ऑर्डर्स में तूफानी तेजी, पर मार्जिन पर छाया संकट
ABB India के लिए Q4 CY25 के नतीजे मिले-जुले रहे। एक तरफ जहाँ कंपनी के नए ऑर्डर्स में बंपर 52% की तेजी आई, जो पिछले पांच सालों की चौथी तिमाही में सबसे मजबूत है, वहीं दूसरी तरफ बढ़ती लागतों और रेगुलेटरी बदलावों के चलते मुनाफे (Profitability) पर दबाव देखा गया।
दमदार ऑर्डर इनफ्लो की वजह
ABB India ने Q4 CY25 में ₹4,090 करोड़ के नए ऑर्डर्स हासिल किए, जो पिछले साल के मुकाबले 52% ज्यादा है। बेस ऑर्डर्स में 27% की बढ़ोतरी हुई और बड़े ऑर्डर्स भी बड़ी संख्या में मिले। खासकर Electrification सेगमेंट में 43% की ग्रोथ देखी गई, जिसमें एक बड़े डेटा सेंटर ऑर्डर का बड़ा योगदान रहा, जो अब कुल ऑर्डर बुक का करीब 10-11% है। Process Automation ऑर्डर्स 34% और Robotics & Discrete Automation 283% तक बढ़े।
इस शानदार प्रदर्शन की वजह से कंपनी का ऑर्डर बैकलॉग अब ₹10,470 करोड़ पर पहुँच गया है, जो पिछले क्वार्टर से 6% और पिछले साल से 12% ज्यादा है। यह 2026 तक के लिए कंपनी की रेवेन्यू विजिबिलिटी को मजबूत करता है। डेटा सेंटर, रिन्यूएबल एनर्जी, ऑटोमोटिव और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे ग्रोथ वाले सेक्टर्स में कंपनी की मजबूत पोजिशनिंग इस ग्रोथ को आगे भी बनाए रखने की उम्मीद है। सरकार का कैपिटल एक्सपेंडिचर (CAPEX) पर जोर, जो FY27 के लिए ₹12.2 लाख करोड़ है, कैपिटल गुड्स की मांग को और बढ़ाएगा।
मार्जिन पर दबाव के कारण
रेवेन्यू और ऑर्डर इनफ्लो की अच्छी ग्रोथ के बावजूद, ABB India का मुनाफा दबाव में है। Q4 CY25 में एडजस्टेड EBITDA 7% घटकर ₹613 करोड़ रहा और मार्जिन 230 बेसिस पॉइंट घटकर 17.2% पर आ गया। इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण हैं - प्रोडक्ट मिक्स का बदलना, कमोडिटी की बढ़ती कीमतें, फॉरेन एक्सचेंज (Forex) में उतार-चढ़ाव, और क्वालिटी कंट्रोल (QCO) रेगुलेशन के कारण इम्पोर्टेड मटेरियल का बढ़ना।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मटेरियल कॉस्ट रेवेन्यू का 61% हो गया, जो पिछले साल 58% था। यह QCO रेगुलेशन के चलते हुआ है, जो सितंबर 2026 तक कई प्रोडक्ट्स के लिए लागू होंगे। कंपनी के फुल-ईयर CY25 के लिए प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) मार्जिन 16.9% रहा। नए लेबर कोड का भी करीब ₹650 मिलियन का असर कंपनी के खर्चों पर पड़ा है। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि QCO से जुड़े खर्चों के स्टेबल होने और वॉल्यूम बढ़ने पर मार्जिन में सुधार होगा, लेकिन फिलहाल लागतों का दबाव बना रह सकता है।
वैल्यूएशन और एनालिस्ट्स की राय
ABB India फिलहाल काफी प्रीमियम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है। इसका पिछले 12 महीनों का P/E रेश्यो 69x से 75x के बीच है, जो भारतीय इलेक्ट्रिकल इंडस्ट्री के औसत P/E 25.4x से काफी ऊपर है। वहीं, इसके कॉम्पिटिटर्स जैसे L&T का P/E 35-42x और Siemens India का 60-75x के आसपास है। कंपनी का मार्केट कैप लगभग ₹1.26-1.28 लाख करोड़ है।
एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है। Motilal Oswal ने 'Buy' रेटिंग के साथ टारगेट प्राइस ₹6,600 किया है, जबकि JPMorgan ने 'Neutral' रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट ₹6,001 रखा है। कई एनालिस्ट्स ने 'Hold' रेटिंग दी है और टारगेट प्राइस ₹5,374-₹5,497 के आसपास रखा है।
चिंता की मुख्य वजहें
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि कंपनी अपने मजबूत ऑर्डर बैकलॉग को लगातार बढ़ते मुनाफे में कैसे बदलेगी। कमोडिटी की कीमतों, फॉरेक्स और QCO रेगुलेशन के कारण लागतों का दबाव मुनाफे को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है। QCO की वजह से बढ़ी इम्पोर्ट पर निर्भरता भी लागतों को बढ़ा रही है। इसके अलावा, मार्केट में कॉम्पिटिशन भी बढ़ रहा है।
आगे का रास्ता
ABB India के लिए मार्जिन सुधारना एक बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए कंपनी को एग्जीक्यूशन में सुधार और लागतों को प्रभावी ढंग से मैनेज करना होगा। सरकार के बजट में कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ाने के ऐलान जैसे मैक्रो फैक्टर्स तो सपोर्टिव हैं, लेकिन कंपनी को अपनी प्रीमियम वैल्यूएशन को जस्टिफाई करने के लिए मांग को लाभप्रद ग्रोथ में बदलना होगा।