Zydus Lifesciences के शेयरों ने क्रोनिक थेरेपी की मजबूत मांग के दम पर दो साल का नया शिखर छू लिया है। हालांकि कंपनी का रेवेन्यू **22%** बढ़ा है, लेकिन नेट प्रॉफिट में **36%** की गिरावट और **25** के P/E मल्टीपल पर ट्रेड करने से निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं।
क्रोनिक थेरेपी का दम
Zydus Lifesciences के शेयरों में पिछले छह महीनों में 33% का जोरदार उछाल आया है। कंपनी का पूरा जोर अब जेनरिक दवाओं के बजाय हाई-वैल्यू और इनोवेशन-आधारित प्रोडक्ट्स पर है। कंपनी के कुल रेवेन्यू का 54% हिस्सा अब घरेलू क्रोनिक थेरेपी सेगमेंट से आ रहा है, जो इसकी लॉन्ग-टर्म ग्रोथ का बड़ा आधार बना हुआ है।
नतीजों का दोहरा पहलू
मार्केट ने इस नई रणनीति का स्वागत किया है, लेकिन फाइनेंशियल नंबर्स की कहानी थोड़ी अलग है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 22% बढ़कर ₹8,017 करोड़ रहा। हालांकि, नेट प्रॉफिट में साल-दर-साल 36% की बड़ी गिरावट देखी गई है। मार्जिन पर यह दबाव रिसर्च, डेवलपमेंट और नए कॉम्प्लेक्स प्रोडक्ट्स को लॉन्च करने की लागत के कारण बढ़ा है।
वैल्युएशन पर क्या है जोखिम?
इन्वेस्टर अब इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि क्या कंपनी का भविष्य का ग्रोथ प्लान इस गिरावट को कवर कर पाएगा। मौजूदा समय में स्टॉक अपने FY28 के अनुमानित मुनाफे के 25 गुना पर ट्रेड कर रहा है, जो इसके 5 साल के औसत से काफी ऊपर है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी को अब अपने बायोसिमिलर्स और ट्रांसडर्मल दवाओं के पाइपलाइन से मार्जिन में सुधार दिखाना होगा।
ऑपरेशनल अपडेट्स
राहत की बात यह है कि USFDA की हालिया इंस्पेक्शन में कंपनी की प्रमुख फैसिलिटीज को 'निल ऑब्जर्वेशन' मिले हैं। यह अमेरिकी बाजार में नई दवाओं के लॉन्च के लिए बहुत जरूरी था। इसके अलावा, कंपनी ने 'Sunshine Healthcare Lanka' के साथ जॉइंट वेंचर के लिए निवेश की समयसीमा को दिसंबर 2026 तक बढ़ा दिया है, जो इसकी ग्लोबल पार्टनरशिप पर फोकस को दर्शाता है।
