ऑप्टिकल दिग्गज ZEISS ने भारत में अपने ऑपरेशंस को नया आयाम देते हुए Dr Agarwal’s Eye Hospital और Narayana Nethralaya के साथ मल्टी-ईयर पार्टनरशिप की है। यह साझेदारी मेडिकल इक्विपमेंट की खरीद-फरोख्त से आगे बढ़कर क्लीनिकल रिसर्च और प्रोडक्ट डेवलपमेंट पर केंद्रित होगी।
इक्विपमेंट सप्लायर से रिसर्च पार्टनर तक का सफर
जर्मन ऑप्टिक्स और मेडिकल टेक्नोलॉजी की दिग्गज कंपनी ZEISS ने अपनी भारतीय रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब यह सिर्फ अस्पतालों को मशीनें बेचने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इन प्रमुख आई-केयर चेन के साथ मिलकर नई तकनीक विकसित करेगी। इस करार के तहत संयुक्त रूप से प्रोडक्ट डेवलपमेंट, क्लीनिकल रिसर्च और ट्रेनिंग सेंटर्स की स्थापना की जाएगी।
ZEISS का मुख्य लक्ष्य भारत के विशाल क्लीनिकल डेटा का उपयोग करना है। इससे कंपनी अपने 'SMILE' लेजर विजन-करेक्शन सिस्टम जैसी टेक्नोलॉजी को और अधिक सटीक बना पाएगी। वहीं, इन अस्पतालों के लिए यह साझेदारी अत्याधुनिक तकनीक तक जल्दी पहुंच और वैश्विक प्रोटोकॉल को अपनाने का मौका लेकर आई है।
क्यों भारत बन रहा है क्लीनिकल हब?
यह पार्टनरशिप भारतीय हेल्थकेयर इकोसिस्टम के बदलते स्वरूप को दिखाती है। भारत में मरीजों की भारी संख्या नई मेडिकल तकनीकों के वैलिडेशन (validation) के लिए एक बेहतरीन लैब के रूप में काम कर रही है। ZEISS ने हाल ही में IIT Madras के साथ मिलकर चेन्नई में एक रिसर्च फैसिलिटी भी शुरू की है, जो यह साबित करता है कि कंपनी भारत को अपनी ग्लोबल प्रोडक्ट डेवलपमेंट रणनीति का मुख्य केंद्र मान रही है।
निवेशकों के लिए अहम संकेत
हालांकि ये कंपनियां मुख्य रूप से प्राइवेट हैं, लेकिन यह ट्रेंड पूरे हेल्थकेयर सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण है। अगर ये R&D कोलैबोरेशन सफल होते हैं, तो भविष्य में कम लागत वाले और हाई-क्वालिटी मेडिकल डिवाइसेज का निर्माण भारत में ही हो सकेगा, जिससे इम्पोर्ट (import) पर निर्भरता कम होगी। साथ ही, जो अस्पताल चेन ऐसी ग्लोबल पार्टनरशिप हासिल कर रही हैं, वे भविष्य में प्रीमियम टैलेंट और मरीजों को आकर्षित करने में लंबी रेस की घोड़ी साबित होंगी।
