ABB India के लिए यह तिमाही ऑर्डर्स के मामले में बेहद शानदार रही। कंपनी ने चौथी तिमाही में पिछले साल के मुकाबले 52% ज़्यादा ऑर्डर्स हासिल किए, जो बढ़कर ₹4,096 करोड़ हो गए। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू भी 6% बढ़कर ₹3,557 करोड़ पर पहुँच गया। इससे कंपनी की ऑर्डर बुक 12% बढ़कर ₹10,471 करोड़ हो गई है, जो भविष्य के लिए अच्छी विजिबिलिटी देता है।
ऑर्डर बुक में तेज़ी, पर मुनाफे पर दबाव
जहाँ ऑर्डर्स और रेवेन्यू में बढ़िया ग्रोथ दिखी, वहीं कंपनी के मुनाफे पर भारी दबाव दिखा। चौथी तिमाही में नेट प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 18.4% घटकर ₹434 करोड़ पर आ गया। पूरे फाइनेंशियल ईयर (FY) के नतीजों को देखें तो भी प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) 11.3% और PAT 11.0% की गिरावट के साथ दर्ज किया गया। कंपनी का कहना है कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतें, मज़दूरी का ज़्यादा खर्च, कॉम्पिटिशन और नए लेबर कोड्स के कारण लागतें बढ़ी हैं, जिसने मार्जिन को प्रभावित किया है।
वैल्यूएशन पर विश्लेषकों की चिंता
मुनाफे में इस गिरावट के बावजूद, ABB India का शेयर महंगा दिख रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी का मौजूदा वैल्यूएशन, खास तौर पर इसका हाई प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो, चिंता का विषय है। कंपनी का ट्रेलिंग ट्वेल्व-मंथ P/E रेशियो लगभग 67.5 के आसपास है, जबकि कैलेंडर ईयर 2026 के लिए यह 71 और 2027 के लिए 63 गुना होने का अनुमान है। इसकी तुलना में, प्रतिस्पर्धी कंपनियां जैसे Siemens India का P/E लगभग 48.4, L&T का 33.76 और Polycab India का 44.33 है। इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट सेक्टर में भी ABB India का P/E इंडस्ट्री के मीडियन 45.69 से काफी ज़्यादा है। जब मार्जिन घट रहा हो, तो ऐसे हाई वैल्यूएशन को बरकरार रखना मुश्किल हो सकता है।
ब्रोकरेज की राय और टारगेट प्राइस
इसी को देखते हुए, ब्रोकरेज फर्म Nomura ने स्टॉक पर 'reduce' रेटिंग दी है और टारगेट प्राइस ₹4,620 रखा है, जो पिछले क्लोजिंग प्राइस से करीब 19% की गिरावट का संकेत देता है। उनका मानना है कि इनपुट कॉस्ट में लगातार महंगाई और धीमी ग्रोथ की आशंकाओं के चलते इतना महंगा P/E रेशियो टिकाऊ नहीं है। Macquarie ने भी माना है कि ज़्यादा इम्पोर्ट पर निर्भरता ग्रॉस मार्जिन पर दबाव डाल रही है।
हालांकि, कंपनी के पास ₹5,694 करोड़ का अच्छा कैश रिजर्व है और उसने ₹29.59 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड (Dividend) देने की भी सिफारिश की है।
आगे की राह
आगे की राह देखें तो, विश्लेषकों की राय बंटी हुई है। 26 एनालिस्ट्स के अनुसार, शेयर का औसत टारगेट प्राइस ₹5,280 है, जो मौजूदा स्तर से करीब 10.30% की गिरावट का इशारा करता है। कंपनी मैनेजमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर, रेल और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में निवेश का फायदा उठाने को लेकर आश्वस्त है, लेकिन लागत प्रबंधन और ऑपरेटिंग मार्जिन सुधारना कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी, ताकि मौजूदा हाई वैल्यूएशन को सही ठहराया जा सके।