WTO की डेडलाइन: सस्ती दवाएं मिलना होगा मुश्किल? भारत जैसे देशों पर सीधा असर

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
WTO की डेडलाइन: सस्ती दवाएं मिलना होगा मुश्किल? भारत जैसे देशों पर सीधा असर
Overview

विश्व व्यापार संगठन (WTO) के MC14 (Ministerial Conference 14) में एक अहम फैसले की घड़ी नज़दीक आ रही है। यह फैसला इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) से जुड़ा है और यह तय करेगा कि भारत जैसे विकासशील देशों को भविष्य में सस्ती और ज़रूरी दवाएं कितनी आसानी से मिल पाएंगी। अगर एक पुरानी छूट (moratorium) खत्म हो जाती है, तो ज़रूरी दवाओं के लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया मुश्किल हो सकती है।

IP सुरक्षा पर डेडलाइन का खतरा

विश्व व्यापार संगठन (WTO) की 14वीं मंत्रिस्तरीय बैठक (MC14), जो 29 मार्च 2026 को खत्म होने वाली है, एक ऐसे ज़रूरी फैसले पर विचार कर रही है जो लगभग 30 साल पुरानी एक सुरक्षा से जुड़ा है। यह नियम विकासशील देशों को TRIPS एग्रीमेंट के तहत इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) से जुड़े कुछ व्यापारिक दावों से बचाता है, खासकर 'नॉन-वायलेशन कंप्लेंट्स' (non-violation complaints) के मामले में। सिविल सोसाइटी ग्रुप्स चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यह सुरक्षा खत्म हो जाती है, तो विकासशील देशों के लिए TRIPS की छूटों (flexibilities) का इस्तेमाल करना बहुत सीमित हो जाएगा। ये छूटें कैंसर की दवाओं और एंटीवायरल जैसी जीवनरक्षक दवाओं तक सस्ती पहुंच के लिए बहुत ज़रूरी हैं, क्योंकि ये कम्पलसरी लाइसेंसिंग (compulsory licensing) की इजाज़त देती हैं। पेटेंट वाली दवाओं की तुलना में जेनेरिक दवाएं काफी सस्ती होती हैं। इस सुरक्षा के खत्म होने से ऐसे देशों के खिलाफ WTO में चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं जो ये लाइसेंस जारी करते हैं, और इसके नतीजे में व्यापारिक प्रतिबंध (trade sanctions) भी लग सकते हैं।

IP नियमों पर ग्लोबल मतभेद

इस IP सुरक्षा पर बहस, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी को लेकर दुनिया भर के मतभेदों का केंद्र बनी हुई है। अमेरिका जैसे अमीर देश अक्सर मज़बूत IP सुरक्षा चाहते रहे हैं और उन्होंने भारत की 'सेक्शन 3(d)' जैसी नीतियों पर सवाल उठाए हैं, जिससे इस सुरक्षा को खत्म करने का दबाव है। वहीं, कई विकासशील देश इस सुरक्षा का समर्थन करते हैं। वे पब्लिक हेल्थ और राष्ट्रीय नीतियों के लिए कम्पलसरी लाइसेंसिंग जैसी छूटों को ज़रूरी मानते हैं। दोहा डिक्लेरेशन (Doha Declaration) द्वारा समर्थित ये छूटें सरकारों को स्वास्थ्य संकट या महंगी पेटेंटेड दवाओं की स्थिति में जेनेरिक दवाओं के उत्पादन की इजाज़त देती हैं। मलेशिया और थाईलैंड जैसे देशों ने इन उपायों का उपयोग करके दवाओं की लागत में काफी कमी की है और उनकी पहुंच बढ़ाई है। थर्ड वर्ल्ड नेटवर्क (Third World Network) का कहना है कि ये TRIPS एग्रीमेंट के मूल पहलू हैं, कोई खामी (loophole) नहीं।

WTO का संघर्षरत व्यापार न्यायालय

MC14 में जारी गतिरोध WTO के अंदरूनी ढांचागत समस्याओं को दर्शाता है, खासकर इसके विवाद निपटान प्रणाली (dispute settlement system) और अपीलेट बॉडी (Appellate Body) के ठप पड़ जाने से। एक कार्यशील शीर्ष व्यापारिक अदालत के बिना, WTO की जटिल IP विवादों को सुलझाने और अपने फैसलों को लागू करने की क्षमता काफी कमज़ोर हो गई है। इससे उन देशों के विकल्प सीमित हो जाते हैं जो अपने अधिकारों की रक्षा करना चाहते हैं या अनुचित IP मांगों को चुनौती देना चाहते हैं। जुलाई 2025 में EU और चीन के बीच IP प्रवर्तन (enforcement) पर एक मध्यस्थता निर्णय, जो वैकल्पिक माध्यमों से हुआ, यह दिखाता है कि ये व्यापारिक विवाद कितने जटिल और विवादास्पद होते जा रहे हैं। इस तरह के मूलभूत मुद्दों पर दशकों से सहमति बनाने में WTO की लगातार असमर्थता, वैश्विक अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य ज़रूरतों के अनुरूप खुद को ढालने में इसके व्यापक संघर्ष को उजागर करती है।

बड़े जोखिम और इंडस्ट्री की चिंताएं

कुछ IP शिकायतों के खिलाफ सुरक्षा के समाप्त होने का असर तत्काल दवाइयों तक पहुंच से कहीं आगे जा सकता है। विकासशील देशों के लिए, इसका मतलब राष्ट्रीय नीतियों को तय करने में कम आज़ादी हो सकती है, और उन्हें वैध TRIPS छूटों का उपयोग करने पर शक्तिशाली देशों से ज़्यादा कानूनी लड़ाइयों और संभावित व्यापारिक दंड का सामना करना पड़ सकता है। इससे सरकारों को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने से हतोत्साहित किया जा सकता है। क्रॉपलाइफ इंटरनेशनल (CropLife International) और यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स (U.S. Chamber of Commerce) जैसे इंडस्ट्री ग्रुप्स का तर्क है कि नवाचार (innovation) और निवेश को बढ़ावा देने के लिए मज़बूत IP अधिकारों की ज़रूरत है, और वे इन अधिकारों में किसी भी कमजोरी को हानिकारक मानते हैं। MC14 में इस और ई-कॉमर्स के स्थाई व्यापार नियम जैसे अन्य मुद्दों पर समझौते की कमी, वैश्विक व्यापार नियमों को और खंडित (fragment) करने और WTO की स्थिरता को कमज़ोर करने का जोखिम पैदा करती है। MC14 से पहले मिले कानून निर्माताओं ने भी WTO में व्यापक सुधार की मांग की है, जिसमें विवाद प्रणाली को ठीक करने और विकासशील देशों के लिए समर्थन बढ़ाने की ज़रूरत पर जोर दिया गया है।

भविष्य का संकेत: वैश्विक व्यापार की परीक्षा

MC14 में IP सुरक्षा का परिणाम, प्रतिस्पर्धी हितों के बीच संतुलन बनाने की WTO की क्षमता का एक प्रमुख पैमाना होगा, खासकर वाणिज्यिक IP अधिकारों और सार्वजनिक स्वास्थ्य की ज़रूरतों के बीच। इस मुद्दे को बढ़ाने या हल करने में विफलता, निष्पक्ष व्यापार पर वैश्विक सहयोग में कमजोरी का संकेत दे सकती है, जिससे व्यापारिक घर्षण (trade friction) बढ़ सकता है और दुनिया भर में ज़रूरी दवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने के प्रयासों को नुकसान पहुंच सकता है। इस लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे को संबोधित करने में सम्मेलन की कठिनाई, संगठन की विश्वसनीयता और भविष्य के वैश्विक स्वास्थ्य व आर्थिक संकटों से निपटने की उसकी क्षमता को प्रभावित करने वाली व्यापक शासन चुनौतियों की ओर इशारा करती है।

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