रेवेन्यू में उछाल, मार्जिन में नरमी
दिसंबर 2025 को समाप्त हुई तीसरी तिमाही में Yatharth Hospital ने कुल ₹320.4 करोड़ का रेवेन्यू हासिल किया, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 46.3% ज़्यादा है। कंपनी का EBITDA भी 35.6% बढ़कर ₹74.3 करोड़ पर पहुंच गया। लेकिन, EBITDA मार्जिन 23.1% पर आ गए, जो पिछले साल की समान तिमाही में 25% थे। यह मार्जिन में कमी नए हॉस्पिटल्स, जैसे कि दिल्ली के मॉडल टाउन और फरीदाबाद सेक्टर-20, को पूरी क्षमता में लाने की शुरुआती लागतों का नतीजा है।
इन नए हॉस्पिटल्स ने पहली तिमाही में ही ग्रुप के रेवेन्यू में 9% यानी ₹27.9 करोड़ का योगदान दिया। खास बात यह है कि ये नए सेंटर्स केवल कैश और TPA पेशेंट्स से रेवेन्यू जेनरेट कर रहे हैं, सरकारी बिज़नेस पर निर्भर नहीं हैं। फरीदाबाद वाले हॉस्पिटल ने तीन महीने में ही ₹7-8 करोड़ प्रति माह का रेवेन्यू रन रेट हासिल कर लिया, जबकि दिल्ली वाला हॉस्पिटल चार महीने में ₹5 करोड़ प्रति माह तक पहुंच गया। वहीं, मौजूदा हॉस्पिटल्स ने भी 33% की मजबूत साल-दर-साल रेवेन्यू ग्रोथ दिखाई।
वैल्यूएशन पर सवाल और पियर्स से तुलना
Yatharth Hospital का मौजूदा वैल्यूएशन (Valuation) चर्चा का विषय बना हुआ है। फरवरी 2026 की शुरुआत में, कंपनी का P/E रेश्यो लगभग 39.60 के आसपास है, जो इसके ऐतिहासिक औसत और हॉस्पिटल सेक्टर के मुकाबले महंगा माना जा रहा है। तुलना के लिए, Kovai Medical का P/E 25.39 है, जबकि Aster DM Healthcare का 75.29, Apollo Hospitals का 61.22 और Max Healthcare का 70.79 है। कंपनी का मार्केट कैप लगभग ₹6,000 करोड़ है।
महंगे वैल्यूएशन के बावजूद, स्टॉक के 'mojo score' में 'Sell' से 'Hold' की रेटिंग में सुधार हुआ है, जो जोखिम-इनाम (risk-reward) के बेहतर संतुलन का संकेत दे सकता है। ब्रोकरेज फर्म्स अभी भी 'BUY' रेटिंग बनाए हुए हैं, लेकिन उन्होंने अपने टारगेट प्राइस और वैल्यूएशन मल्टीपल्स को थोड़ा कम किया है।
सेक्टर की चाल और भविष्य का रास्ता
भारतीय हेल्थकेयर सेक्टर लगातार मजबूती दिखा रहा है। इसकी वजहें हैं बढ़ता हेल्थकेयर खर्च, इंश्योरेंस की बढ़ती पहुंच और हॉस्पिटल बेड्स की कमी। प्रति 1,000 आबादी पर सिर्फ 1.5 बेड हैं, जबकि वैश्विक औसत 2.9 है। Yatharth Hospital इस ग्रोथ का फायदा उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है, खासकर फरवरी 2026 में आगरा हॉस्पिटल को इंटीग्रेट (integrate) करने की योजना के साथ।
मैनेजमेंट का फोकस Average Revenue Per Occupied Bed (ARPOB) को बढ़ाने पर है, जो फिलहाल ₹33,744 है, यानी 10% साल-दर-साल बढ़ोतरी। नोएडा एक्सटेंशन जैसे सेंटर्स ने ₹44,000 का रिकॉर्ड ARPOB दर्ज किया है। कंपनी की नई फैसिलिटीज में कैश और TPA पेशेंट्स पर जोर देने की रणनीति इंडस्ट्री के प्रीमियमाइजेशन (premiumization) ट्रेंड के अनुरूप है। पिछले एक साल में स्टॉक ने करीब 48.67% का रिटर्न दिया है, जो बाजार से बेहतर है। हालांकि, निवेशकों को ऊंचे वैल्यूएशन मल्टीपल्स और आगे चलकर परिचालन कुशलता (operational efficiency) बनाए रखने की चुनौती पर नज़र रखनी चाहिए।
