Wockhardt के चेयरमैन Habil Khorakiwala ने देसी दवाओं के रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए सरकार से **12 से 14 साल** की रेगुलेटरी डेटा प्रोटेक्शन की मांग की है। कंपनी ने हाल ही में Q2 FY27 के लिए **₹73 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है और इसका शेयर **₹1,887.00** पर बंद हुआ है।
रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए नई नीति की मांग
Wockhardt भारत की फार्मा पॉलिसी में बड़ा बदलाव लाने की वकालत कर रही है। कंपनी के चेयरमैन Habil Khorakiwala का मानना है कि घरेलू स्तर पर विकसित दवाओं के लिए 12 से 14 साल की डेटा प्रोटेक्शन अनिवार्य है, ताकि भारतीय कंपनियां रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) में आने वाली भारी लागत की भरपाई कर सकें। यह कदम भारतीय इनोवेटिव दवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा।
रेगुलेटरी तालमेल की चुनौती
कंपनी ने सरकारी सिस्टम में मौजूद खामियों को भी उजागर किया है। फिलहाल, Central Drugs Standard Control Organisation (CDSCO) और इंडियन पेटेंट ऑफिस के बीच तालमेल की कमी है। वर्तमान में, किसी नई दवा को मार्केट में लाने से पहले रेगुलेटर का पेटेंट स्टेटस चेक करना अनिवार्य नहीं है। कंपनी का तर्क है कि इन दोनों सिस्टम के जुड़ने से स्थानीय कंपनियों को अपनी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
कंपनी का परफॉर्मेंस और फोकस
यह पहल Wockhardt के उस बदलाव का हिस्सा है, जिसमें कंपनी जेनेरिक से हटकर ओरिजिनल रिसर्च की ओर बढ़ रही है। कंपनी की एंटीबायोटिक दवा 'Zaynich' (cefepime + zidebactam) को US FDA और CDSCO से मंजूरी मिल चुकी है। हाल ही में घोषित Q2 FY27 के नतीजों में कंपनी ने ₹73 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, साथ ही रेवेन्यू में साल-दर-साल 24% की बढ़ोतरी देखने को मिली है।
निवेशकों के लिए क्या है स्थिति?
हालांकि यह मांग अभी केवल एक लॉबिंग प्रयास है और सरकारी नीति नहीं बनी है, फिर भी यह फार्मा सेक्टर के लिए एक बड़ा मुद्दा है। भारतीय बाजार लंबे समय से सस्ती जेनेरिक दवाओं पर टिका है, ऐसे में यह प्रस्ताव बहस का विषय बना हुआ है। 3 नवंबर, 2026 को कंपनी का शेयर ₹1,887.00 पर बंद हुआ। निवेशकों के लिए कंपनी का कर्ज प्रबंधन और रिसर्च में किया जा रहा निवेश आगे के लिए अहम संकेतक रहेगा।
