Zydus Lifesciences अब पारंपरिक जेनेरिक दवाओं के बजाय स्पेशलिटी मेडिसिन, ऑन्कोलॉजी और बायोलॉजिक्स पर फोकस करने जा रही है। कंपनी का लक्ष्य **2030** तक अपनी दवा Saroglitazar के लिए अमेरिकी बाजार में **20%** हिस्सेदारी हासिल करना है।
जेनेरिक से हटकर इनोवेशन पर नजर
Zydus Lifesciences अब अपने बिजनेस मॉडल को पूरी तरह से बदलने की तैयारी कर रही है। कंपनी ने तय किया है कि वह अब जेनेरिक दवाओं के मुकाबले स्पेशलिटी मेडिसिन, कॉम्प्लेक्स बायोलॉजिक्स और मेडिकल डिवाइसेज पर अधिक निवेश करेगी। इसका मुख्य कारण जेनेरिक मार्केट में बढ़ता कंपटीशन और घटता मार्जिन है। कंपनी अब ऐसी दवाओं पर फोकस कर रही है जिनमें प्रॉफिट मार्जिन काफी बेहतर है।
गेम चेंजर: Saroglitazar और ऑन्कोलॉजी
कंपनी की पूरी स्ट्रेटजी Saroglitazar दवा के इर्द-गिर्द घूम रही है। Zydus का लक्ष्य अमेरिका में इस दवा की प्रिस्क्रिप्शन मार्केट शेयर को 18% से 20% तक ले जाना है। हालांकि, इसके लिए अमेरिकी रेगुलेटर से अप्रूवल पाना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। वहीं, भारत में कंपनी अपने ऑन्कोलॉजी पोर्टफोलियो को मजबूत कर रही है। 2028 तक कैंसर केयर के क्षेत्र में लीडर बनने के लिए कंपनी प्रिसिजन डायग्नोस्टिक्स और CAR-T थेरेपी जैसे हाई-टेक इलाज पर काम कर रही है।
फाइनेंशियल बैलेंस और जोखिम
कंपनी ने अपनी विस्तार योजनाओं को फंड करने के लिए एक संतुलित रास्ता चुना है। एक तरफ जहाँ कंपनी का मौजूदा अमेरिकी जेनेरिक बिजनेस उसे कैश फ्लो प्रदान कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह नई बायोलॉजिक्स के लाइसेंसिंग और ब्रांड अधिग्रहण पर जोर दे रही है।
निवेशकों के लिए इस बदलाव में कई रिस्क भी छिपे हैं। बायोलॉजिक्स और स्पेशलिटी दवाओं का ट्रायल लंबा और महंगा होता है। अगर US FDA से समय पर अप्रूवल नहीं मिलता है, तो कंपनी की अर्निंग ग्रोथ पर असर पड़ सकता है। साथ ही, घरेलू मार्केट में भी कई कंपनियां इसी तरह का शिफ्ट कर रही हैं, जिससे आने वाले समय में कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।
