 5.8% ज्यादा है। लेकिन, कंपनी के ऑपरेशनल मुनाफे पर भारी दबाव देखने को मिला। EBITDA मार्जिन 18.6% से गिरकर 12.8% पर आ गया। इसके चलते, जारी ऑपरेशन्स से शुद्ध लाभ (Profit after tax from continuing operations) में 25% की गिरावट दर्ज की गई और यह ₹342 करोड़ रहा।
कंपनी ने बताया कि इनपुट कॉस्ट, खासकर कॉपर और एल्युमिनियम जैसी धातुओं की कीमतों में बढ़ोतरी, विदेशी मुद्रा की अस्थिरता (forex volatility) और बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण मुनाफे पर असर पड़ा है। इस तिमाही के कुल नेट प्रॉफिट में रोबोटिक्स बिजनेस की बिक्री से हुए ₹1,658 करोड़ के एकमुश्त लाभ (one-time gain) का बड़ा योगदान है, जिसने ऑपरेशनल कमजोरियों को कुछ हद तक छिपा दिया।
एनालिस्ट का 'Hold' रेटिंग और वैल्यूएशन कंसर्न
इन मिले-जुले नतीजों के बाद, ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने ABB India के स्टॉक की रेटिंग को 'Hold' कर दिया है। उन्होंने शेयर का टारगेट प्राइस ₹6,523 तय किया है। यह downgrade इस बात का संकेत है कि पिछले एक साल में स्टॉक में आई करीब 33% की तेजी के बाद, एनालिस्ट अब मार्जिन दबाव और कंपनी के प्रीमियम वैल्यूएशन को लेकर चिंतित हैं।
सेक्टर में बूम, पर कंपनी की वैल्यूएशन पर सवाल
भारत का इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन और इलेक्ट्रिफिकेशन सेक्टर मजबूत सरकारी खर्च (₹11.2 लाख करोड़ FY2026 के लिए अनुमानित) और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के कारण तेजी से बढ़ रहा है। यह सेक्टर 2026 से 2031 के बीच करीब 8.41% के CAGR से बढ़ने की उम्मीद है।
इसके बावजूद, ABB India का वैल्यूएशन काफी महंगा लग रहा है। कंपनी का P/E रेश्यो 78x से 96x के बीच है, जो इंडस्ट्री के औसत 30.62x और इसके प्रतिस्पर्धी Siemens India (जिसका P/E करीब 65.4x है) से काफी ऊपर है। Prabhudas Lilladher ने 2028 के लिए 56x के P/E के आधार पर अपनी वैल्यूएशन तय की है, जो दर्शाता है कि वर्तमान वैल्यूएशन को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
लागत दबाव और भविष्य की राह
आगे चलकर, ABB India को लागत दबाव और प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। कंपनी 75 मिलियन डॉलर का कैपिटल एक्सपेंडिचर भी कर रही है, जिससे शॉर्ट-टर्म मार्जिन पर और दबाव आ सकता है। रोबोटिक्स बिजनेस की बिक्री के बाद, कंपनी का प्रदर्शन अब मुख्य रूप से इलेक्ट्रिफिकेशन और मोशन सेगमेंट पर निर्भर करेगा। ऐसे में, प्रबंधन के लिए मार्जिन को वापस पटरी पर लाना एक बड़ी चुनौती होगी, जो इसके प्रीमियम वैल्यूएशन को सही ठहराने के लिए जरूरी है।
