ABB India के लिए जून तिमाही शानदार रही, कंपनी ने ₹4,363 करोड़ के रिकॉर्ड ऑर्डर दर्ज किए हैं, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में **50%** अधिक है। हालांकि, बढ़ती लागत और करेंसी की अस्थिरता के कारण कंपनी के रेवेन्यू ग्रोथ में तो तेज़ी दिखी, पर ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बना रहा। इन सबके बीच, कंपनी ने अपने शेयरधारकों को खुश करते हुए **₹90** प्रति शेयर का स्पेशल डिविडेंड देने का ऐलान किया है, जो **₹7,243 करोड़** के कैश बैलेंस द्वारा समर्थित है।
नतीजों का पूरा लेखा-जोखा
ABB India ने कैलेंडर वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही के नतीजे जारी किए हैं, जिनमें मजबूत बिज़नेस ग्रोथ के साथ-साथ कुछ ऑपरेशनल चुनौतियों का भी जिक्र है। कंपनी ने ₹4,363 करोड़ के रिकॉर्ड ऑर्डर हासिल किए, जो पिछले साल की इसी तिमाही से 50% की ज़बरदस्त बढ़ोतरी है। रेवेन्यू में भी 21% का स्वस्थ उछाल देखने को मिला और यह ₹3,559 करोड़ तक पहुंच गया। इन सबके बावजूद, कंपनी का नेट प्रॉफिट मामूली 3% बढ़कर ₹362 करोड़ रहा।
मार्जिन पर क्यों है दबाव?
कंपनी लगातार नए बिज़नेस जीत रही है, लेकिन उसके ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन पर ज़बरदस्त दबाव है, जो घटकर लगभग 12.6% पर आ गए हैं। कंपनी के CFO, TK Sridhar ने बताया कि मार्जिन की रिकवरी में समय लगेगा। इसकी मुख्य वजह तांबे (Copper) और चांदी (Silver) जैसे ज़रूरी कच्चे माल की बढ़ती कीमतें, करेंसी में उतार-चढ़ाव और ग्लोबल भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं हैं। निवेशकों के लिए इसका मतलब है कि कंपनी वॉल्यूम में तो बढ़ रही है, लेकिन इस ग्रोथ की लागतें फिलहाल कंपनी की बॉटम-लाइन प्रॉफिटेबिलिटी को तेज़ी से सुधारने की क्षमता को प्रभावित कर रही हैं।
शेयरधारकों के लिए खुशखबरी: स्पेशल डिविडेंड
शेयरधारकों के लिए एक बड़ी खबर यह है कि कंपनी ने ₹90 प्रति शेयर का स्पेशल डिविडेंड देने का फैसला किया है। यह डिविडेंड कंपनी की मजबूत बैलेंस शीट से दिया जाएगा, जिसमें ₹7,243 करोड़ कैश और कैश इक्विवेलेंट्स के रूप में मौजूद हैं। इस मजबूत कैश पोजीशन का एक हिस्सा कंपनी के रोबोटिक्स बिज़नेस के पिछले डिवेस्टमेंट (Divestment) से भी आया है। यह कदम, मौजूदा मार्जिन चुनौतियों के बावजूद, शेयरधारकों को सीधा फायदा पहुंचाएगा।
ग्रोथ के इंजन और भविष्य की राह
डेटा सेंटर्स (Data Centers) ABB India के लिए एक महत्वपूर्ण ग्रोथ एरिया बनकर उभरे हैं, जो कुल ऑर्डर बुक का 15-17% हिस्सा रखते हैं। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर, Sanjeev Sharma के अनुसार, इस सेगमेंट में डिमांड बहुत ज़्यादा है और कंपनी इन ज़रूरतों को पूरा करने के लिए क्षमता (Capacity) में सक्रिय रूप से निवेश कर रही है। ये प्रोजेक्ट्स इसलिए भी आकर्षक हैं क्योंकि ये अक्सर ऑर्डर से रेवेन्यू में तेज़ी से बदलते हैं, कभी-कभी पांच से छह महीनों के भीतर।
इस ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए, कंपनी अपनी सालाना कैपिटल स्पेंडिंग (Capital Spending) ₹300-350 करोड़ बनाए रखने की योजना बना रही है। कंपनी का फोकस अपनी सुविधाओं का 85-90% यूटिलाइजेशन (Utilization) पर है ताकि भविष्य की डिमांड के लिए पर्याप्त गुंजाइश बनी रहे। कंपनी स्थानीय ऑर्डर इनफ्लो (Order Inflow) और ग्लोबल पेरेंट (Global Parent) के परफॉर्मेंस के बीच के अंतर को कम करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है, हालांकि कुछ ग्लोबल कॉन्ट्रैक्ट्स अभी भी सीधे पेरेंट एंटिटी द्वारा बुक किए जाते हैं।
निवेशक इस बात पर नज़र रखेंगे कि क्या कंपनी सफलतापूर्वक कच्चे माल की लागत को आगे बढ़ा पाती है या कमोडिटी की कीमतों में अस्थिरता आने वाली तिमाहियों में मार्जिन विस्तार को सीमित करती रहती है। अगली महत्वपूर्ण अपडेट मैनेजमेंट की कमेंट्री होगी कि कैसे ग्लोबल प्राइस स्टेबिलाइजेशन (Price Stabilization) साल की दूसरी छमाही में उनके ऑपरेटिंग मार्जिन को प्रभावित करता है।
