क्या है असली वजह?
यह चौंकाने वाला बयान Eli Lilly के CEO David Ricks ने एक कॉन्फ्रेंस में दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में वजन घटाने वाली दवाओं की भारी मांग के बावजूद, असलियत में केवल 50% ऐसे मरीज ही इन दवाओं का फायदा उठा पाएंगे जिनके लिए ये जरूरी हैं। इसकी मुख्य वजहें हेल्थकेयर सिस्टम की पेचीदगियां और दवाओं की ऊंची कीमत बताई जा रही है।
बड़ी मांग, कम पहुंच
विश्लेषकों का अनुमान है कि GLP-1 दवाओं का मार्केट अगले दशक में $100 बिलियन सालाना के पार जा सकता है। लेकिन, फिलहाल यह मार्केट अपनी पूरी क्षमता का सिर्फ 10% ही इस्तेमाल कर पा रहा है। CEO Ricks ने प्रोडक्शन बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया और इसकी तुलना स्टैटिन (statin) दवाओं से की, जो दिल की बीमारियों के लिए इस्तेमाल होती हैं। स्टैटिन के मामले में भी, जितने लोगों को इसकी जरूरत है, उनमें से केवल 40-50% ही इसका इस्तेमाल कर पाते हैं।
पहुंच में सबसे बड़ा रोड़ा - कीमत
Eli Lilly की Foundayo और Novo Nordisk की Wegovy जैसी दवाएं इस रेस में आगे हैं। लेकिन, इनकी पहुंच बड़ी संख्या में लोगों तक नहीं हो पा रही है, जिसका सबसे बड़ा कारण इनकी कीमत है। सेल्फ-पे (खुद भुगतान करने वाले) मरीजों के लिए ये दवाएं हर महीने $149 से $349 तक महंगी पड़ रही हैं। इसी वजह से ज्यादा लोग इन्हें अपना नहीं पा रहे हैं।
मार्केट वैल्यू और भविष्य
इन चुनौतियों के बावजूद, Eli Lilly का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग $850 बिलियन है और Novo Nordisk का $590 बिलियन। पिछले एक साल में Eli Lilly के शेयर करीब 35% और Novo Nordisk के शेयर 25% चढ़े हैं। यह दिखाता है कि निवेशक इन दवाओं की जबरदस्त मांग और कंपनियों की प्रोडक्शन बढ़ाने की स्ट्रैटेजी पर भरोसा कर रहे हैं।
कॉम्पिटिशन और स्ट्रक्चरल कमियां
वजन घटाने वाली दवाओं का मार्केट फिलहाल Eli Lilly और Novo Nordisk के बीच बंटा हुआ है। दोनों कंपनियां प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए अरबों डॉलर लगा रही हैं। लेकिन, यह एक मुश्किल और समय लेने वाला काम है। साथ ही, इंश्योरेंस कवरेज का न मिलना और मरीजों का जेब पर भारी पड़ना, इन दवाओं के व्यापक प्रसार में बड़ी बाधाएं हैं। भविष्य में नई दवाएं आने और पेटेंट खत्म होने पर कॉम्पिटिशन बढ़ने का खतरा भी बना रहेगा।
आगे क्या?
आगे चलकर, विश्लेषक GLP-1 थेरेपी की मांग में मजबूती जारी रहने की उम्मीद कर रहे हैं। Eli Lilly और Novo Nordisk के लिए सबसे बड़ी चुनौती मांग को पूरा करने के लिए प्रोडक्शन प्लान को सफलतापूर्वक लागू करना और साथ ही ज्यादा से ज्यादा मरीजों तक पहुंच बनाना होगा। हेल्थकेयर सिस्टम, इंश्योरेंस कंपनियों से बातचीत और कीमत जैसे मुद्दों को सुलझाना महत्वपूर्ण होगा।