अमेरिकी BIOSECURE Act की चुनौतियों के बीच भी WuXi Biologics ने H1 2026 में **18.4%** की रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है। कंपनी का बैकलाग **$25.1 अरब** के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो बताता है कि वैश्विक फार्मा कंपनियां अभी भी चीनी भागीदारों पर भरोसा जता रही हैं।
मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के पीछे की सच्चाई
भू-राजनीतिक (Geopolitical) दबाव के बावजूद WuXi Biologics ने शानदार वित्तीय नतीजे पेश किए हैं। साल 2026 की पहली छमाही में कंपनी का राजस्व 11.8 अरब RMB रहा है, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 18.4% अधिक है। कंपनी का बैकलाग $25.1 अरब के स्तर पर है, जो यह साबित करता है कि अमेरिकी BIOSECURE Act और WuXi AppTec पर रक्षा मंत्रालय की पाबंदियों के बाद भी दुनिया भर की बड़ी दवा कंपनियां अभी भी चीनी दिग्गज के साथ काम करना जारी रखे हुए हैं।
भारतीय CDMOs के लिए चुनौती क्यों?
फार्मा इंडस्ट्री में 'चाइना प्लस वन' रणनीति की खूब चर्चा है, जिससे भारतीय CDMO कंपनियों के पास प्रस्तावों (Proposals) की संख्या तो बढ़ी है, लेकिन वे इसे बड़े कमर्शियल एग्रीमेंट्स में बदलने में संघर्ष कर रही हैं। दवा बनाने वाली कंपनियां रिस्क लेने से बचती हैं और वे नए पार्टनर की जगह पुराने और भरोसेमंद चीनी वेंडर्स को प्राथमिकता दे रही हैं।
तकनीकी अंतर और भविष्य का नजरिया
भारत की पकड़ पारंपरिक केमिस्ट्री और API में तो मजबूत है, लेकिन बायोलॉजिक्स (Biologics) जैसे जटिल क्षेत्रों में, जैसे कि Antibody-drug conjugates (ADCs) और पेप्टाइड मैन्युफैक्चरिंग, भारतीय कंपनियों को अभी लंबी दौड़ तय करनी है। WuXi Biologics का भारी निवेश और विशाल क्षमता इन्हें एक कॉम्पिटिटिव एज देती है, जिसे फिलहाल छोटी कंपनियां मैच नहीं कर पा रही हैं।
इन्वेस्टर्स के लिए अब दो चीजें अहम हैं: पहली, अमेरिका में भविष्य के नीतिगत बदलाव और दूसरी, भारतीय कंपनियों की बड़े और जटिल प्रोजेक्ट्स को डिलीवर करने की क्षमता। क्या भारतीय कंपनियां अपनी इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी खामियों को दूर कर पाएंगी? इसी पर आगे का खेल निर्भर करेगा।
